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राम मंदिर चंदा घोटाला के बीच योगी जाएंगे अयोध्या, आसपास भी नहीं भटकेंगे चंपत राय, साफ मना कर दिया गया!

सीएम योगी आदित्यनाथ के अयोध्या दौरे से पहले चंपत राय को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं. प्रशासन ने राम मंदिर में सीएम के दर्शन-पूजन कार्यक्रम के लिए उनसे किसी अन्य व्यक्ति को अपना प्रतिनिधि नामित करने का अनुरोध किया है.

राम मंदिर चंदा घोटाला के बीच योगी जाएंगे अयोध्या, आसपास भी नहीं भटकेंगे चंपत राय, साफ मना कर दिया गया!
Image Source: IANS
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अयोध्या में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रस्तावित दौरे से पहले एक नया घटनाक्रम चर्चा का विषय बन गया है. श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में मुख्यमंत्री के दर्शन-पूजन कार्यक्रम को लेकर तैयारियां तेज हैं, लेकिन इसी बीच राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय का नाम सुर्खियों में आ गया है. प्रशासन की ओर से जारी एक निर्देश के बाद यह चर्चा तेज हो गई है कि मुख्यमंत्री के मंदिर कार्यक्रम में चंपत राय की भूमिका सीमित रह सकती है.

दरअसल, शुक्रवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अयोध्या पहुंचने वाले हैं. उनके कार्यक्रम में श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में दर्शन और पूजा-अर्चना भी शामिल है. ऐसे में सुरक्षा और प्रोटोकॉल को लेकर जिला प्रशासन ने विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं. इन्हीं निर्देशों में एक बिंदु ऐसा भी है जिसने राजनीतिक और धार्मिक गलियारों में नई बहस छेड़ दी है.

चंपत राय से प्रतिनिधि नामित करने का अनुरोध

प्रशासन की ओर से जारी निर्देशों के अनुसार, चंपत राय से कहा गया है कि मुख्यमंत्री के मंदिर कार्यक्रम की व्यवस्थाओं के लिए वह स्वयं की जगह किसी अन्य व्यक्ति को अपना प्रतिनिधि नामित करें. साथ ही उस प्रतिनिधि की जानकारी संबंधित अधिकारियों को उपलब्ध कराने के लिए भी कहा गया है. इस निर्देश के सामने आने के बाद अयोध्या और सूबे की सियासत में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है. कई लोग इसे सामान्य सुरक्षा प्रक्रिया मान रहे हैं, जबकि कुछ लोग इसके पीछे अन्य कारण तलाशने में लगे हैं.

चढ़ावा विवाद के बीच बढ़ी अटकलें

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यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब राम मंदिर के चढ़ावे को लेकर उठे विवाद और उससे जुड़ी चर्चाएं पहले से ही सुर्खियों में हैं. हाल के दिनों में इस मुद्दे को लेकर कई सवाल उठाए गए थे, जिसके बाद मामला सार्वजनिक बहस का हिस्सा बन गया.हालांकि प्रशासन ने अपने निर्देश में किसी विवाद या जांच का सीधा उल्लेख नहीं किया है, लेकिन समय और परिस्थितियों को देखते हुए इस फैसले को लेकर तरह-तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ऐसे संवेदनशील मामलों में हर प्रशासनिक कदम चर्चा का विषय बन जाता है.

आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार

अब तक जिला प्रशासन, राम मंदिर ट्रस्ट या चंपत राय की ओर से इस विषय पर कोई विस्तृत आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है. यही वजह है कि मामले को लेकर उत्सुकता और बढ़ गई है. कई लोगों का कहना है कि यदि यह केवल सुरक्षा व्यवस्था का हिस्सा है तो जल्द ही स्थिति स्पष्ट हो सकती है. वहीं कुछ लोग इसे मौजूदा विवादों से जोड़कर देख रहे हैं. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का अयोध्या दौरा हमेशा चर्चा का विषय रहता है, लेकिन इस बार चंपत राय को लेकर उठे सवालों ने कार्यक्रम को और अधिक सुर्खियों में ला दिया है. फिलहाल यह साफ नहीं है कि प्रतिनिधि नामित करने के निर्देश के पीछे वास्तविक वजह क्या है.

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बहरहाल, मुख्यमंत्री के अयोध्या दौरे और श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में होने वाले कार्यक्रम पर अब सभी की नजरें टिकी हुई हैं. आने वाले समय में प्रशासन और ट्रस्ट की ओर से मिलने वाली किसी भी आधिकारिक प्रतिक्रिया से स्थिति और स्पष्ट हो सकती है.

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