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Rahul की घिनौनी साजिश का पर्दाफास, 4 जून को देश में आग लगाने की तैयारी

4 जून को रिजल्ट आने से पहले विपक्ष की तैयारी है कि अगर मोदी जीते तो देश में आग लग जाएगी। वहीं बीजेपी मोदी की शपथ की तैयारी कर रही है।

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4 जून को हिंदुस्तान की राजनीति करवट लेने वाली है। इस दिन फैसला होगा की भारत दुनिया की तीसरी बड़ी अर्थव्यवस्था बनने के रास्ते पर चलेगा या फिर देश को जाति और धर्म के आधार पर बांटकर संपत्तियों का बटवारा किया जाएगा। संविधान को ताक पर रखकर मुस्लिमों को ओबीसी का हक मारकर आरक्षण दिया जाएगा। इसलिए ये चुनाव आम नहीं है। अकेले मोदी को हराने के लिए दर्जनों राजनीतिक दल एक छत के नीचे कदमताल कर रहे है। दस साल सत्ता से दूर रहकर गांधी परिवार बौखलाया हुआ है। और देश में आग लगाने की बात कर रहा है। और शायद एक जून को जो मीटिंग बुलाई गई है उसमें ये तय किया जाएगा कि देश में आग कैसे लगानी है।




कांग्रेस पार्टी इस देश में 80 से ज्यादा बार संविधान बदल चुकी है, इंदिरा गांधी को खुद एक मिनी संविधान लिख चुकी है। 370 को ना हटाया जा सके उसके लिए मूल प्रति को ही गायब करने की कोशिश की…तो कांग्रेस पार्टी अगर ऐसी बात करे तो उसे शोभा नहीं देता। और रही आग लगाने की बात तो राहुल गांधी ऐसा पहली बार नहीं बोल रहे है। इससे पहले विदेशों में बैठकर भी बोल चुके है कि देश में केरोसीन फैला हुआ है। कभी भी देश में आग लग सकती है। तो जो ये आग लगाने वाली बात है ये राहुल ने बिल्कुल सच बोली है क्योंकि 120 संगठन, विपक्ष, आंदोलनजीवी और कुछ चरण चुंबकीय पत्रकार चार जून को देश का माहौल बनाने में जुट पड़े है। उन्हें बस आखिरी आदेश का इंतजार है और वो आखिरी आदेश हो सकता है 1 जून को मिल जाए। 


क्योंकि इस तारीख को विपक्ष एक मीटिंग कर रहा है। अभी नहीं पता की उस मीटिंग में क्या होगा। लेकिन जरूर कुछ बड़ा होने वाला है। क्योंकि तैयारी ये की जो मतगणना एजेंट होंगे उन सबको प्रशिक्षण दिया जा रहा है, एग्जिट पोल्स से कैसे निपटा जाए इसकी भी तैयारी की जा रही है। एक बड़े जन-आंदोलन की तैयारी की जा रही है, अगर वोटों की चोरी पकड़ी जाती है तो इसे लेकर कोर्ट भी जाया जा सकता है और चुनाव भी रद्द कराया जा सकता है। यानी, इसका सीधा मतलब है कि विपक्ष लोकतंत्र के इस महापर्व को ख़ारिज कर देगा। 

तो बड़ा सवाल ये है कि पोलिंग एजेंट को क्या प्रशिक्षण दिया जा रहा है। क्या पोलिंग एजेंटस को हिंसा भडकाने की ट्रेनिंग दी जा रही है, क्या तनाव पैदा करना सिखाया जा रहा है। इन लोगों को किस लिए ट्रेन किया जा रहा है वो तो विपक्ष ही जानता है। खैर नतीजे आने के तुरंत बाद ईवीएम का रोना तो रोएगा ही। और क्या क्या करेगा। वो चार जून को ही पता चलेगा। लेकिन विपक्ष एक जून के लिए कुछतो बड़ा जरूर प्लान कर रहा है। क्योंकि एक जून को ही तमाम एग्जिट पोल सामने आ जाएंगे । और विपक्ष अपना विधवा विलाप शुरु कर देगा। विधवा विलाप तो वैसे शुरु हो चुका है। लेकिन एक जून के बाद इसमें तेजी लाई जाएगी। 

क्योंकि देश की संस्थाओं पर विपक्ष को भरोसा नहीं है। इन लोगों को भरोसा तभी होता है। जब दिल्ली में केजरीवाल जीतते है, कर्नाटक, हिमाचल, तेलंगाना में कांग्रेस जीतती है। झारखंड में हेमंत सोरेन जीतते है। केजरीवाल को चुवान प्रचार करने के लिए जमानत दे दी जाती है, राहुल गांधी की सजा रद्द कर दी जाती है। लेकिन जब सुप्रीम कोर्ट कहता है कि आप चुनाव आयोग पर ऐसे शक नहीं कर सकते तो इन्हे सांप सूंघ जाता है। और जब चुनाव आयोग बुलाता है कि आइए ईवीएम को हैक करके दिखाइए। 


तब ये लोग नहीं जाते क्योंकि एजेंडा ध्वस्त हो जाएगा। और हां इनके घोषणापत्र में भी नहीं है कि ये बैलेट पेपर से चुनाव करवाएंगे। तो झूठ की जमीन पर जो इमारत विपक्ष खड़ी करना चाहता है। वो चार जून को ध्वस्त होने वाली है। और बडे़ नेता छुट्टियां मनाने के लिए विदेश की सैर पर जाने वाले है। इससे ज्यादा ये लोग आग नहीं लगा पाएंगे। वैसे आपको क्या लगता है ।चार जून के लिए विपक्ष क्या तैयारी कर रहा है। 
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