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सैम पित्रोदा ने CJP को बताया 'अरब स्प्रिंग' जैसा आंदोलन, जॉर्ज सोरोस के निवेश पर विचार करने को कहा

ओवरसीज कांग्रेस के प्रमुख सैम पित्रोदा ने सीजेपी के आंदोलन की तुलना अरब स्प्रिंग, जिसने पूरे मिडिल ईस्ट में तख्तापलट कर दिया उससे की है. उन्होंने आगे कहा कि जॉर्ज सोरोस, जिन पर भारत विरोधी फंडिंग का आरोप लगता है, अगर वो निवेश करना चाहते हैं तो कोई दिक्कत नहीं है.

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15 Oct 2026
( Updated: 15 Oct 2026
06:47 PM )
सैम पित्रोदा ने CJP को बताया 'अरब स्प्रिंग' जैसा आंदोलन, जॉर्ज सोरोस के निवेश पर विचार करने को कहा
Image Source: IANS
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इंडियन ओवरसीज कांग्रेस के प्रमुख सैम पित्रोदा ने 'कॉकरोच जनता पार्टी' के विरोध-प्रदर्शन का समर्थन किया है. उन्होंने इसे "निडर विपक्ष, साहस और जागरूकता" का प्रतीक बताते हुए आंदोलन की तुलना 'अरब स्प्रिंग' से की. उन्होंने कहा कि भले ही कभी-कभी युवाओं से गलतियां हो गई हों, लेकिन अपनी आवाज बुलंद करने के लिए उनकी सराहना की जानी चाहिए. 

'अरब स्प्रिंग' जैसा सीजेपी आंदोलन

'अरब स्प्रिंग' 2010 और 2011 में मध्य पूर्व और उत्तरी अफ्रीका में लोकतंत्र समर्थक विरोध प्रदर्शनों और विद्रोहों की एक लहर थी, जिसने इस क्षेत्र की लंबे समय से चली आ रही तानाशाही सरकारों को चुनौती दी थी. इसकी शुरुआत ट्यूनीशिया और मिस्र में हुए विरोध प्रदर्शनों से हुई. परिणामस्वरूप वहां की सरकारों को उखाड़ फेंका गया, जिससे अन्य अरब देशों में भी इसी तरह के प्रयास शुरू हुए थे.

पित्रोदा ने आगे कहा कि, "मुझे लगता है कि छात्र आंदोलन और 'कॉकरोच जनता पार्टी' आंदोलन निडर विरोध, साहस और जागरूकता को लेकर है. अपने एक लेख में, मैंने इसे 'भारतीय मानसून' कहा था, जो 'अरब स्प्रिंग' से काफी मेल खाता है. इसका श्रेय अपनी आवाज बुलंद करने वाले इन युवाओं को जाता है. कुछ बातें सही होती हैं, कुछ गलत, और यह ठीक है."

'कॉकरोच जनता पार्टी' के विरोध प्रदर्शनों के दौरान कथित तौर पर अभद्र भाषा के इस्तेमाल पर हुए विवाद पर, पित्रोदा ने कहा कि कुछ प्रदर्शनकारियों ने तेज आवाज में बात की और अनुचित भाषा का इस्तेमाल किया, लेकिन उनके गुस्से ने चर्चा के नए भी अवसर खोल दिए.

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सीजेपी आंदोलन में गाली-अभद्र भाषा पर क्या बोले सैम पित्रोदा!

उन्होंने कहा, "कुछ लोगों ने तेज आवाज में बात की, कुछ ने गलत भाषा का इस्तेमाल किया. मेरी नजर में, यह ठीक है. ऐसा नहीं है कि मैं इसका समर्थन करता हूं, लेकिन आप उनके गुस्से को देख सकते थे, और इसी आक्रोश ने वास्तव में कई नए अवसर पैदा किए."

जब उनसे इस बारे में पूछा गया कि क्या 'कॉकरोच जनता पार्टी', 'आम आदमी पार्टी' (आप) से निकली है, तो पित्रोदा ने कहा कि उनके पास इस दावे पर टिप्पणी करने के लिए पर्याप्त जानकारी नहीं है.

CJP के उभार पर क्या बोले सैम पित्रोदा?

