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मुस्लिम लेडी 'जेलर' ने हिंदू 'कैदी' से रचाई शादी...बजरंग दल ने किया कन्यादान, जानिए आखिर कौन हैं फिरोजा खान?

MPJailer And Prisoner Marriage: इस कहानी के दो मुख्य किरदार हैं - धर्मेंद्र सिंह और फिरोजा खातून. धर्मेंद्र हत्या के मामले में उमकैद काट रहा था, जबकि फिरोजा खातून उसी जेल में महिला अधिकारी के रूप में तैनात थीं. दोनों की दुनिया अलग थीं , लेकिन वक्त के साथ उनके बीच ऐसा रिश्ता बना..

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08 May 2026
( Updated: 08 May 2026
12:59 PM )
मुस्लिम लेडी 'जेलर' ने हिंदू 'कैदी' से रचाई शादी...बजरंग दल ने किया कन्यादान, जानिए आखिर कौन हैं फिरोजा खान?
Image Source: Twitter - Firoja Khatoon and Dharmendr
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MP Jailer And Prisoner Marriage: जेल एक ऐसी जगह जहाँ लोग अपने किए हुए कर्मों की सजा काटते हैं. हर सुबह गिनती से शुरू होती हैं और हर रात सन्नाटे में खत्म. लेकिन मध्य प्रदेश के सतना सेंट्रल जेल में एक ऐसी कहानी पनप रही थी... जिसकी कल्पना किसी ने भी नहीं की थी. यह कोई फ़िल्मी कहानी जैसी लगती थी. इस कहानी के दो मुख्य किरदार हैं - धर्मेंद्र सिंह और फिरोजा खातून. धर्मेंद्र हत्या के मामले में उमकैद काट रहा था, जबकि फिरोजा खातून उसी जेल में महिला अधिकारी के रूप में तैनात थीं. दोनों की दुनिया अलग थीं , लेकिन वक्त के साथ उनके बीच ऐसा रिश्ता बना, जिसने धर्म, समाज और जेल की ऊंची दीवारों को भी पीछे छोड़ दिया, अब यह प्रेम कहानी पूरे इलाके में चर्चा का विषय बन चुकी हैं. 

धर्मेंद्र सिंह - एक अपराधी से बदलते इंसान की कहानी
धर्मेंद्र सिंह छतरपुर जिले के चंदला इलाके के रहने वाले हैं. साल 2007 में उन्हें एक पार्षद की हत्या और शव दफनाने के मामले में गिरफ्तार किया गया था. अदालत ने उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई और उनकी जिंदगी जेल की चारदीवारी में कैद हो गई. शुरुआती साल उनके लिए बेहद मुश्किल भरे रहे.
लेकिन समय के साथ धर्मेंद्र का व्यवहार बदलने लगा. जेल प्रशासन के अनुसार, वह अनुशासित रहने लगे और अच्छे आचरण के कारण उन्हें जेल में कुछ जिम्मेदारियां भी दी गईं. वह वारंट और अन्य प्रशासनिक कामों में अधिकारियों की मदद करने लगे. इसी दौरान उनकी मुलाकात जेल की महिला अधिकारी फिरोजा खातून से हुई.

पहली मुलाकात - अधिकारी और कैदी के बीच

फिरोजा खातून सतना सेंट्रल जेल में असिस्टेंट सुपरिंटेंडेंट के पद पर तैनात थीं. उनकी सख्त अनुशासन और जिम्मेदारी के लिए सभी जानते थे. वारंट से जुड़े काम के दौरान धर्मेंद्र और फिरोजा की बातचीत बढ़ने लगी. शुरू में यह केवल अधिकारी और कैदी का रिश्ता था, लेकिन धीरे-धीरे यह दोस्ती में बदल गई.
फिरोजा ने धर्मेंद्र में वह इंसान देखा जो अपने अतीत से बाहर निकलकर नई जिंदगी की शुरुआत करना चाहता था. वहीं धर्मेंद्र ने पहली बार महसूस किया कि कोई उसे अपराधी नहीं, बल्कि इंसान की तरह समझ रहा है.

जेल की दीवारों में पनपा प्यार

जेल में हर किसी की नजरें रहती हैं. कोई रिश्ता आसानी से छिप नहीं सकता. लेकिन दोनों ने अपने रिश्ते को निजी रखा. बातचीत धीरे-धीरे गहरी होती गई और दोस्ती प्यार में बदल गई. जेल के कई कर्मचारी जानते थे कि दोनों के बीच कुछ खास है, लेकिन किसी ने भी सोचा नहीं था कि यह रिश्ता एक दिन शादी तक पहुँच जाएगा.

