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बाढ़ से टूटा नेपाल, भारत ने संभाला मोर्चा; 18 घंटे बिजली देकर बढ़ाया मदद का हाथ
Nepal Flood: नेपाल अभी भी उस भीषण बाढ़ से उबरने की कोशिश कर रहा है, जिसने हजारो परिवारों की जिंदगी पूरी तरह बदल दी. इस आपदा का असर नेपाल की बिजली व्यवस्था पर भी पड़ा है. कई बिजली परियोजनाओं के बर्बाद होने के बाद अब भारत ने नेपाल की मदद के लिए बड़ा कदम उठाया है. भारत अब नेपाल को हर दिन करीब 18 घंटे बिजली की आपूर्ति करेगा.
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Nepal Flood: पड़ोसी देश नेपाल अभी भी उस भीषण बाढ़ से उबरने की कोशिश कर रहा है, जिसने हजारो परिवारों की जिंदगी पूरी तरह बदल दी. कही घर और सड़कें मलबे में दब गईं, तो कहीं लोग अपनों को खोने के दर्द से गुजर रहे हैं. सैकड़ो लोगो की मौत हो चुकी है.., कई लोग अब भी लापता हैं और राहत-बचाव दल लगातार मलबे के बीच लोगों की तलाश कर रहे हैं. इस आपदा का असर नेपाल की बिजली व्यवस्था पर भी पड़ा है. कई बिजली परियोजनाओं के बर्बाद होने के बाद अब भारत ने नेपाल की मदद के लिए बड़ा कदम उठाया है. भारत अब नेपाल को हर दिन करीब 18 घंटे बिजली की आपूर्ति करेगा...
तत्काल प्रभाव से शुरू हुई मदद
बिजली मंत्रालय के मुताबिक भारत की यह सहायता 13 सितंबर से शुरू होकर 31 दिसंबर 2026 तक जारी रहेगी. इसके तहत नेपाल को हर दिन रात 12 बजे से शाम 6 बजे तक बिजली उपलब्ध कराई जाएगी. बाढ़ से प्रभावित इलाकों में बिजली की जरूरत काफी बढ़ गई है. अस्पतालों, राहत शिविरों, पानी की सप्लाई और संचार व्यवस्था को सुचारु रखने के लिए बिजली बेहद जरूरी है. ऐस मे भारत की यह मदद नेपाल के लिए बड़ी राहत मानी जा रही है.
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दो प्रमुख लाइनों से होगी बिजली सप्लाई
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भारतीय दूतावास के सूत्रों के मुताबिक नेपाल को दो प्रमुख पारेषण लाइनों के जरिए बिजली दी जाएगी. मुजफ्फरपुर-ढलकेबार 400 केवी लाइन के जरिए 600 मेगावाट तक और टनकपुर-महेंद्रनगर 132 किलोवाट पारेषण लाइन के जरिए 54 मेगावाट तक बिजली निर्यात की जाएगी. भारत का कहना है कि इसे नेपाल को संकट के इस दौर में अपनी बिजली जरूरतें पूरी करने में मदद मिलेगी... साथ ही दोनों देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे ऊर्जा सहयोग को भी मजबूती मिलेगी.
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बाढ़ से बिजली परियोजनाओं को भारी नुकसान
26 अगस्त को भोटेकोशी-त्रिशूली नदी में आई बाढ़ ने नेपाल की कई चालू पनबिजली परियोजनाओं को नुकसान पहुंचाया। पांच सौर संयंत्र भी बाढ़ की चपेट में आए। इन परियोजनाओं को नुकसान पहुंचने से करीब 275 मेगावट बिजली की आपूर्ति प्रभावित हुई है...कई प्रमुख हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स के प्रभावित होने से नेपाल के सामने अचानक बिजली का बड़ा संकट खड़ा हो गया. ऐसे में भारत से मिलने वाली बिजली उसके लिए बेहद महत्वपूर्ण हो गई है.
गर्मियों में नेपाल करता है बिजली का निर्यात
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भारत और नेपाल के बीच ऊर्जा क्षेत्र में लंबे समय से सहयोग है. गर्मियों में नेपाल में नदियों का जलस्तर बढ़ने से पनबिजली उत्पादन ज्यादा होता है और वह अतिरिक्त बिजली भारत को निर्यात करता है. वहीं सर्दियों में पानी का स्तर घटने के कारण नेपाल भारत से बिजली आयात करता है. आंकड़ों के मुताबिक वित्त वर्ष 2025-26 में भारत ने नेपाल से 3,299 मिलियन यूनिट बिजली आयात की; जबकि नेपाल को 1,451 मिलियन यूनिट बिजली निर्यात की गई. इस बार बाढ़ ने हालात बदल दिए हैं और नेपाल को समय से पहले ही भारत से अधिक बिजली की जरूरत पड़ गई है.
1,344 लोगों की मौत, कई अब भी लापता
26 अगस्त की इस भीषण आपदा ने नेपाल के कई हिस्सों में भारी तबाही मचाई. हिमालयी क्षेत्र में ग्लेशियरों से बनी झीलों के फटने के बाद तिब्बत सीमा के पास घाटियों और बस्तियों में अचानक पानी और मलबा पहुंच गया. इस आपदा में मरने वालों की संख्या बढ़कर 1,344 हो गई है. सैकड़ों बच्चे और नागरिक अब भी लापता बताए जा रहे हैं, जबकि हजारों लोग बेघर हो चुके हैं.. कई परिवार आज भी अपनों की तलाश में हैं..
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संकट की घड़ी में नेपाल के साथ भारत
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नेपाल के लिए यह आपदा जान-माल के नुकसान के साथ-साथ बुनियादी सुविधाओं का भी बड़ा संकट लेकर आई है. ऐसे समय में भारत की ओर से 18 घंटे बिजली देने का फैसला दोनों देशों के बीच सहयोग और पड़ोसी धर्म की मिसाल है. लगातार बिजली मिलने से अस्पतालों, राहत शिविरों और जरूरी सेवाओं को चलाने में मदद मिलेगी और नेपाल को सामान्य स्थिति में लौटने की कोशिशों में सहारा मिलेगा.