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आरक्षण के खिलाफ दिल्ली से लखनऊ तक सड़क पर संग्राम... कनॉट प्लेस से हिरासत में लिए गए दर्जनों प्रदर्शनकारी; जानें क्यों बढ़ रहा बवाल
आरक्षण के मुद्दे पर रविवार को दिल्ली से यूपी तक प्रदर्शन हुए. कनॉट प्लेस में सैकड़ों लोग जुटे, जहां पुलिस ने कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया. यूजीसी इक्विटी रेगुलेशन 2026 और रोस्टर सिस्टम के खिलाफ भी विरोध हुआ. ये प्रदर्शन अब धीरे-धीरे सरकार के लिए चिंता का विषय बनता जा रहा है.
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देश में इन दिनों आरक्षण के मुद्दे पर लगातार विरोध प्रदर्शन बढ़ता हुआ दिखाई दे रहा है. इसको लेकर रविवार को दिल्ली से लेकर उत्तर प्रदेश तक सड़कों पर प्रदर्शन देखने को मिला. राजधानी दिल्ली के कनॉट प्लेस में सैकड़ों प्रदर्शनकारी जुटे, वहीं लखनऊ में भी आरक्षण और यूजीसी के नए नियमों को लेकर विरोध दर्ज कराया गया. दोनों जगहों पर पुलिस की मौजूदगी बढ़ाई गई और प्रदर्शनकारियों को नियंत्रित करने के लिए कार्रवाई की गई.
कई लोग लिए गए हिरासत में
राजधानी दिल्ली में रविवार को काफी हलचल रही. यहां प्रदर्शनकारी आरक्षण नीति, ‘यूजीसी इक्विटी रेगुलेशन 2026’ और रोस्टर सिस्टम के विरोध में कनॉट प्लेस पहुंचे थे. पुलिस ने प्रदर्शन की अनुमति नहीं होने की बात कहते हुए कई लोगों को हिरासत में लिया. देर रात तक दर्जनों प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिए जाने की जानकारी सामने आई. बाद में उन्हें प्रदर्शन स्थल से दूर ले जाकर छोड़ दिया गया. दरअसल, दिल्ली पुलिस ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि शाह ऑडिटोरियम और कनॉट प्लेस जैसे सार्वजनिक स्थानों पर प्रदर्शन की अनुमति नहीं है. इसके बावजूद रविवार को बड़ी संख्या में लोग यहां पहुंच गए. जंतर मंतर पर भी युवाओं की भीड़ जुटी, लेकिन पुलिस ने उन्हें एक जगह एकत्र होने की अनुमति नहीं दी.
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Delhi: Protesters gathered at Connaught Place (CP) and marched towards Jantar Mantar to protest against the reservation system, despite not receiving permission to hold the demonstration. Delhi Police personnel were deployed at CP as the protesters marched towards Jantar Mantar. pic.twitter.com/ty4gkuisxk
— IANS (@ians_india) ?ref_src=twsrc%5Etfw">August 23, 2026Advertisement
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सोशल मीडिया की रही अहम भूमिका
इस प्रदर्शन के पीछे सोशल मीडिया अभियान की भी भूमिका बताई जा रही है. इंस्टाग्राम पर आरएचए (RHA) नाम के एक पेज ने अपने समर्थकों के साथ कई दिनों तक 'चलो दिल्ली और सीपी मार्च' अभियान चलाया था. इसी ऑनलाइन अपील के बाद बड़ी संख्या में लोग दिल्ली पहुंचे. इसके अलावा उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में भी आरक्षण और जीसी, यूजीसी तथा एससी-एसटी एक्ट जैसे मुद्दों को लेकर विरोध प्रदर्शन हुआ. सवर्ण मोर्चा के प्रदर्शनकारियों ने गोमतीनगर स्थित 1090 चौराहे पर करीब आधे घंटे तक प्रदर्शन किया. इसके बाद वे बैकुंठ धाम की ओर बढ़े और सवर्ण सांसदों तथा विधायकों की सांकेतिक शवयात्रा निकाली. प्रदर्शनकारियों के हाथों में 'संवैधानिक अछूत' लिखी तख्तियां थीं और यूजीसी रोलबैक के नारे लगाए गए.
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नेताओं ने क्या कहा?
इन विरोध प्रदर्शनों के बीच उत्तर प्रदेश सरकार में पंचायती राज मंत्री और सुभासपा (SBSP) अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर ने आरक्षण खत्म किए जाने की मांग को खारिज किया. चित्रकूट में एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा कि आरक्षण खत्म नहीं हो सकता और कुछ लोग केवल भ्रम फैला रहे हैं. उन्होंने कहा कि बाबा साहब डॉ. भीमराव आंबेडकर ने समाज के सबसे निचले पायदान पर रहने वाले लोगों को मुख्यधारा में लाने के लिए आरक्षण की व्यवस्था की थी. वहीं बसपा सुप्रीमो मायावती ने आर्थिक आधार पर आरक्षण की मांग का विरोध किया. उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए कहा कि दिल्ली के जंतर मंतर पर आर्थिक आधार पर आरक्षण की जो नई मांग उठाई गई है, वह उचित नहीं है. इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर आरक्षण को लेकर देश में जारी बहस को सड़क से लेकर राजनीति तक तेज कर दिया है.
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बताते चलें कि आरक्षण के मुद्दे पर दिल्ली से लखनऊ तक हुए इन प्रदर्शनों ने एक बार फिर इस संवेदनशील विषय को चर्चा के केंद्र में ला दिया है. एक ओर प्रदर्शनकारी अपनी मांगों को लेकर सड़क पर हैं, वहीं दूसरी ओर राजनीतिक दलों के नेताओं के अलग-अलग रुख ने बहस को और तेज कर दिया है. अब देखना होगा की इस असमंजस की स्थिति में केंद्र सरकार का क्या रूख रहता है.