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मैं बोल सकता हूं, रिटायरमेंट बाद मुझे मलाई नहीं खानी...SC के पूर्व जस्टिस कौल ने PM मोदी से मीटिंग का क्या राज खोला?
सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस संजय किशन कौल अपनी किताब विदाउट फियर ऑर फेवर को लेकर चर्चा में हैं. इस किताब में उन्होंने पूर्व CJI डीवाई चंद्रचूड़ और पीएम मोदी के साथ जजों की नियुक्ति को लेकर हुई कई मीटिंग्स, बातचीत, मतभेद को लेकर कई खुलासे किए हैं.
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सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जस्टिस संजय किशन कौल ने पूर्व सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ पर फिर बड़ा बयान दिया है. इस बार उन्होंने पूर्व सीजेआई की तारीफ भी की है. इतना ही नहीं इस बार उन्होंने चंद्रचूड़ के साथ अपने संबंधों पर खुलकर बात की है. इसके अलावा उन्होंने अपनी चर्चित किताब विदाउट फियर ऑर फेवर में सुप्रीम कोर्ट में जजों की नियुक्ति करने वाले कॉलेजियम सिस्टम के फैसलों पर सवाल उठाए हैं. जस्टिस कौल ने पूर्व सीजेआई चंद्रचूड़ को लेकर कहा कि उनमें बहुत ज्यादा काम करने की क्षमता थी. इतना ही नहीं जस्टिस कौल पूर्व सीजेआई के अलावा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भी तारीफ की है.
आपको बता दें कि इससे पहले उन्होंने एक और इंटरव्यू में बयान दिया था कि अदालत की आजादी की रक्षा करने के लिए कॉलेजियम को कार्यपालिका के दबाव का विरोध करना चाहिए. इस दौरान उन्होंने पूर्व सीजेआई के साथ उनकी हुई ऑफ द रिकॉर्ड बातचीत का जिक्र किया और कहा कि कैसे उन्हें 'मुख्य न्यायाधीश मुझे एक अलग कमरे में ले गए और पूछने लगे कि क्या उन्हें सरकार की राय जानने के लिए फोन करना चाहिए.'
जस्टिस कौल की प्रधानमंत्री मोदी से मीटिंग में क्या हुआ?
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जस्टिस कौल ने सत्ता के शीर्ष से हुई अपनी बातचीत का जिक्र करते हुए बड़ा खुलासा किया. उन्होंने बताया, "वो शख्स बातों को बहुत गौर से सुनता है. जब जजों की नियुक्तियां अटक रही थीं, तो मैंने उनसे सीधे कहा कि आपको लग रहा होगा कि मैं कुछ ज्यादा ही दबाव बना रहा हूं. लेकिन मैं ऐसा बेझिझक कर सकता हूं, क्योंकि मैंने पहले दिन ही तय कर लिया था कि रिटायरमेंट के बाद मुझे किसी पद का लालच नहीं है." इस बेबाकी पर उन्हें जवाब मिला- 'मुझे पता है.' कौल ने साफ कहा कि उस व्यक्ति को हर छोटी-बड़ी बात की पक्की खबर रहती है.
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'रिटायरमेंट के बाद मुझे कोई मलाई नहीं खानी...'
वहीं, पूर्व CJI डीवाई चंद्रचूड़ के बारे में बात करते हुए जस्टिस कौल ने तारीफ भी की और अपना विरोध भी जताया. उन्होंने एएनआई से कहा, "लोग मुझसे चंद्रचूड़ के बारे में लिखने को कहते हैं. मैंने हमेशा माना है कि उनमें गजब का 'ज्यूडिशियल पावर' है और वो बेतहाशा मेहनत करते हैं, लेकिन जजों की नियुक्ति के उनके तरीके से मैं बिल्कुल असहमत था." जस्टिस कौल ने कहा कि सोशल मीडिया पर लोग राई का पहाड़ बना देते हैं, लेकिन जहां तारीफ बनती थी, मैंने वहां तारीफ की और जहां मतभेद था, वहां सीधे सवाल किए.
