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ठाकरे ब्रदर्स भी हारे, पवार परिवार को भी चटाई धूल...BMC, पुणे-पिंपरी...फडणवीस ने ध्वस्त किया क्षेत्रीय क्षत्रपों का किला

महाराष्ट्र निकाय चुनावों में भाजपा-शिवसेना गठबंधन का दबदबा देखने को मिला है. बीजेपी ने न सिर्फ ‘ठाकरे ब्रदर्स’ (उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे) को धूल चटाई है, बल्कि पवार परिवार को भी जमीन पर लाकर खड़ा कर दिया है.

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17 Jan 2026
( Updated: 17 Jan 2026
08:44 AM )
ठाकरे ब्रदर्स भी हारे, पवार परिवार को भी चटाई धूल...BMC, पुणे-पिंपरी...फडणवीस ने ध्वस्त किया क्षेत्रीय क्षत्रपों का किला
BJP Won in Maharashtra Local Body Elections

महाराष्ट्र की 29 नगर निगमों यानी निकाय चुनावों में बीजेपी ने अपनी बादशाहत साबित कर दी है. इस चुनाव में मिले जनादेश से पता चलता है कि महाराष्ट्र में अब हिंदुत्व की राजनीति का खेवनहार और चेहरा देवेंद्र फडणवीस बन गए हैं. उनके नेतृत्व में पार्टी न सिर्फ मजबूत हो रही है, सरकार बना रही है, बल्कि संगठन के स्तर पर भी अलग ही जोश में नजर आ रही है. लोकसभा चुनाव में मिले सेटबैक के बाद जिस तरह भगवा पार्टी ने कमबैक कर विधानसभा चुनाव और स्थानीय व निकाय चुनावों में जीत दर्ज की है, वह अद्भुत और अकल्पनीय है.

यह सिर्फ बीजेपी-महायुति की जीत नहीं है, बल्कि ठाकरे परिवार की मुंबई में एकछत्र राज, मराठी मानुष की राजनीति पर एकाधिकार और हिंदुत्व के पैरोकार के नैरेटिव को भी ध्वस्त कर दिया गया है. बीजेपी ने एक ओर जहां BMC में शिवसेना के हाथ से सत्ता छीनी है, वहीं पहली बार मुंबई में अपना मेयर बनाने जा रही है. इतना ही नहीं, ठाकरे ब्रदर्स के अलावा पुणे में चाचा-भतीजे की जोड़ी को भी धूल चटा दी है.

ये नतीजे न सिर्फ जनादेश हैं, बल्कि ये संदेश भी हैं कि शरद पवार की राजनीति अब अस्त की ओर है. ‘चाणक्य’ का रुतबा अब ध्वस्त हो गया है और अजित पवार के लिए भी यह संदेश है कि उनका अस्तित्व भी महायुति के साथ ही जुड़ा है. अजित पवार ने लोकल बॉडी चुनावों में अपनी अलग लाइन लेने की कोशिश की थी और चाचा की पार्टी NCP-SCP के साथ मिलकर लड़ा, लेकिन इसका कोई फायदा नहीं हुआ.

मुंबई और ठाणे समेत महाराष्ट्र की 29 नगर निगमों के लिए 15 जनवरी को मतदान हुए. शुक्रवार को नतीजों की घोषणा शुरू हुई और साफ हो गया कि मुंबई का ‘किंग’ भाजपा-शिवसेना गठबंधन है. सभी की निगाहें बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) के चुनाव नतीजों पर टिकी रहीं. रुझानों से स्पष्ट है कि भाजपा पारंपरिक गढ़ों में भी गहरी पैठ बना रही है.

BMC में खत्म हुई शिवसेना की 40 साल पुरानी सत्ता

आपको बता दें कि मुंबई के सभी 227 वार्डों के चुनाव परिणाम घोषित कर दिए गए हैं. बीजेपी ने अविश्वसनीय प्रदर्शन करते हुए 89 सीटें जीती हैं. वहीं उसकी सहयोगी शिवसेना के खाते में 29 सीटें गई हैं. उद्धव की शिवसेना (यूबीटी) को 65 और MNS को छह सीटें मिली हैं.

वंचित बहुजन अघाड़ी और कांग्रेस को 24 सीटें मिली हैं. AIMIM ने भी अपने प्रदर्शन से चौंकाया है, जिसे 8 सीटें मिली हैं. एनसीपी को 3, समाजवादी पार्टी को 2 और एनसीपी (शरद चंद्र पवार) को सिर्फ एक सीट मिली है.

