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'ना मंदिर टूटा ना मूर्ति...', काशी की जनता ने विपक्ष के फर्जी प्रोपेगेंडा को किया ध्वस्त, मणिकर्णिका घाट तोड़े जाने के वायरल वीडियो की सच्चाई आई सामने

वाराणसी में मणिकर्णिका घाट पर मूर्तियों और मंदिरों के तोड़े जाने को लेकर किए जा रहे विपक्ष के दावों की कलई खुल गई है. कांग्रेस-सपा के दावों की धज्जियां सबूत के साथ उड़ गई हैं. सरकार और प्रशासन के अलावा खुद NMF News ने ऑन ग्राउंड जाकर स्थिति देखी. इसमें कोऑर्डिनेटेड फेक नैरेटिव का बुलबुला फूट गया.

वाराणसी के महाश्मशान के नाम से प्रसिद्ध मणिकर्णिका घाट पर हर वर्ष लाखों की संख्या में शवदाह होते हैं. शवदाह की अधिक संख्या के कारण यहां जगह की कमी के साथ-साथ साफ-सफाई और व्यवस्थाओं को बनाए रखने में भी कई प्रकार की चुनौतियां सामने आती हैं. इन्हीं समस्याओं को ध्यान में रखते हुए घाट पर एक व्यापक विकास परियोजना लागू की जा रही है, ताकि व्यवस्थाओं को सुव्यवस्थित और सुचारू बनाया जा सके.

परियोजना के तहत शवदाह के लिए नए और व्यवस्थित प्लेटफॉर्म तैयार किए जा रहे हैं, जिससे श्रद्धालुओं और परिजनों को सुविधा मिल सके. इसी कायाकल्प के कार्य को लेकर बुलडोजर का इस्तेमाल किया गया. इसे लेकर विपक्ष द्वारा तमाम तरह के दावे किए जा रहे हैं और आरोप लगाए जा रहे हैं. इस दौरान देखा जा रहा है कि एआई और एडिटेड टूल्स के जरिए एक तबका, खासकर कांग्रेस, सपा, आरोप लगा रहा है कि इस कार्रवाई में जबरन ऐतिहासिक मंदिरों और कलाकृतियों को तोड़ दिया गया. हालांकि आम स्थानीय लोगों और काशी के डोम राजा परिवार के लोगों ने भी विपक्ष के दावे की हवा निकाल दी है.

शासन-प्रशासन, नेता और मीडिया से इतर NMF News ने खुद ऑन ग्राउंड जाकर विपक्ष के आरोपों और मणिकर्णिका घाट के कायाकल्प के दावों की हकीकत स्थानीय लोगों से जानी.

'जहां कभी ठंडी नहीं पड़ती चिता की राख, वो है मणिकर्णिका घाट'

आपको बता दें कि मणिकर्णिका घाट के बारे में पौराणिक मान्यता है कि कभी इस घाट पर चिता की राख ठंडी नहीं पड़ती और लगातार यहां शवदाह होता रहता है. बनारस की अगर बात करें तो मणिक घाट पर केवल बनारस ही नहीं, बल्कि पूर्वांचल सहित पूरे बिहार और दूर-दराज से लोग अपनों का अंतिम संस्कार करने के लिए यहां पहुंचते हैं. इसी महत्व को समझते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने इस घाट के कायाकल्प का संकल्प लिया और यह काम अब जोर-शोर से चल रहा है.

जब NMF News ने घाट पर अंतिम संस्कार में शामिल होने आए लोगों से बात की तो उनका जवाब काफी हैरान करने वाला था. जब उनसे पूछा गया कि मणिकर्णिका घाट पर जो डेवलपमेंट का काम चल रहा है, कितना जरूरी था, तो उन्होंने कहा कि यह बहुत जरूरी था. यहां लाश जलाने की भी सुविधा उतनी उपलब्ध नहीं थी. आदमी को बैठने की भी सुविधा नहीं थी. अब सब होने के बाद आदमी आराम से आएगा, बैठेगा, जो भी काम करना है, क्रियाक्रम करेगा और निकल जाएगा. पहले यह व्यवस्था नहीं थी. अब सौंदर्यीकरण होने पर यह व्यवस्था लागू हो जाएगी.

