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'BJP में पद नहीं, देश सबसे पहले...', धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर अमित शाह की पहली प्रतिक्रिया

धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर अमित शाह ने कहा कि भाजपा में पद से बड़ा देश, युवा और छात्र हैं. उन्होंने कहा कि सरकार शिक्षा व्यवस्था में भरोसा बनाए रखने और जरूरी सुधार करने के लिए प्रतिबद्ध है.

Image Source: Screengrab
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नीट पेपर लीक मामले को लेकर देशभर में छिड़े विवाद के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने शनिवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया है. इसके बाद सत्ता पक्ष से लेकर विपक्ष तक के तमाम नेताओं की प्रतिक्रिया सामने आ रही है. इसी कड़ी में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने पहली बार खुलकर प्रतिक्रिया दी है. शाह ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं के लिए कोई भी पद देश, युवाओं और छात्रों से बड़ा नहीं होता. उनके मुताबिक धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा इसी सोच और जिम्मेदारी का उदाहरण है. शाह का यह बयान ऐसे समय आया है, जब नीट (NEET) परीक्षा को लेकर देश के कई हिस्सों में छात्र विरोध प्रदर्शन कर रहे थे. इस दौरान कई जगह हंगामे की स्थिति भी बनी थी. 

शनिवार देर रात सोशल मीडिया पर किए गए अपने पोस्ट में अमित शाह ने लिखा कि बीजेपीके लिए राष्ट्र और विद्यार्थियों का हित सर्वोपरि है. उन्होंने कहा कि धर्मेंद्र प्रधान ने पद छोड़कर यह संदेश दिया है कि सरकार छात्रों की भावनाओं को गंभीरता से लेती है. शाह ने यह भी संकेत दिया कि सरकार शिक्षा व्यवस्था में भरोसा बनाए रखने के लिए जरूरी फैसले लेने से पीछे नहीं हटेगी.

पेपर लीक रोकने के लिए सरकार की क्या है तैयारी?

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अमित शाह ने अपने बयान में साफ कहा कि नरेंद्र मोदी सरकार पेपर लीक जैसी घटनाओं को रोकने के लिए सख्त सुधारों के लिए प्रतिबद्ध है. उन्होंने कहा कि युवाओं का विश्वास बनाए रखना सरकार की प्राथमिकता है. इसी वजह से परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनाने की दिशा में लगातार काम किया जा रहा है. शाह ने यह भी कहा कि पेपर लीक के दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई जरूरी है. उनके अनुसार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा इस दिशा में लिए गए फैसले भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने और ईमानदारी से परीक्षा देने वाले छात्रों के साथ न्याय सुनिश्चित करने में मदद करेंगे.

धर्मेंद्र प्रधान के काम की भी की सराहना

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गृह मंत्री ने सिर्फ इस्तीफे पर ही बात नहीं की, बल्कि शिक्षा मंत्री के रूप में धर्मेंद्र प्रधान के कार्यकाल की भी खुलकर तारीफ की. उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति को लागू करने, मातृभाषाओं में परीक्षा व्यवस्था को बढ़ावा देने और पीएम श्री स्कूलों के विस्तार में प्रधान की अहम भूमिका रही है. इसके अलावा उन्होंने डिजिटल शिक्षा, कौशल विकास और उद्योगों के साथ शिक्षा संस्थानों के बेहतर समन्वय की दिशा में किए गए प्रयासों का भी उल्लेख किया. शाह के मुताबिक धर्मेंद्र प्रधान ने शिक्षा व्यवस्था को अधिक समावेशी, आधुनिक और छात्र-केंद्रित बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण पहल कीं.

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बताते चलें कि धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और अमित शाह के बयान के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि सरकार परीक्षा प्रणाली में भरोसा कैसे मजबूत करेगी. केंद्र का कहना है कि सुधारों की प्रक्रिया जारी रहेगी और पेपर लीक जैसी घटनाओं के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे. फिलहाल सरकार का पूरा फोकस छात्रों का विश्वास कायम रखने, दोषियों पर कार्रवाई करने और भविष्य में निष्पक्ष परीक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने पर है.

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