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अमित शाह और डोभाल संग PM मोदी की हाईलेवल मीटिंग, मिडिल ईस्ट के हालात और गैस संकट के साथ इन मुद्दों पर चर्चा

इस मीटिंग में तनाव के बीच संसाधनों की लगातार सप्लाई, लॉजिस्टिक्स और डिस्टिब्यूशन पर जोर दिया गया. बैठक में NSA अजीत डोभाल भी मौजूद रहे.

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PM Meeting On Middle east Tension: अमेरिका-इजराइल की ईरान से जंग ने मिडिल ईस्ट समेत दुनिया के कई देशों में चिंताजनक हालात पैदा कर दिए. साथ ही साथ LPG गैस और तेल संबंधी संकट भी खड़ा हो गया. PM मोदी ने इन्हीं हालातों पर हाईलेवल बैठक की. 

PM मोदी ने बैठक की अध्यक्षता की. जिसमें पेट्रोलियम, कच्चा तेल, गैस, बिजली और फर्टिलाइजर्स समेत कई मोर्चों पर समीक्षा की गई. इस मीटिंग में तनाव के बीच संसाधनों की लगातार सप्लाई, लॉजिस्टिक्स और डिस्टिब्यूशन पर जोर दिया गया. ताकि आवश्यक सेवाओं में किसी भी तरह की रुकावट को रोका जा सके. 

बैठक में कौन-कौन रहा मौजूद 

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बैठक में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा, पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी, कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान, विदेश मंत्री एस जयशंकर, सिविल एविएशन मिनिस्टर राममोहन नायडू, रेल और आईटी मिनिस्टर अश्विनी वैष्णव समेत अन्य सीनियर लीडर मौजूद रहे. बताया जा रहा है बैठक में NSA अजीत डोभाल भी मौजूद रहे. जिन्होंने PM मोदी को मिडिल ईस्ट के हालातों पर अपडेट दी. 

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पेट्रोलियम, कच्चे तेल, गैस, बिजली और उर्वरक क्षेत्रों की स्थिति की समीक्ष की. यह बैठक पश्चिम एशिया में चल रहे संकट के बीच निर्बाध आपूर्ति और स्थिर वितरण सुनिश्चित करने को लेकर थी. इस दौरान अधिकारियों ने PM मोदी को ईंधन की उपलब्धता की वर्तमान स्थिति और भारत की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उठाए जा रहे कदमों के बारे में जानकारी दी. 

हालातों पर करीब से नजर रख रहें हैं PM मोदी

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सूत्रों के अनुसार, सरकार वैश्विक घटनाक्रम पर करीबी नजर रख रही है और अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में उतार-चढ़ाव से उपभोक्ताओं और उद्योगों को प्रभावित न होने देने के लिए सक्रिय कदम उठा रही है. बढ़ती भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के बीच पर्याप्त भंडार बनाए रखने और आपूर्ति शृंखलाओं को मजबूत करने के प्रयास किए जा रहे हैं. यह समीक्षा ऐसे समय में हुई है, जब पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजारों में अस्थिरता बनी हुई है. यह क्षेत्र तेल और गैस आपूर्ति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है. 

मुख्य समुद्री मार्गों, विशेष रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में संभावित रुकावट को लेकर भी चिंता जताई गई है, जो वैश्विक ऊर्जा व्यापार का बड़ा हिस्सा संभालता है. 

ईरान के राष्ट्रपति पेजेश्कियान से की थी बात

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एक दिन पहले प्रधानमंत्री मोदी ने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन से बातचीत की थी और क्षेत्रीय स्थिति पर चर्चा करते हुए शांति और स्थिरता की आवश्यकता पर जोर दिया था. उन्होंने अंतर्राष्ट्रीय समुद्री मार्गों को खुला और सुरक्षित रखने के महत्व को भी रेखांकित किया और चेतावनी दी कि किसी भी तरह का व्यवधान वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं को प्रभावित कर सकता है. 

मिडिल ईस्ट पर निर्भरता कम करने के लिए भारत का प्लान 

मध्य पूर्व पर निर्भरता कम करने के लिए भारत ने अपने तेल और गैस आयात को विविध बनाया है, जिसमें अमेरिका, रूस और अफ्रीकी देशों जैसे नाइजीरिया से आयात बढ़ाया गया है. अधिकारियों के अनुसार, अब भारत लगभग 70 प्रतिशत तेल आयात खाड़ी क्षेत्र के बाहर के स्रोतों से आते हैं. 

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यह भी पढ़ें- 'होर्मुज के पास मार गिराया अमेरिकी F- 15 फाइटर प्लेन' ईरान का बड़ा दावा, सबूत में Video भी शेयर किया

सरकार ने LPG आपूर्ति प्रबंधन के लिए भी प्रयास तेज किए हैं, जिसमें संभावित कमी को दूर करने के लिए अमेरिका से LPG की खरीद शामिल है. हालांकि LPG की उपलब्धता को लेकर चिंताएं बनी हुई हैं. अधिकारियों का कहना है कि उपभोक्ता स्तर पर आपूर्ति में कोई बाधा नहीं आई है और ऑनलाइन बुकिंग में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है. 

रूस और अमेरिका से गैस और तेल भारत पहुंचा

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दुनिया भर में सामान की सप्लाई में आ रही दिक्कतों के बीच, अमेरिका से द्रवीकृत पेट्रोलियम गैस (एलपीजी) लेकर एक बड़ा जहाज़ भारत के मंगलुरु बंदरगाह पर पहुंचा. रिपोर्ट के अनुसार, रूस से कच्चा तेल ले जा रहा एक अन्य जहाज भी मंगलुरु पहुंच गया है. तेल और गैस संबंधी जरूरतों को पूरा करने में यह कदम बेहद अहम माना जा रहा है. 

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