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‘दुनिया की कोई ताकत हमें झुका नहीं सकती…’, जानिए आखिर किसे दी PM मोदी ने यह कड़ी चेतावनी

Pokhran Nuclear Test: पीएम मोदी ने पोखरण परमाणु परीक्षणों को याद करते हुए कहा कि भारी वैश्विक दबाव के बावजूद भारत कभी भी किसी बाहरी ताकत के सामने नहीं झुका.

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11 May 2026
( Updated: 11 May 2026
05:04 PM )
‘दुनिया की कोई ताकत हमें झुका नहीं सकती…’, जानिए आखिर किसे दी PM मोदी ने यह कड़ी चेतावनी
Image Source: IANS/PMO
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को 11 मई, 1998 को पोखरण में किए गए परमाणु परीक्षणों को याद किया. उन्होंने कहा कि दुनिया की बड़ी ताकतों के भारी दबाव के बावजूद भारत ने अपने परमाणु लक्ष्यों को आगे बढ़ाने का पक्का और मजबूत इरादा दिखाया.

PM मोदी ने 1998 के परमाणु परीक्षणों को याद किया

उन्होंने कहा कि भारत ने 1998 में दो परमाणु परीक्षण किए थे, पहला 11 मई को और दूसरा 13 मई को. उन्होंने कहा कि दुनिया की कोई भी ताकत इस देश और इसके नागरिकों को बाहरी ताकतों के सामने झुकने पर मजबूर नहीं कर सकती. सोमनाथ मंदिर के दोबारा बनने के 75 साल पूरे होने के मौके पर आयोजित 'सोमनाथ अमृत महोत्सव' समारोह में पीएम मोदी ने 1998 के परमाणु परीक्षणों का जिक्र किया.

अटल जी के नेतृत्व में भारत बना वैश्विक ताकत- प्रधानमंत्री

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इतिहास के इन अहम पलों को याद करते हुए उन्होंने दिखाया कि कैसे पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में भारत एक वैश्विक ताकत के तौर पर उभरा. सोमनाथ मंदिर में 'कुंभाभिषेक' के बाद सभा को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि 11 मई को भारत ने पोखरण में तीन परमाणु परीक्षण किए. हमारे वैज्ञानिकों ने दुनिया के सामने देश की ताकत और काबिलियत का प्रदर्शन किया, इससे पूरी दुनिया में हलचल मच गई. उन्होंने बताया कि दुनिया की बड़ी ताकतों ने हमारी परमाणु ताकत को बहुत गंभीरता से लिया और हम पर कई तरह के आर्थिक प्रतिबंध और रोक लगा दीं. 

विदेशी दबाव के बावजूद परमाणु परीक्षण सफल

पीएम मोदी ने कहा कि कोई भी इंसान इससे घबरा जाता, खासकर तब जब दुनिया की बड़ी ताकतें आपके खिलाफ एकजुट हो जाएं, लेकिन हम अलग मिट्टी के बने हैं. 11 मई के बाद दुनिया की ताकतों ने अपनी निगरानी और बढ़ा दी, लेकिन हमारे वैज्ञानिकों ने अपना काम पूरा कर लिया था. फिर 13 मई को दो और परमाणु परीक्षण किए गए. उस दिन, दुनिया को भारत के राजनीतिक नेतृत्व की 'अटल' इच्छाशक्ति के बारे में पता चला.

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मिशन का नाम ‘ऑपरेशन शक्ति’ क्यों पड़ा?

उन्होंने कहा कि देश पर भारी दबाव था, लेकिन अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में भाजपा सरकार ने यह साबित कर दिया कि हमारे लिए राष्ट्रीय हित सबसे ऊपर हैं और दुनिया की कोई भी ताकत हमें झुकने पर मजबूर नहीं कर सकती. प्रधानमंत्री ने परमाणु मिशन को 'ऑपरेशन शक्ति' नाम दिए जाने के बारे में भी विस्तार से बताया.

पोखरण परीक्षणों से मिली भारत को नई पहचान

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उन्होंने कहा कि यह नाम इस बात का प्रतीक है कि तमाम मुश्किलों के बावजूद भारत का खुद पर भरोसा और उसकी रणनीतिक स्थिति लगातार मजबूत हो रही है. खास बात यह है कि 18 मई, 1974 को हुए पोखरण-I परीक्षणों और उसके बाद 11 और 13 मई, 1998 को हुए पोखरण-II परीक्षणों ने भारत को परमाणु-सशस्त्र देशों के चुनिंदा समूह में शामिल कर दिया. साथ ही ये परीक्षण देश की रणनीतिक और भू-राजनीतिक स्थिति में एक निर्णायक मोड़ भी साबित हुए. 

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