Advertisement
'दो महान सभ्यता, ऐतिहासिक दोस्ती', मोदी-पेजेश्कियन की हाथ में हाथ डाले जुगलबंदी, पाकिस्तान को चुभेंगे ईरान के ये शब्द
ब्रिक्स सम्मेलन में भाग लेने आए ईरानी राष्ट्रपति पेजेश्कियन की पीएम मोदी के साथ हाथ में हाथ डाले गर्मजोशी वाली मुलाकात की तस्वीर पोस्ट करते हुए ईरान ने भारत की तारीफ में जो कहा है वो पाकिस्तान को अच्छी नहीं लगेगी, इस्लामाबाद की नींद उड़ाने के लिए काफी है.
Advertisement
भारत की अध्यक्षता में हो रहे ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के सिलसिले में दिल्ली आए ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन की प्रधानमंत्री मोदी से हाई लेवल मुलाकात हुई. अमेरिका के साथ जारी जंग के बीच उनकी इस द्विपक्षीय बातचीत के कई कूटनीतिक मायने हैं. भारत मंडपम में आयोजित ब्रिक्स बिजनेस फोरम के लीडर्स सेशन में पीएम मोदी, पेजेश्कियन और पुतिन की हाथ-हाथ में डाले गर्मजोशी वाली एक मुलाकात की एक तस्वीर शेयर की है, वो काफी वायरल हो रही है.
"दो महान सभ्यताओं के बीच की ऐतिहासिक दोस्ती"
भारत में ईरान के दूतावास ने लिखा: जब दो महान देशों के नेता हाथ मिलाते हैं, तो वे हमें दो महान सभ्यताओं के बीच की ऐतिहासिक दोस्ती की याद दिलाते हैं. ईरान और भारत की दोस्ती अमर रहे!
Advertisement
इसके अलाव ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि "हम भारत को एक उभरते हुए बड़े देश के तौर पर देखते हैं, जो अभी ब्रिक्स (BRICS) की अध्यक्षता कर रहा है. ब्रिक्स अभी एक बहुत अहम संस्था है और बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है. मुझे यकीन है कि भारत ब्रिक्स समूह और इसके सदस्य देशों का बेहतरीन तरीके से नेतृत्व कर सकता है."
Advertisement
When the leaders of two great nations join hands, they remind us of the historic friendship between two great civilizations.
— Iran in India (@Iran_in_India) ?ref_src=twsrc%5Etfw">September 11, 2026
Long live the friendship between Iran and India! pic.twitter.com/agAFLbkZ1M
"भारत एक महान देश"
Advertisement
वे आगे कहते हैं, "ब्रिक्स के भीतर अलग-अलग राय हैं, लेकिन समूह के सभी सदस्य मानते हैं कि राष्ट्रीय मुद्राओं को मजबूत किया जाना चाहिए और सदस्य देशों के बीच व्यापार राष्ट्रीय मुद्राओं के जरिए होना चाहिए. लेकिन एक ही मुद्रा अपनाने का मामला अभी भी विचाराधीन है."
#WATCH | Delhi: Iranian Foreign Minister, Abbas Araghchi, says, "We consider India as a great emerging country, which is now presiding over BRICS. BRICS is a very important institution right now and is playing a very important role. I'm sure that India is able to lead the BRICS… pic.twitter.com/4aPMzLhAcS
— ANI (@ANI) ?ref_src=twsrc%5Etfw">September 11, 2026
इससे पहले ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने ब्रिक्स बिजनेस फोरम के लीडर्स सेशन में भारत सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सराहना करते हुए कहा कि भारत ने ब्रिक्स सहयोग को मजबूत करने के लिए महत्वपूर्ण प्रयास किए हैं. उन्होंने कहा कि मौजूदा समय में दुनिया अपने सबसे जटिल दौर से गुजर रही है और ऐसे समय में ब्रिक्स को संभावित सहयोग से आगे बढ़कर व्यावहारिक आर्थिक सहयोग की दिशा में काम करना होगा.
Advertisement
ईरानी राष्ट्रपति ने की भारत की तारीफ!
