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चुनाव से ठीक पहले तमिलनाडु कांग्रेस में ‘बगावत’- मणिकम टैगोर ने दिया इस्तीफा, जानिए क्या है पूरा विवाद

Tamil Nadu Congress: मणिकम टैगोर ने पार्टी के भीतर संगठनात्मक मतभेदों और टिकट वितरण को लेकर चल रही खींचतान के चलते चुनाव से ऐन पहले अपने पद से इस्तीफा दे दिया है.

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सीनियर कांग्रेस नेता और विरुधुनगर के सांसद मणिकम टैगोर ने पार्टी की चुनाव प्रबंधन और समन्वय समिति के अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया है. यह इस्तीफा 23 अप्रैल को होने वाले तमिलनाडु विधानसभा चुनाव से कुछ ही हफ्ते पहले आया है और इससे राज्य इकाई में आंतरिक मतभेद सामने आए हैं.

सीटों के बंटवारे पर कांग्रेस नेताओं में भारी मतभेद

सूत्रों के अनुसार, सीटों के आवंटन और गठबंधन रणनीति को लेकर वरिष्ठ नेताओं के बीच मतभेद बढ़ गए थे. कई गुटों ने अलग-अलग विचार रखे थे कि किन उम्मीदवारों को किस सीट से नामित किया जाए. टैगोर को इस प्रक्रिया और महत्वपूर्ण निर्णय लेने के तरीके से असंतोष था.

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कांग्रेस नेतृत्व और कार्यकर्ताओं के बीच मन-मुटाव

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पार्टी सूत्रों ने बताया कि यह इस्तीफा केवल व्यक्तिगत मामला नहीं है, बल्कि पार्टी नेतृत्व और स्थानीय कार्यकर्ताओं में बढ़ते असंतोष को दर्शाता है. कांग्रेस को डीएमके नेतृत्व वाले गठबंधन में सीमित हिस्सेदारी मिलने को लेकर भी चिंता बढ़ रही थी.

कांग्रेस को 28 विधानसभा और एक राज्यसभा सीट

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गठबंधन के तहत कांग्रेस को 28 विधानसभा सीटें और एक राज्यसभा सीट दी गई हैं. कुछ नेताओं ने चुनाव के बाद सरकार में और प्रभावी भूमिका की मांग की थी. टैगोर भी कैबिनेट में प्रतिनिधित्व को लेकर स्पष्ट आश्वासन चाहते थे, लेकिन डीएमके ने कहा कि फिलहाल केवल सीटों के बंटवारे पर समझौता है, सत्ता में हिस्सेदारी पर कोई प्रतिबद्धता नहीं है.

गठबंधन के बीच इस्तीफे ने मचाई सियासी हलचल

इस इस्तीफे का समय भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इस दौरान गठबंधन के साथी पूरे राज्य में प्रचार तेज कर रहे हैं. कांग्रेस में इसे व्यापक असंतोष का संकेत माना जा रहा है, क्योंकि कई कार्यकर्ता चाहते हैं कि पार्टी तमिलनाडु में अधिक प्रभावी भूमिका निभाए.

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कांग्रेस को आपसी मतभेद जल्द सुलझाने होंगे

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वरिष्ठ नेताओं के प्रयासों के बावजूद, यह इस्तीफा चुनावी स्थिति को और जटिल बना देता है. डीएमके नेतृत्व वाला गठबंधन पहले से ही एआईडीएमके और पहली बार चुनाव में उतर रही तमिलगा वेत्री कझगम जैसी पार्टियों से कड़ी मुकाबला कर रहा है. जैसे-जैसे प्रचार तेज हो रहा है, कांग्रेस नेतृत्व को जल्दी से जल्दी आंतरिक मतभेदों को हल करना होगा ताकि संगठनात्मक समस्याएं गठबंधन में उसके चुनावी प्रदर्शन को प्रभावित न करें.

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