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मानालूर में सियासी संग्राम: विरासत, दिग्गज और नई रणनीतियों के बीच दिलचस्प मुकाबला
केरल की मानालूर विधानसभा सीट एक बार फिर हाई-प्रोफाइल मुकाबले का केंद्र बन गई है. यह सीट न सिर्फ चुनावी दृष्टि से अहम मानी जाती है, बल्कि राज्य की राजनीतिक विरासत, नेताओं की छवि और दलों की रणनीति का संगम भी है.
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केरल की मानालूर विधानसभा सीट एक बार फिर हाई-प्रोफाइल मुकाबले का केंद्र बन गई है. यह सीट राज्य की राजनीतिक विरासत, नेताओं की छवि और पार्टियों की रणनीति के संगम का प्रतीक मानी जाती है, जहां इस बार मुकाबला बेहद दिलचस्प हो गया है.
मानालूर सीट पर दिग्गजों के बीच कड़ा मुकाबला
मानालूर की पहचान राज्य के पहले शिक्षा मंत्री जोसेफ मुंडासेरी से जुड़ी रही है, जिन्होंने ईएमएस नंबूदिरीपाट की ऐतिहासिक 1957 सरकार में अहम भूमिका निभाई थी. यही राजनीतिक विरासत आज भी इस सीट के चुनावी माहौल को प्रभावित करती है.
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इस विरासत को आगे बढ़ाने की कोशिश सीपीआई(एम) के उम्मीदवार सी. रवींद्रनाथ कर रहे हैं, जो पूर्व शिक्षा मंत्री रह चुके हैं. 70 वर्षीय रवींद्रनाथ एक रिटायर्ड केमिस्ट्री प्रोफेसर हैं और अपनी सादगी व प्रशासनिक समझ के लिए जाने जाते हैं. हालांकि, 2024 लोकसभा चुनाव में चलाकुडी सीट से उन्हें हार का सामना करना पड़ा था, लेकिन पार्टी को भरोसा है कि उनकी साफ छवि और शांत स्वभाव मतदाताओं को आकर्षित करेगा. खास बात यह भी है कि पिछले दो चुनावों में यहां सीपीआई(एम) के मुरली पेरुन्नल्ली ने जीत दर्ज की थी.
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मानालूर सीट पर कांग्रेस का पलड़ा भारी
वहीं, कांग्रेस की ओर से अनुभवी नेता टीएन प्रथापन चुनावी मैदान में हैं, जो संगठन में मजबूत पकड़ रखते हैं. मानालूर सीट का इतिहास कांग्रेस के पक्ष में रहा है, जहां 15 में से 11 बार पार्टी को जीत मिली है. इस परंपरा को मजबूत बनाने में वरिष्ठ नेता वीएम सुधीरन की बड़ी भूमिका रही है. सुधीरन और प्रतापन के बीच मजबूत तालमेल कांग्रेस के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है.
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इस बीच, भाजपा भी मैदान में है, लेकिन इस बार पार्टी के प्रमुख चेहरे एएन राधाकृष्णन हैं, जिन्होंने पिछले दो चुनावों में करीब 22 प्रतिशत वोट हासिल किए थे, लेकिन इस बार वे चुनाव नहीं लड़ रहे हैं. उनकी जगह पार्टी ने स्थानीय नेता केके अनीश कुमार को उम्मीदवार बनाया है, जो पार्टी का जनाधार बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं.
भाजपा को उम्मीद है कि त्रिशूर लोकसभा सीट से अभिनेता-राजनेता सुरेश गोपी की ऐतिहासिक जीत का असर इस क्षेत्र में भी दिखेगा. मानालूर इसी संसदीय क्षेत्र के अंतर्गत आता है, और गोपी के प्रचार से पार्टी को फायदा मिलने की उम्मीद है.
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