काशी के डोम राजा परिवार के अध्यक्ष विश्वनाथ चौधरी ने मणिकर्णिका घाट पर मूर्तियों के खंडित होने के विपक्ष के नैरेटिव और प्रोपेगेंडे को सिरे से खारिज कर दिया. उन्होंने कहा कि इसकी बहुत जरूरत थी. उन्हीं लोगों से सरकार से मांग की थी कि इस घाट का कायाकल्प किया जाए. आपको बता दें कि मणिकर्णिका घाट की समस्याओं को डोम राजा परिवार से बेहतर कोई नहीं जान सकता. परिवार 24 घंटे वहीं रहता है और जितने भी श्राद्ध कर्म होते हैं उसमें लकड़ी वही प्रदान करते हैं. """योगी जी से हम लोग खुद प्रार्थना किए थे कि सर, हम लोगों के घाट को भी थोड़ा अच्छा बनवाया जाए. यहां पर दबंग किस्म के लोग हैं. लकड़ी पर कब्जा करके मनमाने ढंग से पैसा लेते हैं और लकड़ी बेचते हैं. शव यात्रियों को बहुत दिक्कत होती है. इसीलिए हम लोग मोदी जी से गुहार लगाए थे कि हम लोगों का घाट बनाया जाए. सबको एक सिस्टम में रखा जाए. यहां पर एक व्यवस्था हो जाए, ताकि बाहर से आने वाले 100 यात्री भी ईमानदारी से अपना काम कराएं और अपने घर जाएं."

कोई मूर्ति खंडित नहीं हुई है: डोम राजा

वहीं कथित तौर पर मूर्तियों के खंडित होने को लेकर सोशल मीडिया पर वायरल हो रही कुछ तस्वीरों पर उन्होंने कहा कि कोई मूर्तियां खंडित नहीं हुई हैं. मूर्तियां उसी तरह हैं, जिस तरह थीं. उन्हें उठाकर एक जगह रखा गया है. यहां कार्य पूरा हो जाएगा, फिर मूर्तियां आकर यहां स्थापित हो जाएंगी. बस यही हुआ है. लोग खाली गलतफहमी में अफवाह उड़ा रहे हैं कि मूर्तियां तोड़ दी गई हैं, यह हो गया है, वह हो गया है. पहले बहुत असुविधा थी. धुआं लगता था, रास्ता नहीं था. अब तो बहुत कुछ हो रहा है. धीरे-धीरे प्रोग्रेस हो रहा है, होगा भी.

'बैठने तक की व्यवस्था नहीं थी, बहुत सुंदर काम हो रहा है'

वहीं मणिकर्णिका घाट के पास में ही दुकान लगाने वाले एक दुकानदार ने कहा कि बहुत बढ़िया, बहुत सुंदर काम है. इसकी जरूरत थी, बहुत जरूरत थी. बैठने लायक कोई सुविधा नहीं थी. अब तो सारी सुविधाएं हो जाएंगी. बाबा जी, बहुत दूर-दराज से लोग आते हैं. यहां सिर्फ स्थानीय नहीं, बल्कि पूरे पूर्वांचल से आते हैं. देश-विदेश से भी बॉडी आती है यहां. लोग बैठ नहीं पाते थे, ऐसे ही खड़े रहते थे, घूमते चले जाते थे, धुआं लेकर चले जाते थे. अब तो वह सुविधा मिलेगी. बहुत जरूरी था, बहुत जरूरी था. अब हो रहा है अति उत्तम.

'यह बहुत पहले होना चाहिए था'

इसके अलावा जब मोदी-योगी सरकार की पहल को लेकर सवाल किया गया तो उन्होंने पलटकर कहा कि बहुत अच्छा हो रहा है. यह बहुत पहले होना चाहिए था. अब हो रहा है तो बहुत बढ़िया है. लोग दूर-दराज से आते हैं, बैठने की जगह नहीं थी. जितनी भी डेड बॉडी आती थीं, उनकी व्यवस्था नहीं थी. एक पर एक जलती थीं, अब व्यवस्था होगी, लोगों को बैठने की जगह मिलेगी. गाजीपुर, बलिया, रसड़ा, आरा, बिहार, पटना कहां-कहां से लोग आते हैं. सबको सुविधा होगी.