उन्होंने कहा, "मुझे नहीं पता. मुझे इन चीजों के बारे में जानकारी नहीं है, और मुझे कोई अंदाजा नहीं है. वे जो कहते हैं, मैं उसे उसी रूप में स्वीकार करता हूं. जहां तक मैं समझता हूं, वे युवाओं का एक समूह है, जो बहुत समझदार है. मैं उन्हें कभी-कभी टीवी पर देखता हूं. मुझे उन पर गर्व है. मुझे उन्हें देखकर अच्छा लगता है."

पित्रोदा ने युवा प्रदर्शनकारियों को अपने विचारों को स्पष्ट रूप से रखने, जटिल व्यवस्था के बीच काम करने और साहस दिखाने की क्षमता की प्रशंसा की. उन्होंने कहा कि युवाओं को अपनी बात रखने की आजादी मिलनी चाहिए, भले ही वे इस दौरान गलतियां ही क्यों न कर बैठें.

उन्होंने कहा, “वे गलतियां कर सकते हैं, कोई बात नहीं. लेकिन वे अच्छे हैं. हमें अपने युवाओं पर गर्व होना चाहिए. जब ​​मैं उन्हें देखता हूं, तो मुझे कुछ उम्मीद नजर आती है. मुझे अच्छा लगता है जब लोग संघर्ष करते हैं और अपनी बात रखते हैं. कभी-कभी, वे गलत भी हो सकते हैं. यह भी ठीक है. लेकिन सबसे अहम बात यह है कि वे डर को दूर कर पाए और उन्होंने हिम्मत दिखाई.”

महात्मा गांधी के साहस पर जोर देने की बात को याद करते हुए, पित्रोदा ने कहा कि बदलाव लाने और अपनी आवाज उठाने के लिए लोगों को डर से बाहर निकलना होगा.

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उन्होंने यह भी कहा कि हाल ही में हुए छात्र आंदोलनों ने अल्पसंख्यकों, अन्य पिछड़ा वर्गों (ओबीसी), दलितों और आदिवासी समुदायों को अपनी बात रखने के लिए प्रेरित किया है. ये समुदाय अक्सर खुद को आर्थिक अवसरों और निर्णय लेने की प्रक्रियाओं से बाहर महसूस करते हैं.

उन्होंने कहा, “छात्र आंदोलन ने उनमें एक नई ऊर्जा भर दी है. अब वे भी अपनी बात रख सकते हैं. उन्हें अब महसूस हो रहा है कि सिर्फ छात्र ही नहीं बल्कि उनकी भी अपनी आवाज है.”

'ध्रुव राठी होनहार युवा!'

यूट्यूबर ध्रुव राठी के बारे में बात करते हुए, पित्रोदा ने उन्हें एक होनहार युवा बताया, जिनके बहुत सारे फॉलोअर्स हैं. उन्होंने विरोध प्रदर्शनों में शामिल होने और अपने विचार रखने के उनके अधिकार का समर्थन किया.

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उन्होंने कहा, “मैं उन्हें अच्छी तरह जानता हूं. मुझे लगता है कि वह एक होनहार युवा हैं. उनके बहुत सारे फॉलोअर्स हैं, और एक भारतीय नागरिक के तौर पर उन्हें विरोध प्रदर्शन में शामिल होने और अपने विचार रखने का पूरा अधिकार है. वह भी एक लड़ाई लड़ रहे हैं, तो इसमें कुछ भी गलत नहीं है. मैं इसके लिए उनका सम्मान करता हूं. मैं उनके साहस की सराहना करता हूं, और मुझे लगता है कि हमें उनके जैसे और भी लोगों की जरूरत है और वह अच्छे इंसान हैं.”

सोरोस 10 अरब डॉलर का करना चाहते हैं निवेश, तो किया जाना चाहिए विचार: पित्रोदा

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इंडियन ओवरसीज कांग्रेस के अध्यक्ष सैम पित्रोदा ने कहा कि हंगरी मूल के अमेरिकी निवेशक, अरबपति और समाजसेवी  जॉर्ज सोरोस के निवेश प्रस्तावों को संबंधित नीति और उद्देश्यों के आधार पर परखा जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि हर प्रस्ताव का मूल्यांकन अलग-अलग मामले के तौर पर होना चाहिए.

