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वॉशिंगटन पोस्ट में अब तक की सबसे बड़ी छंटनी... 300 से ज्यादा कर्मचारी बाहर, शशि थरूर के बेटे ईशान थरूर की भी गई नौकरी

वॉशिंगटन पोस्ट ने बड़े पैमाने पर छंटनी करते हुए 300 से अधिक कर्मचारियों को बाहर कर दिया है. इस फैसले की चपेट में वरिष्ठ अंतरराष्ट्रीय स्तंभकार ईशान थरूर भी आए हैं. उन्होंने इसे न्यूजरूम और वैश्विक पत्रकारिता के लिए बेहद दुखद दिन बताया है.

Ishan Tharoor/ Shashi Tharoor (File Photo)
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दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित और भरोसेमंद अखबारों में गिने जाने वाले वॉशिंगटन पोस्ट से एक ऐसी खबर सामने आई है, जिसने वैश्विक पत्रकारिता जगत को झकझोर कर रख दिया है. अखबार ने अपने कुल स्टाफ के लगभग एक-तिहाई हिस्से की छंटनी कर दी है. इस फैसले के तहत 300 से अधिक कर्मचारियों को एक साथ बाहर का रास्ता दिखा दिया गया. यह कदम न सिर्फ अखबार के इतिहास में बल्कि आधुनिक पत्रकारिता के दौर में भी एक बड़ा मोड़ माना जा रहा है.

इस छंटनी की सबसे ज्यादा चर्चा इसलिए हो रही है क्योंकि इसकी चपेट में अखबार के वरिष्ठ अंतरराष्ट्रीय स्तंभकार ईशान थरूर भी आए हैं. ईशान, कांग्रेस सांसद शशि थरूर के बेटे हैं और बीते कई वर्षों से वैश्विक राजनीति और अंतरराष्ट्रीय घटनाओं पर उनकी लेखनी को खास पहचान मिली थी. नौकरी से निकाले जाने के बाद ईशान थरूर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपनी भावनाएं जाहिर कीं. उन्होंने इसे न्यूजरूम और वैश्विक पत्रकारिता के लिए बेहद दुखद दिन बताया.

ईशान ने सोशल मीडिया पर किया पोस्ट 

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ईशान ने लिखा कि आज अंतरराष्ट्रीय स्टाफ के अधिकांश साथियों और कई शानदार सहकर्मियों के साथ उन्हें वॉशिंगटन पोस्ट से ले-ऑफ कर दिया गया. उन्होंने खास तौर पर उन पत्रकारों के लिए दुख जताया, जिन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अखबार की सेवा की. एक अलग पोस्ट में उन्होंने खाली पड़े न्यूजरूम की तस्वीर साझा करते हुए सिर्फ इतना लिखा, एक बुरा दिन. अपने करियर को याद करते हुए ईशान थरूर ने बताया कि साल 2017 में वर्ल्डव्यू कॉलम की शुरुआत करना उनके लिए सम्मान की बात थी. इस कॉलम का मकसद पाठकों को वैश्विक मामलों को सरल और गहराई से समझाने का था. उन्होंने उन करीब पांच लाख सब्सक्राइबर्स का भी आभार जताया, जिन्होंने वर्षों तक उनकी रिपोर्टिंग को पढ़ा और सराहा.

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व्यापक पुनर्गठन के लिए हुई छटनी: वॉशिंगटन पोस्ट

वॉशिंगटन पोस्ट के प्रबंधन ने इस बड़े फैसले की पुष्टि करते हुए कहा कि यह व्यापक पुनर्गठन योजना का हिस्सा है. अखबार ने अपने स्पोर्ट्स सेक्शन को पूरी तरह बंद कर दिया है. इसके साथ ही कई विदेशी ब्यूरो और बुक कवरेज सेक्शन पर भी ताला लगा दिया गया है. सबसे चौंकाने वाला कदम मिडिल ईस्ट यानी मध्य पूर्व की पूरी रिपोर्टिंग टीम और संपादकों को हटाना रहा.

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कंपनी ख़ुद कर रही ब्रांड का खात्मा

इस फैसले पर अखबार के पूर्व कार्यकारी संपादक मार्टिन बैरन ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने इसे खुद ब्रांड का खात्मा करने जैसा बताया. वहीं वर्तमान प्रबंधन का तर्क है कि बदलती तकनीक और दर्शकों की आदतों के बीच खुद को ढालने के लिए यह फैसला दर्दनाक लेकिन जरूरी था.

युद्ध क्षेत्र से रिपोर्टिंग करने वाली पूरी टीम को निकाला गया

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छंटनी की मार कई दिग्गज पत्रकारों पर भी पड़ी है. काहिरा ब्यूरो चीफ क्लेयर पार्कर और युद्ध क्षेत्र से रिपोर्टिंग करने वाली लिजी जॉनसन को भी नौकरी से निकाल दिया गया है. क्लेयर पार्कर ने एक्स पर लिखा कि पूरी मिडिल ईस्ट रिपोर्टिंग टीम को एक साथ हटाना समझ से परे है. वहीं लिजी जॉनसन, जिन्होंने हाल ही में यूक्रेन जैसे हालात में रिपोर्टिंग की थी, उन्होंने भी अपनी विदाई की पुष्टि की.

पूर्व पत्रकार ने दी चेतावनी 

पूरे पत्रकारिता जगत में इस फैसले को लेकर गुस्सा और हैरानी दोनों देखने को मिल रही है. द अटलांटिक में लिखे एक लेख में वॉशिंगटन पोस्ट की पूर्व पत्रकार ऐश्ले पार्कर ने चेतावनी दी कि लगभग 150 वर्षों से अमेरिकी लोकतंत्र का स्तंभ रहे इस अखबार की मौजूदा दिशा उसकी विरासत को गंभीर खतरे में डाल रही है. वहीं एग्जीक्यूटिव एडिटर मैट मरे ने स्टाफ से कहा कि संगठन हर किसी के लिए सब कुछ नहीं बन सकता. बदलती तकनीक और दर्शकों की आदतों के अनुसार ढलना अब मजबूरी है. कंपनी की बैठक के बाद कर्मचारियों को ईमेल के जरिए उनके भविष्य की जानकारी दी गई.

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बताते चलें कि वॉशिंगटन पोस्ट की यह छंटनी सिर्फ एक संस्थान की खबर नहीं है, बल्कि यह संकेत है कि डिजिटल दौर में पारंपरिक पत्रकारिता किस गहरे संकट से गुजर रही है. यह फैसला आने वाले समय में मीडिया की दिशा और दशा दोनों पर असर डाल सकता है.

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