'पहले नहीं दिया जाता था हिंदू धर्मों के कार्य को कोई महत्व'

वहीं एक व्यक्ति ने कहा कि सरकार बहुत अच्छा काम कर रही है. इससे पहले हिंदू धर्मों को कोई महत्व नहीं दिया जाता था. अब हिंदू धरोहरों पर भी काम हो रहा है. योगी सरकार सुपर से ऊपर चल रही है, महाराज. पहले की सरकारों ने सनातन धर्म के लिए कुछ नहीं किया. आज सरकार देख रही है. दोनों तरफ विकास हो रहा है.

वहीं अनुराग दुबे नाम के एक व्यक्ति ने कहा कि चौड़ीकरण और सौंदर्यीकरण का कार्य बहुत जरूरी था. पहले जगह कम थी, अब सुविधा बढ़ेगी. विपक्ष के आरोपों पर उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर मूर्तियों के टूटने की अफवाहें हैं, लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ. मूर्तियों को सुरक्षित हटाकर रखा गया है और काम पूरा होने के बाद पुनः स्थापित किया जाएगा.

मणिकर्णिका घाट की पौराणिकता जस की तस: नीलकंठ तिवारी

हालांकि सरकार और प्रशासन ने सबूत के साथ विपक्ष के दावों की हवा निकाल दी है. स्थानीय विधायक नीलकंठ तिवारी और मेयर पूरे दलबल के साथ मीडिया को लेकर जीर्णोद्धार स्थल पर पहुंचे और खुद वस्तुस्थिति को देखा और चुन-चुनकर जवाब दिया. उन्होंने दो टूक कहा कि मणिकर्णिका घाट की पौराणिकता जस की तस है, उसे छेड़ा नहीं गया है. उन्होंने आगे कहा कि विपक्ष लगातार समाज में वैमनस्य फैलाने का काम कर रहा है और झूठा नैरेटिव सेट कर रहा है. तिवारी ने सबूत के साथ बताया कि मंदिरों और मूर्तियों के टूटने की बात भ्रामक है. एआई जेनरेटेड वीडियो के जरिए शासन और प्रशासन की छवि खराब करने की कोशिश हो रही है.

वहीं यूपी सरकार के मंत्री एके शर्मा ने विपक्ष के आरोपों पर तीखा हमला बोला और जोरदार जवाब दिया. उन्होंने दो टूक कहा, “मैं काशी और उसके घाटों से भली-भांति परिचित हूं. अपने परिवार के कई स्वर्गीय लोगों की अंतिम क्रिया के लिए भी मैं मणिकर्णिका घाट पर कई बार गया हूं. हाल में मणिकर्णिका घाट की सुंदरता, व्यवस्था और सुविधा बढ़ाने का कार्य आरंभ हुआ है. घाट पर आने वाले पौराणिक मंदिरों एवं चिन्हों का समुचित संरक्षण करते हुए घाट पर अंतिम संस्कार हेतु आने वाले बड़ी संख्या में लोगों के लिए बुनियादी व्यवस्थाओं का विकास करने की दृष्टि से यह कार्य हो रहा है.”

"जिन लोगों ने दशकों तक मणिकर्णिका घाट पर एक ईंट तक नहीं रखी"

मंत्री एके शर्मा ने विपक्ष से सवाल पूछा कि जिन लोगों के कई दशकों के शासनकाल में मणिकर्णिका घाट पर एक ईंट तक नहीं रखी गई, न ही बदली गई, वही लोग यहां चल रहे पुनर्निर्माण कार्य के संबंध में मीडिया में भ्रामक खबरें फैला रहे हैं.