भारत विरोधी फंडिंग के आरोपी हैं जॉर्ज सोरोस

पित्रोदा ने कहा, “यह सत्ता में बैठे लोगों पर निर्भर करता है. अगर जॉर्ज सोरोस कोई अच्छा काम करने के लिए 10 अरब डॉलर का निवेश लाना चाहते हैं, तो इस पर विचार किया जा सकता है. यह पूरी तरह मामले-दर-मामले और नीति-दर-नीति पर निर्भर करता है. यह फैसला लेने का अधिकार सत्ता में बैठे लोगों के पास है.”

पित्रोदा ने स्पष्ट किया कि वह व्यक्तिगत रूप से सोरोस को नहीं जानते और न ही कभी उनसे मिले हैं. अमेरिका में कई साल बिताने के बावजूद उनकी सोरोस से कभी व्यक्तिगत मुलाकात नहीं हुई.

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उन्होंने कहा, “मैं उन्हें नहीं जानता. मैं उनसे कभी नहीं मिला. न्यूयॉर्क में एक-दो बार सार्वजनिक कार्यक्रमों में उन्हें बोलते हुए देखा है, लेकिन न तो उनसे बातचीत की और न ही उनके पास गया. मुझे उनके बारे में कोई जानकारी नहीं है.”

दुनिया के प्रभावशाली उद्योगपतियों, जैसे एलन मस्क और जॉर्ज सोरोस, के राजनीति और नीतिगत फैसलों पर प्रभाव के बारे में पूछे जाने पर पित्रोदा ने कहा कि इन लोगों का कुछ प्रभाव जरूर होता है, लेकिन वे राजनेताओं और दूसरे हितधारकों के साथ अपनी-अपनी भूमिका निभाते हैं.

उन्होंने कहा, “उनका कुछ प्रभाव है. लेकिन वे अपना काम करते हैं, राजनेता अपना काम करते हैं और लोग अपना काम करते हैं. हर किसी की अपनी भूमिका है और सभी का अपना योगदान है.” कांग्रेस नेता ने कहा कि प्रभावशाली लोग अपने हितों के अनुकूल नीतियों में बदलाव कराने की कोशिश कर सकते हैं, लेकिन इसका यह मतलब नहीं है कि वे किसी देश को चलाते हैं.

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उन्होंने कहा, “वे अपने फायदे के लिए नीतियों को बदलने की कोशिश करते हैं, लेकिन वे किसी देश को नहीं चलाते. जब तक कोई देश दो लाख की आबादी वाला न हो, तब तक शायद यह अलग बात हो सकती है.”

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और एलन मस्क के बीच सोशल मीडिया मंच एक्स पर हुई बातचीत पर भी पित्रोदा ने टिप्पणी की. यह बातचीत भारत में मस्क की कंपनी स्टारलिंक की सैटेलाइट इंटरनेट सेवाओं की शुरुआत से जुड़े मुद्दे पर हुई थी.

एलन मस्क को दिया जाना चाहिए स्पेक्ट्रम: पित्रोदा

उन्होंने इस व्याख्या को खारिज किया कि मस्क के साथ राहुल गांधी की बातचीत को उनकी कंपनी को स्पेक्ट्रम आवंटित करने के समर्थन के तौर पर देखा जाना चाहिए.

पित्रोदा ने कहा, “मुझे नहीं लगता कि राहुल गांधी ने इसका समर्थन किया है. राहुल गांधी यह नहीं कह रहे हैं कि मस्क को स्पेक्ट्रम दिया जाना चाहिए. इसे गलत तरीके से न समझें. राहुल गांधी ने मूल रूप से उनके एक छोटे से संदेश का जवाब दिया था, जो बिल्कुल ठीक है. इसका कोई खास मतलब नहीं था.”

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उन्होंने इस बातचीत के राजनीतिक अर्थ निकालने से बचने की सलाह देते हुए कहा कि राहुल गांधी के जवाब को इस वादे के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए कि अगर कांग्रेस सत्ता में आती है, तो मस्क को लाइसेंस दे दिया जाएगा.

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इस मसले पर पित्रोदा ने कहा, “इसका यह मतलब नहीं है कि अगर राहुल गांधी सत्ता में आए, तो वह एलन मस्क को लाइसेंस दे देंगे. इसका मतलब यह नहीं है. लेकिन लोग अलग-अलग अर्थ निकालते हैं.”

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