'कमजोर कोशिशें हैं, हमें सब पता है, क्या हो रहा है', SC ने राहुल गांधी को लगाई फटकार, ECI-सरकार को जारी किया नोटिस
सुप्रीम कोर्ट ने SIR और चुनाव आयोग को लेकर दायर कई याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए राहुल गांधी को फटकार लगाई और 12 मार्च को SC मार्च के दौरान आचरण को लेकर स्पष्टीकरण की मांग की. इस दौरान कोर्ट ने ECI और सरकार को नोटिस जारी किया है.
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12 अक्टूबर को कांग्रेस और विपक्षी दलों के सुप्रीम कोर्ट मार्च से संबंधित एक मामले को लेकर उच्चतम न्यायालय ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी को फटकार लगाई है. कोर्ट ने राहुल से साफ कहा कि उन्हें इस मामले में स्पष्टीकरण देना होगा. CJI ने एक याचिका पर सुनवाई करते हुए मार्च और उस दौरान हुई अव्यवस्था को लेकर सवाल उठाया और कहा कि याचिकाकर्ता (राहुल गांधी) को इस पर सफाई देनी होगी.
इस दौरान कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को निर्देश दिया कि प्रदर्शन से जुड़े सभी सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित रखे जाएं. सभी पक्ष भी अपने-अपने वीडियो सुरक्षित रख सकते हैं ताकि उन्हें अदालत में सबूत के तौर पर इस्तेमाल किया जा सके.
सुप्रीम कोर्ट ने राहुल गांधी को लगाई फटकार
इस दौरान कोर्ट ने जंतर-मंतर को प्रोटेस्ट साइट के तौर पर डिनोटिफाई करने को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से पूछा कि क्या ये फैसला कोर्ट की कुछ मौखिक टिप्पणियों की वजह से लिया गया या इसे आम प्रदर्शन स्थल के रूप में इस्तेमाल करने की उपयोगिता पर विचार करने के बाद.
आपको बता दें कि सुप्रीम कोर्ट में प्रदर्शन पर पाबंदियों से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई हो रही थी. सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सरकार का पक्ष रखते हुए कहा कि सरकार के कदम का बचाव किया और इसके पीछे के कारण हलफनामे में बताए. इसी दौरान कोर्ट ने 12 अक्टूबर को राहुल गांधी के आचरण पर भी सवाल उठाए और कहा कि उन्हें इस पर स्पष्टीकरण देना होगा.
कोर्ट को कोई डरा-धमका नहीं सकता: CJI
CJI सूर्यकांत ने कहा कि न्यायपालिका को "कोई भी डरा-धमका नहीं सकता." राहुल गांधी के आचरण पर सवाल उठाते हुए चीफ जस्टिस ने नाराजगी जताई कि सुप्रीम कोर्ट मार्च और उसके दौरान हुई अव्यवस्था पर याचिकाकर्ता राहुल गांधी को सफाई देनी होगी, अपनी मंशा स्पष्ट करनी होगी.
SIR और अन्य मामलों को लेकर चुनाव आयोग, सरकार को नोटिस
राहुल गांधी की ओर से वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल बेंच के सामने पेश हुए. इस दौरान 'SIR' प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने राहुल गांधी, दिग्विजय सिंह और AIMIM सुप्रीमो असद्दुदीन ओवैसी की याचिका पर केंद्र सरकार और चुनाव आयोग को नोटिस जारी किया है.
प्रदर्शन से जुड़े सभी सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित रखने के निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस अधिकारियों को प्रदर्शन से जुड़े सभी सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित रखने का निर्देश दिया है. साथ ही, सभी निजी पक्ष भी वीडियो सुरक्षित रख सकते हैं, ताकि उन्हें अदालत में सबूत के तौर पर पेश किया जा सके. जंतर-मंतर को डिनोटिफाई किए जाने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से पूछा कि क्या यह फैसला कोर्ट की कुछ मौखिक टिप्पणियों की वजह से लिया गया था या फिर इसे आम प्रदर्शन स्थल के रूप में इस्तेमाल करने की उपयोगिता पर विचार करने के बाद लिया गया था.
हालांकि सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट में स्पष्ट कर दिया कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले या टिप्पणी के आधार पर ये निर्णय नहीं लिया गया. इस संबंध में उन्होंने आगे कहा कि इस कमेटी का गठन तो बहुत पहले ही कर दिया गया था, जिसकी एक विस्तृत रिपोर्ट के बाद ये फैसला लिया गया.
क्या है पूरा मामला?
आपको बता दें कि 10 अक्टूबर को सीजेपी के मार्च के ऐलान के बात 12 अक्टूबर को INDIA ब्लॉक ने सुप्रीम कोर्ट मार्च करने का ऐलान किया था और देर शाम मार्च किया भी गया. उससे पहले सीजीआई से विपक्षी दलों के नेताओं की ओर से मिलने की भी मांग की गई थी, जिसे कथित तौर पर सीजेआई ने मना कर दिया था. उन्होंने कहा था कि सभी प्रकार की याचिकाओं के लिए कोर्ट के द्वार खुले हैं, व्यक्तिगत रूप से मिलना संभव नहीं, ठीक नहीं.
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इसके बाद चुनाव आयोग की SIR प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं और “वोट चोरी” के आरोपों के खिलाफ विपक्षी दलों ने सुप्रीम कोर्ट तक मार्च किया और याचिका दाखिल की. राहुल गांधी की ओर से SIR पर रोक और CEC के इस्तीफे की मांग की है. ये मार्च बाराखंभा रोड, कनॉट प्लेस से शुरू हुआ और सुप्रीम कोर्ट पहुंचकर खत्म हुआ था. राहुल, प्रियंका, खड़गे समेत नेता कोर्ट परिसर पहुंचे थे. इस दौरान काफी हंगामा हुआ था.
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12 अक्टूबर 2026 को राहुल गांधी INDIA ब्लॉक नेताओं के साथ सुप्रीम कोर्ट तक मार्च किया था. उन्होंने चुनाव आयोग की SIR प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं और “वोट चोरी” के आरोपों के खिलाफ याचिका दाखिल की. राहुल ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और SIR रोकने की मांग की है.
CJI बोले-हमें सब पता है, क्या हो रहा है!
इसके बाद गुरुवार को मामले की सुनवाई हुई. इस दौरान वरिष्ठ वकील गौरव भाटिया ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के अंदर जो घटना हुई, उसे होना नहीं चाहिए था. उन्होंने कोर्ट को बताया कि लगभग 200 वकीलों ने एक दावे पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसमें उन्होंने वकीलों को डराने-धमकाने की कथित कोशिशों पर चिंता व्यक्त की है.
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गौरभ भाटिया की दलील पर CJI ने कहा कि कोई भी डरा-धमका नहीं सकता है. गौरव भाटिया ने आगे कहा कि यह स्वीकार्य नहीं है कि यह अदालत राजनीतिक जुलूसों में उलझी रहे. सुप्रीम कोर्ट में जो हुआ, वह नहीं होना चाहिए था. उन्होंने कहा है कि इस तरह की डराने-धमकाने की कोशिशें नहीं होनी चाहिए. इस CJI ने कहा कि ये कमजोर कोशिशें हैं, जिन पर कोई ध्यान नहीं देता. बाहर वे बयान देते हैं. हम कोई अलग-थलग दुनिया में नहीं बैठे हैं, हमें सब पता है कि क्या हो रहा है.