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दक्षिण बस्तर में बड़ी सफलता: माओवादी कमांडर पापा राव सहित 17 नक्सली हुए आत्मसमर्पण
पापा राव पर 45 से अधिक मामले दर्ज थे, जिनमें ताडमेटला हमला जैसे बड़े नक्सली हमले भी शामिल हैं. उनके सिर पर 25 लाख रुपए का इनाम घोषित था. सुरक्षा बलों के लगातार दबाव, विकास कार्यों और सख्त अभियानों ने नक्सलियों के मनोबल को तोड़ दिया है.
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छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित बस्तर क्षेत्र में सुरक्षा बलों को एक बड़ी सफलता मिली है. दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी के सदस्य और लंबे समय से सक्रिय माओवादी कमांडर पापा राव (उर्फ सुन्नम चंद्रैया/मंगू) ने अपने 17 साथियों के साथ आज आत्मसमर्पण कर दिया.
माओवादी कमांडर पापा राव ने किया समर्पण
पापा राव ने कुटरू पुलिस स्टेशन (बीजापुर जिला) में हथियारों के साथ समर्पण किया. उनके साथ 10 पुरुष और 8 महिला नक्सली शामिल थे. समर्पण के दौरान उनके कब्जे से आठ एके-47 राइफलें, एक एसएलआर और एक इंसास राइफल बरामद की गई. बाद में उन्हें जगदलपुर ले जाया गया.
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आत्मसमर्पण के बाद पापा राव ने कहा, "पुलिस द्वारा चलाए गए ऑपरेशन कगार और अंदरूनी इलाकों में लगातार पुलिस कैंप खुलने से माओवादी संगठन काफी कमजोर पड़ गया है. अलग-अलग मुठभेड़ों में शीर्ष नेताओं के मारे जाने और कई साथियों के समर्पण के बाद हमने भी यह फैसला लिया. अब हम भारत के संविधान को मानकर आम जिंदगी जीना चाहते हैं."
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पापा राव ने अन्य सक्रिय नक्सलियों से की अपील
उन्होंने आगे कहा कि जनता के हितों की लड़ाई अब बंदूक छोड़कर जारी रहेगी. पापा राव ने अन्य सक्रिय नक्सलियों से अपील की कि वे भी हथियार त्यागकर सरकार के सामने आत्मसमर्पण करें और भारत के संविधान की नीतियों को मानकर जनता की सेवा करें.
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छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने इस समर्पण को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि पापा राव के साथ अब दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी में कोई सक्रिय सदस्य नहीं बचा है. उन्होंने दावा किया कि 31 मार्च 2026 से पहले बस्तर को पूरी तरह नक्सल मुक्त घोषित कर दिया जाएगा.
पापा राव पर 45 से अधिक मामले थे दर्ज
पापा राव पर 45 से अधिक मामले दर्ज थे, जिनमें ताडमेटला हमला जैसे बड़े नक्सली हमले भी शामिल हैं. उनके सिर पर 25 लाख रुपए का इनाम घोषित था. सुरक्षा बलों के लगातार दबाव, विकास कार्यों और सख्त अभियानों ने नक्सलियों के मनोबल को तोड़ दिया है.
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पुलिस अधिकारियों ने बताया कि पापा राव के समर्पण से दक्षिण बस्तर क्षेत्र अब पूरी तरह कमजोर हो गया है. यह छत्तीसगढ़ सरकार की ‘नक्सल मुक्त छत्तीसगढ़’ की दिशा में एक बड़ा कदम है.
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