अपने संबोधन की शुरुआत में पेजेश्कियन ने भारत सरकार और भारतीय जनता का बैठक की मेजबानी के लिए आभार जताया. उन्होंने कहा, "मैं इस बैठक की मेजबानी के लिए भारत की मित्र सरकार और भारत के लोगों का दिल से धन्यवाद करता हूं. साथ ही ब्रिक्स सहयोग को मजबूत करने के लिए भारत के प्रधानमंत्री के मूल्यवान प्रयासों की भी सराहना करता हूं."
उन्होंने कहा कि निजी क्षेत्र, उद्योग जगत और उद्यमियों की मौजूदगी बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि यही लोग ब्रिक्स के भीतर सहयोग की अवधारणा को वास्तविक आर्थिक उपलब्धियों में बदल सकते हैं.
Advertisement
ईरानी राष्ट्रपति ने कहा कि आज दुनिया जियोपॉलिटिकल अनिश्चितता, सप्लाई चेन में रुकावट और राजनीतिक दबाव बनाने के लिए आर्थिक साधनों के बढ़ते इस्तेमाल जैसी चुनौतियों का सामना कर रही है. इन परिस्थितियों ने देशों के लिए आर्थिक माहौल को पहले से कहीं अधिक जटिल बना दिया है.
उन्होंने कहा कि इन चुनौतियों का जवाब ब्रिक्स के पास है. उनके मुताबिक, ब्रिक्स की असली ताकत केवल सदस्य देशों की अर्थव्यवस्थाओं के आकार में नहीं, बल्कि उन्हें व्यापार, निवेश और संयुक्त वित्तपोषण के मजबूत नेटवर्क में बदलने की क्षमता में निहित है. उन्होंने इसे संभावित सहयोग से परिचालन स्तर के सहयोग की ओर बढ़ने का रास्ता बताया.
ब्रिक्स के अंदर लोकल करेंसी की ईरान ने की वकालत!
Advertisement
पेजेश्कियन ने कहा कि ब्रिक्स सदस्य देशों के बीच व्यापार में राष्ट्रीय मुद्राओं के उपयोग का विस्तार सबसे महत्वपूर्ण कदमों में से एक होना चाहिए. उन्होंने कहा कि इसके साथ मुद्रा जोखिम प्रबंधन और पारस्परिक भुगतान व्यवस्था के लिए आवश्यक वित्तीय तंत्र भी विकसित किए जाने चाहिए.
उन्होंने कहा कि मौजूदा वैश्विक वित्तीय प्रणाली सीमित संख्या में मुद्राओं पर अत्यधिक निर्भर होने के कारण राजनीतिक झटकों के प्रति संवेदनशील है. इसलिए व्यापारिक सहयोग को वास्तविक निवेश में बदलने के लिए ब्रिक्स के न्यू डेवलपमेंट बैंक (एनडीबी) को सदस्य देशों में बुनियादी ढांचा और ऊर्जा परियोजनाओं के वित्तपोषण का प्रमुख इंजन बनाया जाना चाहिए.
ये भी पढ़ें: क्यों बनाया गया था BRICS? कैसे चार देशों का समूह बना 11 देशों का बड़ा मंच, जानें पूरी कहानी
Advertisement
ईरानी राष्ट्रपति ने सुझाव दिया कि न्यू डेवलपमेंट बैंक स्थानीय मुद्राओं में समर्पित क्रेडिट लाइन, स्थानीय मुद्रा में वित्तपोषण और निजी पूंजी को आकर्षित करने के लिए गारंटी तंत्र विकसित करे, ताकि सदस्य देशों के बीच निवेश और आर्थिक सहयोग को नई गति मिल सके.
यह भी पढ़ें
उन्होंने कहा कि ब्रिक्स को मौजूदा वैश्विक चुनौतियों के बीच एक ऐसे मंच के रूप में आगे बढ़ना चाहिए जो सदस्य देशों के बीच आर्थिक साझेदारी को अधिक मजबूत, टिकाऊ और व्यावहारिक बनाए.