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‘ये इंडिया के हैं और हमेशा रहेंगे…’ अरुणाचल समेत कई इलाकों के मनगढ़त नामकरण पर चीन को भारत ने जमकर सुनाया

भारत की ओर से साफ किया गया कि चीन के झूठे दावे सच्चाई को नहीं बदल सकते. भारत के हिस्सों को मनगढ़त नाम देने की कोशिश शरारत और झूठ है.

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भारतीय स्थानों को मनगढ़ंत नाम दिए जाने पर विदेश मंत्रालय ने चीन की आलोचना की है. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने मीडिया के सवालों का जवाब देते हुए कहा कि भारत, चीन की ओर से भारत की भूमि का हिस्सा बनने वाले स्थानों को मनगढ़ंत नाम देने के किसी भी शरारती प्रयास को स्पष्ट रूप से खारिज करता है. 

उन्होंने कहा कि चीन की ओर से झूठे दावे करने और निराधार कथाएं गढ़ने की कोशिशें असलियत को नहीं बदल सकते. रणधीर जायसवाल ने कहा, ऐसे प्रयास इस निर्विवाद वास्तविकता को नहीं बदल सकते कि अरुणाचल प्रदेश सहित कई जगह और क्षेत्र भारत का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा थे, हैं और हमेशा रहेंगे. 

भारत ने चीन को क्या चेतावनी दी? 

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रणधीर जायसवाल ने कहा, चीन की ये कार्रवाइयां भारत-चीन द्विपक्षीय संबंधों को स्थिर और सामान्य बनाने के चल रहे प्रयासों को बाधित करती हैं. चीन को ऐसे कार्यों से बचना चाहिए जो संबंधों में नकारात्मकता पैदा करते हैं और बेहतर समझ बनाने के प्रयासों को कमजोर करते हैं.

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चीन ने कब-कब की नाम बदलने की कोशिश? 

दरअसल, साल 2017 के बाद चीन ने दिसंबर 2021 में 21 जगहों के नाम बदलने का प्रयास किया. चीन ने अरुणाचल के 11 जिलों जिसमें तवांग से लेकर अंजॉ के स्टैंडर्ड नाम चीनी, तिब्बती और रोमन में जारी किए. हालांकि भारत ने तब चीन के इस कदम को अस्वीकार्य बताया और नए नाम रख देने से जमीनी सच्चाई नहीं बदल जाती. भारत ने कहा कि अरुणाचल प्रदेश भारत का अंग है और हमेशा रहेगा. 

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अरुणाचल प्रदेश के राज्यपाल ने किया था LAC का दौरा

इससे पहले 9 अप्रैल को अरुणाचल प्रदेश के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल केटी परनाइक (सेवानिवृत्त) ने तवांग जिले में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) के पास स्थित दूरदराज की सीमा चौकी 'खेन्जेमाने' का दौरा किया था. वहां उन्होंने सैनिकों का मनोबल ऊंचा बनाए रखने, शारीरिक रूप से चुस्त-दुरुस्त रहने और हर समय मानसिक रूप से सतर्क रहने के लिए प्रोत्साहित किया. विशेष रूप से अग्रिम क्षेत्रों की कठिन परिस्थितियों को देखते हुए. 

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लोक भवन के एक अधिकारी ने बताया कि दुर्गम इलाकों और कठोर मौसम के बीच स्थित यह सीमा चौकी भारत की सतर्कता और जुझारूपन का प्रतीक है. राज्यपाल की इस यात्रा को देश की सीमाओं की रक्षा करने वाले बलों के प्रति एकजुटता के एक सशक्त संकेत के रूप में देखा गया. 

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