महाराष्ट्र में बीजेपी की ऐतिहासिक जीत

रिपोर्ट के मुताबिक महाराष्ट्र के 29 नगर निकायों की कुल 2,869 सीटों में से 2,841 सीटों के परिणाम घोषित किए जा चुके हैं. शेष 35 सीटों को लेकर मध्यरात्रि तक राज्य निर्वाचन आयोग (SEC) की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया था. यानी कुछ सीटों के नतीजे आना अभी बाकी हैं. यह भी बता दें कि कुछ सीटों पर फैसला चुनाव से पहले ही हो गया था, जहां प्रत्याशियों की निर्विरोध जीत हुई थी.

अब तक के परिणामों के मुताबिक बीजेपी ने 1,400 सीटों पर जीत दर्ज की है, जबकि उसकी सहयोगी शिवसेना ने 397 सीटें हासिल की हैं. वहीं शिवसेना (यूबीटी) को 153 सीटें मिली हैं और एमएनएस को राज्य में 13 सीटों से संतोष करना पड़ा है. कांग्रेस ने कुल 324 सीटों पर जीत हासिल की है.

बीजेपी के नेतृत्व वाले गठबंधन ने BMC में 118 सीटें जीतकर 227 सदस्यीय सदन में 114 सीटों के बहुमत के आंकड़े को पार कर लिया है. BMC देश की सबसे अमीर नगर निकाय है, जिसका 2025-26 के लिए बजट 74,427 करोड़ रुपये का है. ऐसे में पूरे चांस हैं कि इस बार BMC में बीजेपी का मेयर बनेगा.

 ठाणे में शिंदे का जलवा, गढ़ और मजबूत

उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के गृह क्षेत्र और उनके गढ़ माने जाने वाले ठाणे में शिवसेना ने जोरदार प्रदर्शन किया है. महायुति गठबंधन में लड़ने वाली शिंदे की पार्टी ने 131 सीटों में से 75 सीटें जीतीं, जबकि सहयोगी बीजेपी ने 28 सीटें हासिल कीं. राज्य निर्वाचन आयोग ने बताया कि 29 नगर निकायों में मतदान प्रतिशत 54.77 रहा.

पिंपरी-चिंचवाड़ में पवार परिवार की बादशाहत खत्म

आपको बता दें कि बीजेपी ने इस बार क्षेत्रीय क्षत्रप कहे जाने वाले पवार परिवार को भी धूल चटा दी है. महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार को राजनीतिक दृष्टि से बड़ा झटका लगा है. पुणे और पिंपरी-चिंचवाड़ नगर निगम चुनावों में एनसीपी के उनके गुट को करारी हार का सामना करना पड़ा है. इस हार ने न केवल भाजपा को उनके गृह क्षेत्र में चुनौती देने की उनकी रणनीति को ध्वस्त कर दिया है, बल्कि महायुति गठबंधन में दबी हुई भूमिका निभाने के अलावा उनके पास कोई विकल्प भी नहीं छोड़ा है.

अजित पवार ने एनसीपी के भीतर अपने विद्रोह के बाद से भाजपा के साथ सौहार्दपूर्ण संबंध बनाए रखे थे, खासकर उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और भाजपा के बीच लगातार होने वाले टकरावों की तुलना में. हालांकि, जब मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने घोषणा की कि भाजपा पुणे और पिंपरी-चिंचवाड़ चुनाव स्वतंत्र रूप से लड़ेगी, तो पवार ने अपनी रणनीति बदल दी.

अजित पवार की ‘दोहरी रणनीति’ पूरी तरह फेल

एक अप्रत्याशित कदम उठाते हुए उन्होंने शरद पवार के एनसीपी गुट के साथ स्थानीय गठबंधन किया. राज्य स्तर पर भाजपा का सहयोगी होने के साथ-साथ स्थानीय स्तर पर अपने प्रतिद्वंद्वियों के साथ गठबंधन करने की यह ‘दोहरी रणनीति’ पूरी तरह विफल रही. व्यापक प्रचार अभियान और मुफ्त बस और मेट्रो यात्रा जैसे बड़े-बड़े वादों के बावजूद दोनों शहरों के मतदाताओं ने अजित पवार के नेतृत्व को निर्णायक रूप से नकार दिया. पुणे में एनसीपी को करारी हार का सामना करना पड़ा, वहीं पिंपरी-चिंचवाड़ में भाजपा ने एनसीपी के प्रभाव को सफलतापूर्वक समाप्त कर दिया.

