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जमानत मांगने आया था आरोपी, शराब की बोतल ने बिगाड़ दिया खेल, जज का फूटा गुस्सा
आरोप है कि आरोपी ट्रायल कोर्ट परिसर में शराब की बोतल लेकर पहुंच गया था. जब यह बात अदालत के सामने आई तो जज ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि आरोपी को कुछ और दिन जेल में ही रहने देना चाहिए, शायद वहीं उसकी शराब की लत छूट जाए. अदालत की इस टिप्पणी के बाद यह मामला चर्चा में आ गया है.
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कर्नाटक हाई कोर्ट में एक ऐसा मामला सामने आया, जिसने अदालत को भी सख्त रुख अपनाने पर मजबूर कर दिया. हत्या के प्रयास के एक आरोपी ने जमानत के लिए हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था, लेकिन कोर्ट ने उसकी याचिका पर सुनवाई तक करने से इनकार का दिया है. वजह थी उसका व्यवहार. आरोप है कि आरोपी ट्रायल कोर्ट परिसर में शराब की बोतल लेकर पहुंच गया था. जब यह बात अदालत के सामने आई तो जज ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि आरोपी को कुछ और दिन जेल में ही रहने देना चाहिए, शायद वहीं उसकी शराब की लत छूट जाए. अदालत की इस टिप्पणी के बाद यह मामला चर्चा में आ गया है...
सीसीटीवी फुटेज ने बढ़ाई आरोपी की मुश्किलें
इस मामले की सुनवाई कर्नाटक हाईकोर्ट के जस्टिस केवी अरविंद की वेकेशन बेंच कर रही थी. अदालत को बताया गया कि जिस दिन ट्रायल कोर्ट में सुनवाई थी, उस दिन आरोपी कोर्ट परिसर में शराब की बोतल के साथ देखा गया था.
यह सिर्फ किसी व्यक्ति का आरोप नहीं था, बल्कि कोर्ट ने साफ कहा कि संबंधित पीठासीन अधिकारी ने खुद सीसीटीवी फुटेज देखी है. फुटेज में आरोपी कथित तौर पर शराब की बोतल के साथ नजर आया.
अदालत ने इस पर नाराजगी जताते हुए कहा कि अगर कोई व्यक्ति कोर्ट में शराब लेकर पहुंचे और फिर अपने केस की सुनवाई के समय मौजूद भी न हो, तो यह बेहद गंभीर बात है.
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“उसे जेल में ही रहने दो”, जज की सख्त टिप्पणी
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सुनवाई के दौरान जस्टिस अरविंद ने बेहद सख्त टिप्पणी की. उन्होंने कहा कि आरोपी को अभी कुछ और समय जेल में ही रहने देना चाहिए. अदालत ने कहा, “एक महीने और जेल में रहेगा तो शायद उसकी यह आदत छूट जाएगी.”
कोर्ट ने यह भी साफ किया कि अगर यह सिर्फ किसी आम व्यक्ति का आरोप होता, तो बात अलग हो सकती थी. लेकिन यहां मामला इसलिए गंभीर हो गया क्योंकि वीडियो खुद कोर्ट के अधिकारी ने देखा है.
अदालत ने फिलहाल आरोपी को कोई राहत देने से इनकार कर दिया और मामले की अगली सुनवाई जुलाई के पहले हफ्ते में तय की.
क्या है पूरा मामला?
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27 साल का शिवकुमार उर्फ शिवू, जिसे आरएक्स शिवू के नाम से भी जाना जाता है, हत्या के प्रयास के एक मामले में आरोपी है. वह पहले से जमानत पर बाहर था.
लेकिन आरोप है कि ट्रायल कोर्ट में सुनवाई के दौरान वह जानबूझकर गैरहाजिर रहा और कोर्ट परिसर में शराब की बोतल लेकर पहुंच गया. अदालत के नियमों का उल्लंघन मानते हुए ट्रायल कोर्ट ने उसकी जमानत रद्द कर दी और उसे फिर से जेल भेज दिया.
इसी फैसले को चुनौती देने के लिए आरोपी ने हाईकोर्ट में जमानत याचिका दाखिल की थी.
वकील ने किया बचाव, लेकिन जज ने दी नसीहत
सुनवाई के दौरान आरोपी के वकील ने कोर्ट से राहत देने की मांग की. उन्होंने कहा कि जमानत रद्द करने से पहले ट्रायल कोर्ट को आरोपी को नोटिस देना चाहिए था, ताकि वह अपना पक्ष रख सके.
वकील ने यह भी कहा कि आरोपी पेशे से किसान है और वह पहले ही एक महीना जेल में गुजार चुका है. साथ ही उन्होंने सवाल उठाया कि सिर्फ सीसीटीवी फुटेज देखकर यह कैसे तय किया जा सकता है कि वह शराब पी रहा था.
लेकिन अदालत इस दलील से संतुष्ट नहीं हुई. जस्टिस अरविंद ने वकील को भी नसीहत देते हुए कहा कि एक वकील होने के नाते अदालत की गरिमा का ध्यान रखना जरूरी है. उन्होंने कहा कि बचाव करना वकील का काम जरूर है, लेकिन ऐसे व्यवहार को हल्के में नहीं लिया जा सकता.
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अदालत की सख्ती ने दिया बड़ा संदेश
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इस पूरे मामले ने यह साफ कर दिया कि अदालत अपने नियमों और गरिमा को लेकर कितनी गंभीर है. कोर्ट का मानना था कि अगर कोई व्यक्ति न्यायालय जैसी जगह की मर्यादा का सम्मान नहीं करता, तो उसे राहत देने से पहले उसके व्यवहार को भी देखना जरूरी है.