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ट्विशा शर्मा केस में बड़ी कार्रवाई, CBI ने पूर्व जिला जज गिरिबाला सिंह को किया गिरफ्तार

हाई प्रोफाइल ट्विशा शर्मा मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो यानी सीबीआई ने गुरुवार को पूर्व जिला न्यायाधीश गिरिबाला सिंह को भोपाल स्थित उनके घर से गिरफ्तार कर लिया.

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28 May 2026
( Updated: 28 May 2026
06:55 PM )
ट्विशा शर्मा केस में बड़ी कार्रवाई, CBI ने पूर्व जिला जज गिरिबाला सिंह को किया गिरफ्तार
Image Credits: IANS file photo
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हाई प्रोफाइल ट्विशा शर्मा मामले में गुरुवार को केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने पूर्व जिला न्यायाधीश गिरिबाला सिंह को भोपाल स्थित उनके घर से गिरफ्तार कर लिया. गिरिबाला सिंह पर अपनी बहू ट्विशा शर्मा को दहेज के लिए प्रताड़ित करने और कथित रूप से आत्महत्या के लिए मजबूर करने के आरोप हैं. 

हाई प्रोफाइल ट्विशा शर्मा केस में बड़ी कार्रवाई

सीबीआई की टीम भारी पुलिस बल के साथ सुबह भोपाल के कटारा हिल्स इलाके स्थित गिरिबाला सिंह के घर पहुंची. कार्रवाई के दौरान स्थानीय पुलिस ने पूरे इलाके में बैरिकेडिंग कर दी और लोगों की आवाजाही पर रोक लगा दी.

जानकारी के मुताबिक, सीबीआई टीम सुबह करीब 10:30 बजे गिरिबाला सिंह के घर पहुंची और उनसे पांच घंटे से ज्यादा समय तक पूछताछ की. इसके बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया. एजेंसी अब उनका मेडिकल परीक्षण कराने की तैयारी कर रही है. मौके पर मौजूद बाग सेवनिया थाना प्रभारी अमित सोनी ने बताया कि गिरिबाला सिंह को गुरुवार को ही अदालत में पेश किया जाएगा.

हाई कोर्ट से अग्रिम जमानत रद्द होने के बाद गिरफ्तारी

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यह गिरफ्तारी मध्य प्रदेश हाई कोर्ट द्वारा गिरिबाला सिंह की अग्रिम जमानत रद्द किए जाने के एक दिन बाद हुई है.

द्विशा शर्मा की शादी 9 दिसंबर 2025 को गिरिबाला सिंह के बेटे समर्थ सिंह से हुई थी. शादी के महज पांच महीने बाद, 12 मई को द्विशा अपने ससुराल में मृत पाई गई थीं. इसके बाद मामला दहेज उत्पीड़न और संदिग्ध आत्महत्या के आरोपों के चलते सुर्खियों में आ गया था.

घटना के दो दिन बाद गिरिबाला सिंह ने भोपाल की सत्र अदालत में अग्रिम जमानत की याचिका दायर की थी. 10वें अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ने 15 मई को उनकी उम्र और मृतका को पैसे ट्रांसफर किए जाने का हवाला देते हुए उन्हें अग्रिम जमानत दे दी थी.

व्हाट्सऐप चैट और परिवार के बयानों को कोर्ट ने माना अहम

हालांकि, बुधवार को अवकाशकालीन न्यायाधीश जस्टिस देव नारायण मिश्रा ने 17 पन्नों के आदेश में इस जमानत को रद्द कर दिया. हाई कोर्ट ने कहा कि निचली अदालत ने कई महत्वपूर्ण तथ्यों और सबूतों की ठीक से जांच नहीं की थी.

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अदालत ने अपने आदेश में कहा कि व्हाट्सऐप चैट और द्विशा के परिवार के बयानों से यह साफ होता है कि आरोप केवल पति समर्थ सिंह तक सीमित नहीं हैं. कोर्ट ने कहा, "व्हाट्सऐप चैट से भी यह नहीं कहा जा सकता कि आरोप सिर्फ समर्थ सिंह के खिलाफ हैं."

हाई कोर्ट ने यह भी कहा कि मामले में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 80(2), 85 और 3(5) के साथ-साथ दहेज निषेध अधिनियम की धारा 3 और 4 के तहत गंभीरता से जांच की जरूरत है.

परिवार ने प्रताड़ना और गर्भपात के दबाव का लगाया आरोप

परिवार का आरोप है कि गिरिबाला सिंह और उनके बेटे ने मिलकर ट्विशा को प्रताड़ित किया और उन पर गर्भपात कराने का दबाव बनाया. अदालत ने भी माना कि यह स्वीकार किया गया तथ्य है कि ट्विशा ने गर्भपात कराया था.

पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत की वजह फांसी बताई गई, लेकिन हाई कोर्ट ने यह भी नोट किया कि ट्विशा के शरीर पर छह से सात अतिरिक्त चोटों के निशान थे. इनमें बाएं हाथ, उंगली और सिर पर चोटें शामिल थीं. बाद की रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया कि ये चोटें शव को उतारने या अस्पताल ले जाने के दौरान नहीं लगी थीं.

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ट्विशा के पिता के वकील ने अदालत में दलील दी कि गिरिबाला सिंह साइबर फॉरेंसिक और क्राइम सीन मैनेजमेंट में प्रशिक्षित रिटायर्ड न्यायिक अधिकारी रही हैं, और संभव है कि उन्होंने अपने अनुभव का इस्तेमाल कर घटनास्थल के सबूतों से छेड़छाड़ की हो.

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