×
जिस पर देशकरता है भरोसा
Advertisement

‘किसी तीसरे की जरूरत नहीं…’ भारत के साथ सीमा विवाद पर बदल गए नेपाल के सुर, अपनी बात से पलटी बालेन सरकार!

नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने संसद में कहा है कि भारत-नेपाल सीमा विवाद पूरी तरह से एक द्विपक्षीय मामला है और इसमें किसी भी तीसरे पक्ष की कोई भूमिका नहीं है.

Author
11 Jun 2026
( Updated: 11 Jun 2026
03:45 PM )
‘किसी तीसरे की जरूरत नहीं…’ भारत के साथ सीमा विवाद पर बदल गए नेपाल के सुर, अपनी बात से पलटी बालेन सरकार!
Image Source- IANS
Advertisement

नेपाल के जेन जी चहेते प्रधानमंत्री बालेन शाह भारत के साथ पंगा लेकर फंस गए हैं. सीमा विवाद पर उन्होंने ब्रिटेन और चीन की मदद लेने की बात कही थी. जिस पर भारत ने कड़ी प्रतिक्रिया दी थी. भारत ने दो टूक कहा था इस मामले में किसी तीसरे का हस्तक्षेप बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. भारत के रुख के बाद अब नेपाली विदेश मंत्री का बड़ा बयान आया है. जिसमें वे भारत के साथ सहमत नजर आए हैं. 

नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने संसद में कहा है कि भारत-नेपाल सीमा विवाद पूरी तरह से एक द्विपक्षीय मामला है और इसमें किसी भी तीसरे पक्ष की कोई भूमिका नहीं है. शिशिर खनाल का ये बयान काफी अहम है, उन्होंने इसके जरिए एक तरह से दोनों की तल्खी को शांत करने की कोशिश की है. विदेश मंत्री ने नेपाल की संसद में संबोधित करते हुए कहा 

‘मैं इस सदन में यह स्पष्ट करना चाहता हूं कि नेपाल-भारत सीमा एक द्विपक्षीय मुद्दा है. नेपाल हमेशा से इस समस्या को दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक समझौतों के आधार पर बातचीत के जरिए सुलझाना चाहता है.’

बालेन शाह के बयान पर शिशिर खनाल ने क्या कहा? 

शिशिर खनाल ने बालेन शाह के बयान पर सफाई देते हुए उसे स्पष्ट किया. उन्होंने कहा, प्रधानमंत्री (बालेन शाह) का इरादा किसी तीसरे पक्ष से मध्यस्थता कराने का नहीं था, बल्कि उनका मतलब यह था कि अगर चीन या ब्रिटेन के पास 'सुगौली संधि' के दौर के ऐतिहासिक दस्तावेज उपलब्ध हों, तो उनका उपयोग तकनीकी प्रक्रिया में मदद के लिए किया जा सकता है.

Advertisement

यहां ये जानना भी जरूरी है कि आखिर अचानक नेपाल के सुर क्यों बदल गए, क्यों भारत को आंख दिखा रही बालेन शाह सरकार के रुख में नरमी आई? दरअसल, नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल हाल ही में भारत दौरे पर आए थे. यहां उन्होंने भारत के साथ सीमा विवादों को आपसी बातचीत के जरिए ही सुलझाने की बात की थी. ये पहली बार है जब उन्होंने नेपाली संसद में भी इसी रुख को दोहराया है. 

वहीं, भारत और नेपाल के बीच बेटी-रोटी का रिश्ता है, न केवल सांस्कृतिकृ-धार्मिक लिहाज से ही यह अहम हो जाता है, इसके साथ-साथ नेपाल भारत एक दूसरे के सबसे बड़े व्यापारिक साझेदार हैं. ऐसे में भारत के साथ पंगे लेकर नेपाल का ही नुकसान है. 

क्या है मामला? 

Advertisement

दरअसल, नेपाली PM बालेन शाह ने संसद में कहा था कि जैसे भारत ने नेपाल की जमीन पर अतिक्रमण किया है, वैसे ही नेपाल ने भी कई जगहों पर भारत की जमीन पर अतिक्रमण किया है. उन्होंने इस विवाद को सुलझाने के लिए चीन और ब्रिटेन के हस्तक्षेप की मांग की थी. 
उन्होंने कहा था, 

‘आपको एक तथ्य जानकर हैरानी होगी, जो मुझे प्रधानमंत्री बनने के बाद ही पता चला है. सिर्फ भारत ने नेपाली क्षेत्रों पर अतिक्रमण किया है, बल्कि नेपाल ने भी कई स्थानों पर भारत के क्षेत्रों पर अतिक्रमण किया है. अब दोनों देशों को तथ्यों की जांच करनी चाहिए और एक साथ बैठकर इस मुद्दे का हल करना चाहिए. काठमांडू ने इस मुद्दे पर चीन और ब्रिटेन के साथ राजनयिक चर्चा भी की है.’ 

बालेन शाह ने यह भी कहा था कि उन्होंने ब्रिटेन के साथ यह मामला इसलिए उठाया, क्योंकि यह उस दौर से जुड़ा है जब ब्रिटिश सरकार इस क्षेत्र को छोड़ कर गई थी. नेपाली PM के इस बयान पर विवाद हुआ, भारत ने नाराजगी जताई. न केवल भारत बल्कि बालेन शाह को नेपाल में ही आलोचना झेलनी पड़ी. इसके बाद सरकार ने अपनी ही बात से यू टर्न ले लिया. 

क्या है नेपाल-भारत के बीच सीमा विवाद? 

यह भी पढ़ें

नेपाल और भारत के बीच कालापानी, लिपुलेख और लिम्पियाधुरा को लेकर पुराना सीमा विवाद है. नेपाल इसके हिस्सों पर अपना दावा करता आया है. लेकिन भारत ने साफ किया है कि यह भारत के उत्तराखंड का हिस्सा हैं. भारत हमेशा से ही इस मुद्दे पर द्विपक्षीय बातचीत के जरिए हल निकालना चाहता है, लेकिन बालेन शाह के बयान ने तनाव को जन्म दे दिया. 

Tags

Advertisement
टिप्पणियाँ 0
G
Guest (अतिथि)
LIVE
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
अधिक
Advertisement
Advertisement
शॉर्ट्स
वेब स्टोरीज़
होम वीडियो खोजें