ग्रीन एनर्जी में UP नंबर वन: EV और ग्रीन हाइड्रोजन से रच रहा नई ऊर्जा क्रांति, जानें टॉप 3 राज्य
उत्तर प्रदेश, राजस्थान और आंध्र प्रदेश देश के इन तीन राज्यों ने ग्रीन हाइड्रोजन मॉडल को अपनाने के लिए व्यापक कदम उठाए हैं. हाल ही में गोरखपुर में CM योगी आदित्यनाथ में देश में ग्रीन एनर्जी की जरूरतों पर ध्यान दिलाया था.
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उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हाल ही में गोरखपुर में दिल्ली प्रदूषण पर बड़ी बात कही थी. उन्होंने राजधानी को गैस चैंबर बताया था. बढ़ते उद्योगों और विकास की तेज रफ्तार के बीच योगी आदित्यनाथ ने भारत में ग्रीन एनर्जी की जरूरत पर गंभीरता से ध्यान दिलाया, लेकिन क्या उनके राज्य UP में ग्रीन एनर्जी को लेकर कोई कदम उठाया गया है. जवाब है हां, उत्तर प्रदेश उन टॉप थ्री राज्यों में शामिल है. जिसने इलेक्ट्रिक वाहनों और हरित हाइड्रोजन को बढ़ावा देने में अग्रणी भूमिका निभाई है.
उत्तर प्रदेश, राजस्थान और आंध्र प्रदेश देश के इन तीन राज्यों ने ग्रीन हाइड्रोजन मॉडल को अपनाने के लिए व्यापक कदम उठाए हैं. IEEFA-Ember की रिपोर्ट के अनुसार, इन राज्यों ने हरित टैरिफ, नई ईवी नीतियों और चार्जिंग बुनियादी ढांचे में निवेश के माध्यम से ईवी इकोसिस्टम को गति दी है.
ग्रीन हाइड्रोजन को बढ़ावा देने के लिए क्या कदम उठाए?
- हरित टैरिफ (Green Tariff) को लागू किया
- हरित खुली पहुंच व्यवस्था (Green Open Access) को सक्षम बनाया
- सौर ऊर्जा के अनुकूल समय-समय पर लागू होने वाले टैरिफ (Time-of-Day Tariff) अपनाए
UP, राजस्थान और आंध्र प्रदेश में अपनाए गए ग्रीन एनर्जी के इस मॉडल से उद्योगों और उपभोक्ताओं को सस्ती और स्वच्छ बिजली उपलब्ध हो रही है, जिससे EV चार्जिंग और ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन को बढ़ावा मिल रहा है.
अकेले उत्तर प्रदेश की बात करें तो वित्त वर्ष 2025 में UP में 10% वाहन इलेक्ट्रिक हो गए हैं. यानी देश में सबसे तेज बढ़ोतरी. UP इलेक्ट्रिक व्हीकल को अपनाने और नीति कार्यान्वयन में आगे है. साल 2028 तक ग्रीन हाइड्रोजन में UP का लक्ष्य एक मिलियन टन ग्रीन हाइड्रोजन बनाने का है. रिपोर्ट में कहा गया है कि UP ने ग्रीन ओपन एक्सेस और बेहतर नीतियां बनाई हैं.
ग्रीन हाइड्रोजन में आंध्र प्रदेश की भूमिका
आंध्र प्रदेश ने 2024-29 की नई नीति के तहत 2024 तक सभी सरकारी वाहनों को इलेक्ट्रिक में बदलने का टारगेट रखा है. इसके तहत 2029 तक सार्वजनिक बसों (Public Transport) के पूर्ण विद्युतीकरण (Full Electrification) का लक्ष्य रखा है. आंध्र प्रदेश में भारत का पहला एयर-मोबिलिटी मैन्युफैक्चरिंग हब भी विकसित हो रहा है.
राजस्थान
धोरों और अरावली की पहाड़ियों वाला ये राज्य अपनी 'राजस्थान इलेक्ट्रिक वाहन नीति (REVP) 2022' के तहत ग्रीन क्रांति को बढ़ावा दे रहा है. यहां दोपहिया और तिपहिया वाहनों के लिए SGST प्रतिपूर्ति और चार्जिंग स्टेशन सब्सिडी दी गई है. ये राज्य सौर-घंटों के अनुरूप समय-दिन (ToD) टैरिफ अपनाकर चार्जिंग की लागत को कम कर रहे हैं.
इंस्टीट्यूट फॉर एनर्जी इकोनॉमिक्स एंड फाइनेंशियल एनालिसिस (IEEFA) और एम्बर (Ember) की संयुक्त रूप से किया गया एक अध्ययन है. इस अध्ययन में भारत की 95% बिजली मांग वाले 21 राज्यों का विश्लेषण किया गया.
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इनमें उत्तर प्रदेश टॉप पर हैं, इसके बाद राजस्थान और आंध्र प्रदेश का नंबर आता है. इनके अलावा, कर्नाटक, हिमाचल प्रदेश और केरल ने भी अपनी बिजली प्रणालियों को कार्बनमुक्त करने में महत्वपूर्ण प्रगति की है. अपनी खरीद में उन्होंने ग्रीन एनर्जी को ऊर्जा की हिस्सेदारी बढ़ाई है और बिजली क्षेत्र के उत्सर्जन को कम किया है. इस स्टडी से पता चलता है कि ग्रीन हाइड्रोजन को लेकर राज्य स्तर पर ये पहल, भारत के स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण को गति दे रही हैं. इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को बढ़ावा मिल रहा है, उद्योगों के डीकार्बोनाइजेशन में भी मदद मिली है. राज्य सरकारों के इस कदम से राष्ट्रीय स्तर पर भी जलवायु लक्ष्यों को पूरा करने में मदद मिलेगी.
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