14 साल बाद बाहर आया धर्मेंद्र

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करीब 14 साल जेल में बिताने के बाद धर्मेंद्र सिंह को अच्छे आचरण के आधार पर रिहा कर दिया गया. जेल से बाहर निकलते समय उनके मन में कई सवाल जरूर थे – क्या जेल में शुरू हुआ यह रिश्ता बाहर की दुनिया में टिक पाएगा? लेकिन ऐसा हुआ. दोनों ने लगातार संपर्क बनाए रखा और चार साल बाद तय किया कि अब अपने रिश्ते को एक नाम देंगे.

समाज की परवाह और नाम बदलकर शादी

शादी की सबसे रोचक बात यह थी कि धर्मेंद्र ने शादी कार्ड में अपना नाम बदलवा दिया. वह नहीं चाहते थे कि शादी से पहले लोग उनकी असली पहचान जान लें. 5 मई को लवकुश नगर में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच दोनों ने सात फेरे लिए.
जैसे ही लोगों को पता चला कि दूल्हा वही व्यक्ति है जो कभी हत्या के मामले में जेल में था और दुल्हन जेल विभाग की अधिकारी हैं, तो यह खबर आग की तरह फैल गई. शादी में फिरोजा खातून का परिवार शामिल नहीं हुआ, लेकिन फिरोजा अपने फैसले पर अडिग रहीं. शादी में सबसे भावुक पल तब आया जब विश्व हिंदू परिषद के जिला उपाध्यक्ष और उनकी पत्नी ने कन्यादान किया.

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धर्म की दीवारें भी टूटीं, कन्यादान की अनोखी दास्तान

इस अनोखी प्रेम कहानी में धर्म और सामाजिक बंधनों की दीवारें भी टूटती नजर आईं. बताया जा रहा है कि फिरोजा खातून का परिवार, जो मुस्लिम था, इस रिश्ते से खुश नहीं था और उन्होंने शादी में हिस्सा नहीं लिया. लेकिन इस बीच एक भावुक और यादगार पल देखने को मिला...सतना विश्व हिंदू परिषद के जिला उपाध्यक्ष राजबहादुर मिश्रा ने अपनी पत्नी के साथ मिलकर फिरोजा का कन्यादान किया और उसे धर्मेंद्र के हाथों सौंप दिया. उन्होंने उसे अपनी बेटी मानकर यह रस्म निभाई . शादी के मौके पर बजरंग दल के लोग भी उपस्थित रहे और नवविवाहित जोड़े के लिए आशीर्वाद दिए..
यह प्रेम कहानी हर किसी को हैरान कर रही है. सतना सेंट्रल जेल के अधिकारी, कर्मचारी और कैदी भी नवविवाहित जोड़े के लिए अपनी शुभकामनाएं दे रहे हैं. इस शादी ने एक बार फिर यह साबित किया कि सच्चा प्यार सामाजिक और धार्मिक बंधनों से कहीं ऊपर होता है.

सोशल मीडिया और लोगों की प्रतिक्रियाएँ

जैसे ही यह कहानी सामने आई, सोशल मीडिया पर लोगों ने इसे लेकर अपनी प्रतिक्रियाएँ दीं. किसी ने इसे रियल लाइफ जेल लव स्टोरी कहा, तो किसी ने इसे इंसान के बदलने की मिसाल बताया. कई लोगों ने कहा कि अगर कोई व्यक्ति अपनी गलती के बाद बदल जाता है, तो उसे दूसरा मौका मिलना चाहिए..कुछ लोग इस रिश्ते पर सवाल भी उठा रहे हैं, लेकिन फिरोजा और धर्मेंद्र ने साफ कर दिया कि यह निर्णय पूरी समझदारी और अपनी मर्जी से लिया गया.

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सतना सेंट्रल जेल में यह रिश्ता लंबे समय से चर्चा में था. धर्मेंद्र का व्यवहार जेल प्रशासन के लिए हमेशा एक उदाहरण रहा. अनुशासन और बदलते व्यवहार की वजह से उन्हें अच्छे आचरण का लाभ मिला. आज धर्मेंद्र और फिरोजा पति-पत्नी हैं.

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