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ईरान-इजरायल के बीच बढ़ा परमाणु युद्ध का खतरा, डिमोन में ईरानी मिसाइल हमला, खाड़ी में पैदा हुआ महायुद्ध का डर!

ईरान और इजरायल के बीच जंग अब अगले स्टेज में पहुंच गई है. जिस तरह IDF ने ईरानी न्यूक्लियर साइट्स को टार्गेट किए, उसकी तरह तेहरान ने भी डिमोन में हमला कर उसकी नींद उड़ा दी. कहा जा रहा है कि मिडिल ईस्ट में रेडिएशन लीक का खतरा पैदा हो गया है.

ईरान का वाहदाती एयरबेस (बाएं) इजरायल का डिमोन न्यूक्लियर साइट (दाएं)
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इजरायल-अमेरिका की भीषण बमबारी से ईरान के खूजिस्तान प्रांत स्थित देजफुल शहर के पास वाहदाती एयरबेस (4th Tactical Fighter Base) धमाकों से दहल उठा. एयरबेस में बने गोला-बारूद के बंकरों को प्रेसीजन मिसाइलों से हमला किया गया. अटैक इतनी भयावह थी कि बंकर में स्टोर किए गए हथियार-बम खुद-ब-खुद, एक-एक कर ब्लास्ट होने लगे. इस दौरान धुएं का गुबार उठा और पूरा आसमान भर गया. आग की लपटें भी दूर तक दिखाई दीं. स्थानीय लोगों द्वारा रिकॉर्ड किए गए वीडियो में साफ-साफ दिख रहा है कि कैसे हमले से सेकेंडरी एक्सप्लोजन की चेन रिएक्शन शुरू हो गई.

धमाका इतना जोरदार था कि पूरा इलाका दहल उठा, पेड़-पक्षी सब हिल उठे, पूरा इलाका खाली हो गया. शॉकवेव से पक्षियां भी भाग खड़ी हुईं. जानकारी के मुताबिक वाहदाती एयरबेस पर 1980 से ईरान के पुराने F-5 टाइगर II फाइटर जेट्स के स्टॉक्स को रखे जाते थे.

कहा जा रहा है कि इस हमले में कई F-5 जेट्स खड़े-खड़े जल गए, पूरा एम्यूनिशन डिपो देखते-देखते आग के गोले में तब्दील हो गया. इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक इस बेस पर 1980 के दशक में इराक के साथ हुए युद्ध के दौरान भी हमला किया गया था. हालांकि इस बार ये पूरी तरब तबाह हो गया.

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इससे पहले इजरायल के दक्षिणी शहरों में न्यूक्लियर सिटी डिमोना के साथ अराद में ईरान ने बड़ा मिसाइल अटैक किया. शनिवार को दक्षिणी शहरों डिमोना और अराद में ईरानी हमलों में 100 से ज्यादा लोग घायल हो गए. घायलों में से 11 लोगों की हालत गंभीर बताई जा रही है. इजरायली मीडिया के अनुसार, ईरान की ओर से किए गए ताबड़तोड़ हमले में इजरायली एयर डिफेंस कम से कम दो बैलिस्टिक मिसाइलों को रोकने में नाकाम रहा. 

वहीं ईरान की सरकारी मीडिया ने कहा कि ये हमले इजरायल की न्यूक्लियर रिसर्च फैसिलिटी को टारगेट कर रहे थे, जो डिमोना से लगभग 10 किलोमीटर (छह मील) और अराद से 30 किलोमीटर (18.5 मील) दूर है. अमेरिका और इजरायल शुरू से ही ईरान को परमाणु हथियार बनाने से रोकने के लिए हमले कर रहे हैं. ऐसे में इजरायल के परमाणु केंद्रों पर ताजा मिसाइल हमले को ईरान की तरफ से बदले के रूप में देखा जा रहा है. 

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शिमोन पेरेस नेगेव न्यूक्लियर रिसर्च सेंटर को इजरायल के लंबे समय से संदेह वाले परमाणु हथियार कार्यक्रम के लिए अहम माना जाता है, जिसके होने की बात यरूशलम पॉलिसी के तौर पर न तो पुष्टि करती है और न ही मना करती है.

नतांज-यूरेनियम एनरिचमेंट प्लांट पर मार्च 2026 में पांचवीं बार हमला किया गया, जिसमें सेंट्रीफ्यूज मशीनें तबाह और एंट्रेंस ब्लॉक हो गया है. इसके अलावा फोर्डो में पहाड़ के नीचे अंडरग्राउंड प्लांट पर हमला हुआ, यहां हाई-लेवल यूरेनियम एनरिचमेंट होता था, जिस पर बंकर बस्टर बम से हमला हुआ. इसके साथ-साथ इस्फहान, पारचिन और मिन्जादेही पर बंकर बस्टर और प्रेसीजन मिसाइलों से हमले किए गए.

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ईरान और इजरायल द्वारा एक दूसरे न्यूक्लियर साइट्स पर किए गए हमलों से रेडिएशन लीक का बहुत बड़ा खतरा पैदा हो गया है. खबर के मुताबिक डिमोना-नतांज सहित वे जगह जहां पर हमले हुए, वहां पर संभवत: यूरेनियम और प्लूटोनियम स्टॉक हैं. अगर यहां पर अगर रेडिएशन फैला तो स्थिति भयावह हो सकती है, भारी संख्या में लोग बीमार पड़ सकते हैं, हालांकि फिलहाल युद्ध न्यूक्लियर थ्रेसहोल्ड पर नहीं पहुंचा है. युद्ध की भाषा में दें तो अभी भी ये युद्ध एक पारंपरिक युद्ध ही है, जब कोई देश न्यूक्लियर हथियार से हमला करेगा तो फिर एटमी युद्ध कहलाएगा. अगर रेडिएशन फैला तो पूरा मिडिल ईस्ट तबाह हो सकता है.

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