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‘सुप्रीम कोर्ट हर काम नहीं कर सकता है’,
हाल में ही सीजेपी के नेताओं खासकर नेहा बोरा, दिपके और सौरव दास पर टिप्पणी और कथित सॉफ्ट स्पॉट को लेकर वायरल हुए जस्टिस कौल ने जुलाई में SIR के मुद्दे पर विपक्ष और सरकार के बीच विवाद पर अलग रुख अख्तियार किया था.
सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जस्टिस संजय किशन कौल ने भारतीय न्याय प्रणाली में सुधार और बिहार में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) समेत कई मुद्दों पर बीते साल कहा था कि सुप्रीम कोर्ट हर काम नहीं कर सकता है.
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सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जस्टिस संजय किशन कौल ने विशेष गहन पुनरिक्षण (एसआईआर) के मुद्दे पर कहा था कि, "मैं कहूंगा कि राजनीतिक लड़ाई या मतभेद को राजनीतिक तरीके से ही सुलझाना चाहिए. कोर्ट राजनीतिक समाधान के लिए ही नहीं है. कई बार चीजों का लीगल रैमीफिकेशन (कानूनी स्थिति या परिणाम) होता है और इसलिए एक साथ बहुत से लोग अपना पक्ष रखने के लिए आ जाते है और यहां सुप्रीम कोर्ट की दिक्कत ज्यादा होती है. सुप्रीम कोर्ट को यह तय करना चाहिए कि उसे कौन से मामले सुनने हैं और कौन से नहीं. अलग-अलग कामों के लिए अलग संस्थाएं हैं, जैसे चुनाव आयोग, जो एक संवैधानिक संस्था है. उसमे अगर किसी मामले मे कानूनी सवाल है, तभी उसमे हस्तक्षेप होना चाहिए. सुप्रीम कोर्ट नीतियां नहीं बना सकता या चुनाव आयोग का काम नहीं कर सकता, लेकिन वह चेक एंड बैलेंस का काम करता है."
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"ये राजनीतिक मतभेद हैं"
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विपक्ष द्वारा चुनाव आयोग पर सवाल उठाए जाने को लेकर पूर्व जस्टिस ने कहा था, "ये राजनीतिक मतभेद हैं और आज की राजनीति में मध्यम मार्ग मुश्किल हो गया है, क्योंकि लोग अपने विचारों पर अड़े रहते हैं. फिर भी, चुनाव प्रणाली काम करती है, क्योंकि कई राज्यों में विपक्षी दल जीतते हैं, जिनमें बंगाल, तमिलनाडु और केरल शामिल हैं. बीजेपी भी सत्तारूढ़ पार्टी के रूप में जीतती है. यह नहीं कहा जा सकता कि 'मैं जीता तो ठीक, नहीं जीता तो गड़बड़ है.'
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पूर्व जस्टिस संजय किशन कौल ने भारतीय न्याय प्रणाली में सुधार पर कहा, "चीफ जस्टिस के सुधार की बात में कोई निहित मकसद हो सकता है. सबसे बड़ी समस्या मामलों की पेंडेंसी है. इसका समाधान जजों की पर्याप्त नियुक्ति से हो सकता है. हाईकोर्ट में एक-तिहाई पद खाली हैं और यह संख्या बढ़ रही है. निचली अदालतों में भी यही हाल है. हालांकि, सुप्रीम कोर्ट में यह समस्या नहीं है. संसद ने राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग (एनजेएसी) लाया था, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने उसे खारिज कर दिया, जिसके कारण सरकार अब भी उसी मुद्दे में उलझी है. नियुक्ति के लिए समयसीमा तय की गई थी, जिसमें मैं भी शामिल था, लेकिन उसे लागू नहीं किया जा रहा. डेढ़ साल से यह मामला कोर्ट में भी नहीं उठा कि नियुक्तियां क्यों रुकी हैं." मालूम हो कि उन्होंने SIR पर उठ रहे विवाद पर ये बयान बीते साल बिहार चुनाव से पहले दिया था.