मंदिर की बनावट भी अपने आप में कई रहस्य समेटे हुए है. मंदिर के शिखर ध्रुव तारे की तरफ इशारा करते हैं और घने जंगलों में जब भी हवा चलती है तो ओम की ध्वनि गूंजती है. मंदिर में दर्शन करने वाले भक्तों और ध्यान लगाने वाले साधुओं को इस ध्वनि का कई बार अहसास हुआ है.
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धर्म ज्ञान02 Jul, 202603:46 PMकहां है जागेश्वर मंदिर, यहां से शुरू हुई शिवलिंग पूजने की परंपरा, हवा भी करती है ओम का उच्चारण!
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मनोरंजन27 Jun, 202606:34 PMटीवी एक्टर सिद्धार्थ निगम ने परिवार के साथ भगवान भीमाशंकर के दर्शन किए, बोले- हर हर महादेव
भीमाशंकर मंदिर भगवान शिव को समर्पित है और यह महाराष्ट्र के पुणे जिले के भीमाशंकर गांव में स्थित है. यह एक प्रमुख तीर्थ स्थल है और यहां 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक मौजूद है.
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धर्म ज्ञान25 Jun, 202605:32 PMकहां है ये चमत्कारी महादेव मंदिर, जहां बिना बुलावे के नहीं पहुंच सकता कोई, भोलेनाथ करते हैं हर इच्छा पूरी
बिनसर महादेव मंदिर का इतिहास भी काफी पुराना माना जाता है. कहा जाता है कि यह मंदिर 14वीं शताब्दी का है और यहां भगवान शिव स्वयंभू शिवलिंग के रूप में विराजमान हैं. स्थानीय लोगों के बीच एक खास मान्यता भी प्रचलित है कि इस मंदिर तक हर कोई नहीं पहुंच पाता.
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धर्म ज्ञान24 Jun, 202607:26 PMकहां है तंत्र का विश्वविद्यालय रहस्यमयी चौसठ योगिनी मंदिर, 64 शिवलिंग के साथ विराजमान तंत्र योगिनी
मंदिर की वास्तुकला से लेकर बनावट बाकी मंदिरों से काफी अलग है. जहां हर मंदिर का शिखर या गोपुरम होता है, वहीं चौसठ योगिनी मंदिर समतल और गोल छत की तरह बना है, जो कई खंभों पर टिका है. मंदिर के बीच 64 कक्ष बने हैं, जिन्हें चौसठ योगिनियों का प्रतिरूप माना गया है और हर कक्ष में भगवान शिव का एक शिवलिंग स्थापित है.
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धर्म ज्ञान13 Jun, 202607:00 AM13 जून 2026 का पंचांग: मासिक शिवरात्रि का खास संयोग, जानें तिथि, शुभ समय और राहुकाल
मान्यता है कि मासिक शिवरात्रि पर सच्चे मन से भगवान शिव की पूजा-अर्चना और व्रत करने से जीवन में सुख-शांति आती है तथा मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं. ऐसे में पूजा-पाठ और धार्मिक कार्य करने वाले लोगों के लिए तिथि, नक्षत्र, शुभ समय और राहुकाल की जानकारी महत्वपूर्ण मानी जाती है.
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धर्म ज्ञान04 Jun, 202602:46 PMकहां है मलयनाथ स्वामी मंदिर, भगवान शिव को है समर्पित, यहां देखने को मिलता आस्था और आध्यात्म का अद्भुत संगम
ये मंदिर न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि स्थानीय संस्कृति, लोकमान्यताओं और ऐतिहासिक विरासत का भी प्रतीक है. हर वर्ष यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु और पर्यटक दर्शन एवं प्राकृतिक सौंदर्य का आनंद लेने पहुंचते हैं.