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केंद्र का नया आदेश, सार्वजनिक कार्यक्रमों में वंदे मातरम् के सभी 6 छंद अनिवार्य, जानें क्या है पूरा गीत

Vande Bharat Songs: सरकार के इस नए फैसले के बाद एक बार फिर से राजनीतिक बहस छिड़ सकती है. क्योंकि अब तक आम तौर पर वंदे मातरम् का छोटा हिस्सा ही गाया जाता था, लेकिन अब पूरे छह छंद अनिवार्य कर दिए गए हैं.

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11 Feb 2026
( Updated: 11 Feb 2026
10:09 AM )
केंद्र का नया आदेश, सार्वजनिक कार्यक्रमों में वंदे मातरम् के सभी 6 छंद अनिवार्य, जानें क्या है पूरा गीत
Image Source:Social Media

Vande Bharat Songs: केंद्रीय गृह मंत्रालय ने बुधवार सुबह ‘वंदे मातरम्’ को लेकर नई गाइडलाइंस जारी की हैं. सरकार ने कहा है कि अब आधिकारिक कार्यक्रमों में वंदे मातरम् का पूरा छह छंद वाला संस्करण गाना या बजाना अनिवार्य होगा. पहले आमतौर पर इसके केवल शुरुआती एक या दो छंद ही गाए जाते थे, लेकिन अब पूरे छह छंदों को शामिल किया जाएगा. यह फैसला सभी सरकारी कार्यक्रमों और स्कूलों में लागू होगा.

राष्ट्रगान के बाद बजेगा वंदे मातरम्

नई गाइडलाइंस के अनुसार, हर सरकारी कार्यक्रम और स्कूल में ‘जन गण मन’ यानी राष्ट्रगान के तुरंत बाद वंदे मातरम् बजाया या गाया जाएगा. छह छंदों वाले इस पूरे गीत की कुल अवधि लगभग 3 मिनट 10 सेकंड होगी. इसका मतलब है कि कार्यक्रमों में एक तय समय तक पूरा गीत प्रस्तुत करना जरूरी होगा.

किन मौकों पर होगा लागू?

सरकार ने साफ किया है कि यह नियम राष्ट्रीय ध्वज फहराने के समय, राष्ट्रपति के किसी कार्यक्रम में आने पर, उनके भाषण से पहले और बाद में लागू होगा. इसके अलावा अगर राष्ट्रपति राष्ट्र के नाम संबोधन देते हैं, तब भी इस नियम का पालन किया जाएगा. राज्यों में भी यही नियम लागू होगा. राज्यपाल के आने और उनके भाषण से पहले और बाद में भी पूरा छह छंद वाला वंदे मातरम् गाना जरूरी होगा.

कौन-कौन से हैं छह छंद?

सरकार ने वंदे मातरम् के छहों छंदों को आधिकारिक रूप से शामिल किया है. इनमें मां भारती की महिमा, शक्ति, ज्ञान और समृद्धि का वर्णन किया गया है. गीत में भारत माता को शक्ति, ज्ञान, धन और भक्ति की देवी के रूप में बताया गया है. पहले आमतौर पर केवल पहला छंद गाया जाता था, लेकिन अब बाकी चार छंद भी शामिल किए जाएंगे.

छंद 1
वन्दे मातरम्।
सुजलां सुफलां मलयजशीतलाम्।
शस्यशामलां मातरम्।
शुभ्रज्योत्स्नापुलकितयामिनीं।
फुल्लकुसुमितद्रुमदलशोभिनीं।
सुहासिनीं सुमधुर भाषिणीं।


छंद 2
वन्दे मातरम्।
कोटि-कोटि-कण्ठ-कल-कल-निनाद-कराले।
कोटि-कोटि-भुजैर्धृत-खरकरवाले।
अबला केन मा एत बले।
बहुबलधारिणीं नमामि तारिणीं।
रिपुदलवारिणीं मातर
वन्दे मातरम्।।

छंद 3
वन्दे मातरम्।
तुमि विद्या, तुमि धर्म।
तुमि हृदि, तुमि मर्म।
त्वं हि प्राणाः शरीरे।
बाहुते तुमि मा शक्ति।
हृदये तुमि मा भक्ति।
तोमारई प्रतिमा गडि।
मन्दिरे-मन्दिरे मातरम्।।
वन्दे मातरम्।।

छंद 4
वन्दे मातरम्।
त्वं हि दुर्गा दशप्रहरणधारिणी।
कमला कमलदलविहारिणी।
वाणी विद्यादायिनी।
नमामि त्वाम्।
नमामि कमलां अमलां अतुलां।
सुजलां सुफलां मातरम्
वन्दे मातरम्।।

छंद 5
वन्दे मातरम्।
श्यामलां सरलां सुस्मितां भूषितां।
धरणीं भरणीं मातरम्।
शत्रु-दल-वारिणीं।
मातरम्।।

छंद 6
वन्दे मातरम्।
त्वं हि शक्ति, त्वं हि शक्ति।
त्वं हि शक्ति मातरम्।
वन्दे मातरम्।। 

पहले भी हो चुका है विवाद

वंदे मातरम् को लेकर पहले भी कई बार राजनीतिक विवाद हो चुके हैं. पिछले साल जब इस गीत के 150 साल पूरे हुए थे, तब इसे लेकर संसद में चर्चा की मांग की गई थी. उस समय सत्ताधारी बीजेपी और कांग्रेस के बीच तीखी बहस हुई थी. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू पर आरोप लगाया था कि उन्होंने इस गीत का विरोध किया था. इसके बाद इस मुद्दे पर काफी बयानबाजी हुई थी.

नए फैसले पर फिर हो सकती है बहस

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सरकार के इस नए फैसले के बाद एक बार फिर से राजनीतिक बहस छिड़ सकती है. क्योंकि अब तक आम तौर पर वंदे मातरम् का छोटा हिस्सा ही गाया जाता था, लेकिन अब पूरे छह छंद अनिवार्य कर दिए गए हैं. कुछ लोग इसे देशभक्ति से जोड़कर देख रहे हैं, तो कुछ इसे राजनीतिक नजरिए से भी देख सकते हैं.

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