चुनाव प्रचार की आक्रामक शैली ने गठबंधन के साझेदारों के बीच संबंधों को खराब कर दिया. रैलियों के दौरान अजित पवार ने भाजपा के नेतृत्व वाली मौजूदा नगर पालिका प्रशासन पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए, जिससे तीखी प्रतिक्रिया हुई. राज्य भाजपा अध्यक्ष रविंद्र चव्हाण ने हाल ही में गठबंधन पर खेद व्यक्त करते हुए कहा कि पार्टी को अजित पवार को गठबंधन में शामिल करने का पछतावा है.

सिर्फ एक नगर निगम में जीत पाई NCP

राज्यभर में मौजूद 29 नगर निगमों में से एक में भी एनसीपी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरने में विफल रही है. ऐसे में महापौर पद हासिल करने की उसकी संभावनाएं न के बराबर हैं. विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा अब पवार की राजनीतिक स्थिति को और कमजोर करने पर ध्यान केंद्रित कर सकती है.

अजित पवार ने अपनै पैर में मारी कुल्हाड़ी

राजनीतिक गलियारों में अजित पवार के अगले कदम को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं. फिलहाल उनके सामने दो विकल्प हैं. पहला, वे भाजपा से संबंध तोड़ने पर विचार कर सकते हैं, लेकिन राज्य और केंद्र दोनों स्तरों पर भाजपा की मजबूत स्थिति को देखते हुए यह एक जोखिम भरा कदम होगा.

दूसरा विकल्प यह है कि वे चुपचाप महायुति सरकार में बने रहें, लेकिन अपनी भूमिका सीमित कर लें और भाजपा के साये में रहकर राजनीतिक रूप से अपना अस्तित्व बनाए रखें. मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए पर्यवेक्षकों का मानना है कि उपमुख्यमंत्री बाद वाला विकल्प ही चुनेंगे, क्योंकि मौजूदा परिदृश्य में भाजपा को और चुनौती देना राजनीतिक रूप से घातक साबित हो सकता है.

छत्रपति संभाजीनगर, नवी मुंबई में भी बीजेपी की बादशाहत

छत्रपति संभाजीनगर में 115 सदस्यीय नगर निकाय में भाजपा 58 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी. AIMIM 33 सीटों के साथ दूसरे स्थान पर रही. एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना ने 12 सीटें जीतीं, जबकि शिवसेना (यूबीटी) और बहुजन विकास अघाड़ी ने क्रमशः छह और चार सीटें हासिल कीं.

नवी मुंबई में भाजपा ने 111 सदस्यीय नगर निगम में 66 सीटें जीतकर स्पष्ट बहुमत हासिल किया. शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना 42 सीटों के साथ मुख्य विपक्षी दल बनकर उभरी. शिवसेना (यूबीटी) ने दो सीटें और एमएनएस ने एक सीट जीती. वसई-विरार में बहुजन विकास अघाड़ी ने 115 सीटों में से 71 सीटें जीतकर स्पष्ट बहुमत के साथ सत्ता में वापसी की. भाजपा ने शेष 44 सीटें जीतीं.

कहां-कहां हुए चुनाव?

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राज्य निर्वाचन आयोग ने 29 महानगरपालिकाओं के सार्वत्रिक चुनावों का कार्यक्रम 15 दिसंबर 2025 को घोषित किया था. इसके अनुसार बृहन्मुंबई (BMC), छत्रपति संभाजीनगर, नवी मुंबई, वसई-विरार, कोल्हापुर, कल्याण-डोंबिवली, ठाणे, उल्हासनगर, नासिक, पुणे, पिंपरी-चिंचवड़, सोलापुर, अकोला, अमरावती, नागपुर, चंद्रपुर, लातूर, परभणी, भिवंडी-निजामपुर, मालेगांव, पनवेल, मीरा-भायंदर, नांदेड-वाघाला, सांगली-मिरज-कुपवाड़, जलगांव, धुले, अहिल्यनगर, इचलकरंजी और जालना महानगरपालिकाओं के लिए मतदान हुआ था.

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