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‘टैक्स पेयर्स के पैसों की खुली लूट’ नेशनल हेराल्ड को कांग्रेस सरकार से झोली भर विज्ञापन मिले! BJP ने मांगा जवाब

सरकारी रिपोर्ट में दावा किया गया है कि नेशनल हेराल्ड अखबार को कर्नाटक सरकार ने किसी भी दूसरे राष्ट्रीय दैनिक समाचार के मुकाबले सबसे ज्यादा विज्ञापन दिए हैं.

कांग्रेस पार्टी के अखबार को कांग्रेस शासित राज्य से ही भर-भर के विज्ञापन मिल रहे हैं. बात हो रही है नेशनल हेराल्ड (National Herald) समाचार पत्र की. जिसको कर्नाटक की सिद्धारमैया सरकार से कथित तौर पर ढेरों विज्ञापन दिए हैं. जबकि कर्नाटक में इस अखबार का सर्कुलेशन लगभग जीरो है. फिर भी एड के जरिए कांग्रेस के खाते में फंड पहुंचाया गया है. 

सरकारी रिपोर्ट में दावा किया गया है कि नेशनल हेराल्ड अखबार को कर्नाटक सरकार ने किसी भी दूसरे राष्ट्रीय दैनिक समाचार के मुकाबले सबसे ज्यादा विज्ञापन दिए हैं. सिद्धारमैया सरकार ने अपने बजट का भारी हिस्सा हेराल्ड को विज्ञापन देने में खर्च कर दिया. रिपोर्ट्स के दावा किया गया है कि, लगातार दो सालों में कर्नाटक में नेशनल अखबारों के विज्ञापन खर्च में सरकार ने सबसे ज्यादा पैसा नेशनल हेराल्ड को दिया. जबकि इस पेपर की पहुंच बेहद कम पाठकों तक है और कर्नाटक में तो लगभग-लगभग न के बराबर है. 

रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2023-24 में नेशनल हेराल्ड को कर्नाटक सरकार से 1 करोड़ 90 लाख का विज्ञापन मिला.  साल 2024-25 में कर्नाटक सरकार से अखबारों में विज्ञापन पर कुल 1 करोड़ 42 लाख खर्च किया जिसका करीब 69 फीसदी हिस्सा नेशनल हेराल्ड को गया. 

BJP ने बनाया मुद्दा, सिद्धारमैया सरकार पर वार 

कर्नाटक सरकार पर आई इस रिपोर्ट के बाद BJP ने इसे खुली लूट करार दिया. कर्नाटक BJP के वरिष्ठ नेता डॉ. सीएन अश्वथ नारायण ने इसे ‘करदाताओं के पैसे की खुली लूट’ करार दिया. उन्होंने सवाल उठाया कि जिस अखबार की राज्य में कोई खास पाठक संख्या नहीं है, उसे सरकारी विज्ञापन क्यों दिए जा रहे हैं.? 

आरोपों पर प्रियांक खरगे ने दिया जवाब 

BJP के सवालों पर कर्नाटक में मंत्री प्रियांक खरगे ने जवाब दिया. उन्होंने कहा, BJP को नेशनल हेराल्ड की बजाय RSS मैगजीन ऑर्गनाइजर की फंडिंग के बारे में सोचना चाहिए. वहीं, कर्नाटक के पर्यावरण मंत्री ने भी विज्ञापन के दावों पर पलटवार किया. उन्होंने कहा, ‘नेशनल हेराल्ड को विज्ञापन देने में क्या गलत है?’ उन्होंने यह भी कहा कि इस मुद्दे पर सवाल उठाना ‘राष्ट्र-विरोधी’ मानसिकता को दर्शाता है. हालांकि लोग इस मामले को सरकारी पैसों के दुरुपयोग और नीजि इस्तेमाल के लिए खर्च करने का आरोप लगा रहे हैं. 

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