मणिकर्णिका घाट की मूर्तियों-मंदिरों का संरक्षण हो रहा:मंत्री एके शर्मा

वहीं विपक्ष के नैरेटिव का खंडन करते हुए उन्होंने कहा कि सच्चाई यह है कि इस घाट पर स्थित सभी पौराणिक मंदिरों का समुचित संरक्षण करते हुए घाट पर अंतिम संस्कार हेतु बड़ी संख्या में आने वाले लोगों की सुविधा और भविष्य की आवश्यकताओं को देखते हुए व्यवस्थाओं का विकास किया जा रहा है. उन्होंने आगे कहा कि सोशल मीडिया पर प्रसारित किए जा रहे कई वीडियो और फोटो सीढ़ियों और मढ़ी पर बनी विभिन्न कलाकृतियों के हैं, जो मशीन से कार्य कराए जाने के दौरान थोड़ी-बहुत प्रभावित हुई हैं. इन्हें पृथक रूप से सुरक्षित रखवाया गया है और मढ़ी के पुनर्निर्माण में पुनर्स्थापित किया जाएगा. इस प्रक्रिया में कोई मंदिर प्रभावित नहीं हुआ है.

मणिकर्णिका घाट पर टूटी मूर्तियों को लेकर क्या बोले वाराणसी DM?

इसके अलावा जिलाधिकारी वाराणसी सत्येंद्र कुमार ने सोशल मीडिया पर वायरल हो रही कुछ तस्वीरों और वीडियो को लेकर भी स्थिति स्पष्ट की. उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर जो तस्वीरें साझा की जा रही हैं, वे घाटों और सीढ़ियों पर बनी अलग-अलग कलाकृतियों से संबंधित हैं. कुछ लोग एआई के माध्यम से मंदिरों और विग्रहों से जुड़े भ्रामक वीडियो बनाकर अफवाह फैला रहे हैं. उन्होंने स्पष्ट किया कि घाट पर मौजूद सभी कलाकृतियां और मूर्तियां पूरी तरह संस्कृति विभाग के संरक्षण में हैं और उन्हें पुनर्स्थापित किया जाएगा. मणिकर्णिका घाट पर बने मंदिर पहले की तरह सुरक्षित और यथावत रहेंगे.

मणिकर्णिका घाट को लेकर फैले अफवाह को लेकर प्रशासन सख्त

जिलाधिकारी ने यह भी कहा कि सोशल मीडिया पर अफवाह फैलाने वालों की पहचान की जा रही है और उन पर लगातार नजर रखी जा रही है. आवश्यकता पड़ने पर ऐसे तत्वों के खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी. प्रशासन का उद्देश्य स्पष्ट है कि मणिकर्णिका घाट की पवित्रता, सांस्कृतिक विरासत और श्रद्धालुओं की आस्था को किसी भी स्थिति में आघात न पहुंचे.

क्यों पड़ी मणिकर्णिका घाट के जिर्णोद्धार की जरूरत?

वहीं मणिकर्णिका घाट के कायाकल्प की जरूरत के बारे में जिलाधिकारी ने बताया कि शवदाह के बाद बची राख अक्सर आसपास के घरों और स्थानों पर फैल जाती है, जिससे स्थानीय लोगों को परेशानी होती है. इस समस्या के स्थायी समाधान के लिए घाट पर ऊंची चिमनी का निर्माण किया जा रहा है, जिससे राख का उचित निस्तारण संभव हो सके. साथ ही शवदाह में प्रयुक्त लकड़ी को अब व्यवस्थित ढंग से रखने की व्यवस्था की जा रही है, ताकि अव्यवस्था और गंदगी की स्थिति न बने. मुंडन संस्कार के लिए आने वाले लोगों को भी अब तक कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था, जिसे देखते हुए उनके लिए भी बेहतर सुविधाएं विकसित की जा रही हैं.

एक वर्ष से लगातार चल रही है मणिकर्णिका घाट के कायाकल्प की परियोजना

उन्होंने आगे बताया कि यह परियोजना पिछले एक वर्ष से लगातार चल रही है. इसके अंतर्गत घाट के कच्चे हिस्से में नए निर्माण कार्य किए जा रहे हैं, जबकि पक्के हिस्सों का पुनर्स्थापन और सुदृढ़ीकरण किया जा रहा है.

इसका उद्देश्य घाट की पारंपरिक पहचान को बनाए रखते हुए आधुनिक आवश्यकताओं के अनुरूप सुविधाओं का विकास करना है, ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो.

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