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PM मोदी का 5 देशों का दौरा क्यों है भारत के लिए गेमचेंजर? दुनिया में बढ़ी देश की साख
पीएम मोदी पांच देशों की अहम विदेश यात्रा पूरी कर भारत लौट आए हैं. यूएई, नीदरलैंड, स्वीडन, नॉर्वे और इटली दौरे के दौरान ऊर्जा, रक्षा, एआई, सेमीकंडक्टर और व्यापार समेत कई क्षेत्रों में महत्वपूर्ण समझौते हुए, जिससे भारत की वैश्विक स्थिति को नई मजबूती मिली है.
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी पांच देशों की महत्वपूर्ण यात्रा कर भारत लौट आएं हैं. इस दौरे ने भारत की कूटनीतिक ताकत को नई दिशा दी है. संयुक्त अरब अमीरात, नीदरलैंड, स्वीडन, नॉर्वे और इटली की इस यात्रा के दौरान ऊर्जा सुरक्षा, रक्षा साझेदारी, तकनीकी सहयोग, एआई, सेमीकंडक्टर, हरित ऊर्जा और व्यापार जैसे कई बड़े मुद्दों पर अहम समझौते हुए. माना जा रहा है कि यह दौरा आने वाले वर्षों में भारत की वैश्विक स्थिति को और मजबूत करेगा.
पीएम मोदी की यह यात्रा ऐसे समय में हुई, जब दुनिया ऊर्जा संकट, आर्थिक अस्थिरता और बदलते भू-राजनीतिक हालात से गुजर रही है. ऐसे में भारत ने अपने हितों को ध्यान में रखते हुए कई देशों के साथ रणनीतिक रिश्तों को नई मजबूती दी. आने वाले समय में पीएम मोदी की इस यात्रा भारत के रक्षा, विकास समेत अन्य मुद्दों पर काफी मददगार साबित होगी.
यूएई दौरे से ऊर्जा और रक्षा साझेदारी को मिली मजबूती
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इस दौरे का पहला पड़ाव UAE रहा. 15 मई 2026 को प्रधानमंत्री मोदी अबू धाबी पहुंचे, जहां यूएई के राष्ट्रपति मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान ने उनका भव्य स्वागत किया. दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग को लेकर स्ट्रैटेजिक डिफेंस पार्टनरशिप फ्रेमवर्क पर हस्ताक्षर किए गए. इसके साथ ही यूएई ने भारत के स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व के लिए 3 करोड़ बैरल कच्चा तेल देने का फैसला किया. एलपीजी सप्लाई को लेकर भी महत्वपूर्ण समझौते हुए. यही नहीं, यूएई ने भारतीय बाजारों में 5 बिलियन डॉलर के निवेश पैकेज की घोषणा कर भारत की अर्थव्यवस्था में भरोसा जताया. होर्मुज क्षेत्र में सुरक्षित समुद्री आवाजाही को लेकर भी दोनों देशों ने साझा समर्थन दिया.
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नीदरलैंड यात्रा में सेमीकंडक्टर पर जोर
इसके बाद प्रधानमंत्री मोदी Netherlands पहुंचे. इस यात्रा ने सांस्कृतिक और तकनीकी दोनों मोर्चों पर भारत को बड़ी उपलब्धियां दिलाईं. दोनों देशों ने अपनी स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप को और मजबूत करने का फैसला किया. सबसे खास बात यह रही कि नीदरलैंड सरकार ने 11वीं सदी की चोल साम्राज्य की ऐतिहासिक ताम्र पट्टिकाएं भारत को वापस सौंपीं. इसके अलावा दुनिया की दिग्गज सेमीकंडक्टर कंपनी ASML और टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स के बीच भारत में सेमीकंडक्टर फैब्रिकेशन प्लांट लगाने को लेकर महत्वपूर्ण समझौता हुआ. इससे भारत को टेक्नोलॉजी और चिप निर्माण के क्षेत्र में बड़ी ताकत मिलने की उम्मीद है.
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स्वीडन के साथ एआई और टेक्नोलॉजी सहयोग को नई दिशा
प्रधानमंत्री मोदी की दो दिवसीय स्वीडन यात्रा भी काफी अहम रही. इस दौरान भारत और स्वीडन ने अपने संबंधों को रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक पहुंचाने का फैसला किया. दोनों देशों के बीच संयुक्त नवाचार साझेदारी के दूसरे चरण की शुरुआत हुई. साथ ही भारत-स्वीडन टेक्नोलॉजी और एआई कॉरिडोर लॉन्च किया गया. अगले पांच वर्षों में द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य भी तय किया गया. प्रधानमंत्री मोदी ने स्वीडन के प्रधानमंत्री उल्फ क्रिस्टर्सन और वहां की जनता का गर्मजोशी भरे स्वागत के लिए आभार जताया.
नॉर्वे के अंतरिक्ष सहयोग पर बनी सहमति
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इसके बाद प्रधानमंत्री मोदी ने नॉर्वे का ऐतिहासिक दौरा किया. इस यात्रा के दौरान भारत और नॉर्वे ने ग्रीन स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप की घोषणा की. दोनों देशों के बीच कुल 12 बड़े समझौतों पर हस्ताक्षर हुए. इनमें ग्रीन हाइड्रोजन, पवन ऊर्जा, कार्बन कैप्चर तकनीक, ग्रीन शिपिंग और पोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे अहम क्षेत्र शामिल रहे. भारत की लंबी तटीय रेखा के विकास को लेकर भी साझा सहयोग पर सहमति बनी. इसके अलावा
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन और नॉर्वे के बीच अंतरिक्ष अनुसंधान और बाहरी अंतरिक्ष के शांतिपूर्ण उपयोग को लेकर विशेष समझौता हुआ. इस समझौते को भविष्य के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है.
इटली यात्रा में व्यापार पर फोकस
पांच देशों की इस यात्रा का आखिरी पड़ाव इटली रहा. यहां प्रधानमंत्री मोदी ने इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी से मशहूर विला डोरिया पैम्फिली में मुलाकात की. प्रधानमंत्री मोदी को औपचारिक गार्ड ऑफ ऑनर भी दिया गया. दोनों नेताओं के बीच प्रतिनिधिमंडल स्तर की बातचीत हुई, जिसमें संयुक्त रणनीतिक कार्य योजना 2025-29 की प्रगति की समीक्षा की गई. व्यापार, निवेश, रक्षा, ब्लू इकोनॉमी, शिक्षा, कनेक्टिविटी और तकनीकी सहयोग को और मजबूत करने पर सहमति बनी. इसके अलावा वैश्विक भू-राजनीतिक हालात पर भी विस्तार से चर्चा हुई.
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बताते चलें कि प्रधानमंत्री मोदी का यह पांच देशों का दौरा सिर्फ कूटनीतिक यात्रा नहीं रहा, बल्कि यह भारत की बढ़ती वैश्विक ताकत और बदलती अंतरराष्ट्रीय भूमिका का बड़ा संकेत बनकर सामने आया है. ऊर्जा सुरक्षा से लेकर एआई और सेमीकंडक्टर तक, भारत ने इस दौरे के जरिए भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए कई मजबूत साझेदारियां तैयार कर ली हैं.