×
जिस पर देशकरता है भरोसा
Advertisement

डीके शिवकुमार के गद्दी संभालते ही कर्नाटक में उथल-पुथल, मंत्री रामलिंगा ने दिया इस्तीफा, क्या आरोप लगाए?

3 जून को पदभार संभालने वाले मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार के लिए इसे बड़ा झटका माना जा रहा है. यह घटनाक्रम विभागों के बंटवारे के एक दिन बाद सामने आया है.

Author
05 Jun 2026
( Updated: 05 Jun 2026
11:36 AM )
डीके शिवकुमार के गद्दी संभालते ही कर्नाटक में उथल-पुथल, मंत्री रामलिंगा ने दिया इस्तीफा, क्या आरोप लगाए?
Source- IANS
Advertisement

कर्नाटक में नई सरकार के मंत्रियों के बीच विभागों के बंटवारे के बाद सियासी घमासान शुरू हो गया है. जल संसाधन मंत्री रामलिंगा रेड्डी ने शुक्रवार को कर्नाटक मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे दिया. उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार बेंगलुरु शहरी क्षेत्र से जुड़े विभाग के आवंटन को लेकर किए गए अपने वादे से मुकर गए हैं.

3 जून को पदभार संभालने वाले मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार के लिए इसे बड़ा झटका माना जा रहा है. यह घटनाक्रम विभागों के आवंटन के एक दिन बाद सामने आया है. मुख्यमंत्री को भेजे अपने इस्तीफा पत्र में रेड्डी ने लिखा,

‘मुझे अपने मंत्रिमंडल में मंत्री पद का दायित्व सौंपने के लिए आपको और कांग्रेस पार्टी को धन्यवाद देता हूं. मैं अपनी अंतरात्मा के विरुद्ध कार्य करने में असमर्थ हूं, इसलिए मंत्री पद से इस्तीफा दे रहा हूं. कृपया मेरा इस्तीफा स्वीकार करने की कृपा करें. मैं विधायक और कांग्रेस पार्टी के एक कार्यकर्ता के रूप में कार्य करता रहूंगा.’

बेंगलुरु के कोरमंगला स्थित अपने कार्यालय से बातचीत करते हुए रेड्डी ने कहा कि साल 2023 में उन्हें पहले बेंगलुरु विकास विभाग दिए जाने की जानकारी दी गई थी, लेकिन बाद में परिवहन विभाग आवंटित कर दिया गया. उन्होंने आरोप लगाया कि जब उन्होंने इस पर असंतोष जताया तो तत्कालीन मुख्यमंत्री सिद्दारमैया और अन्य वरिष्ठ नेता इस विषय पर चर्चा में शामिल हुए.

Advertisement

मंत्री के विभाग के लिए भी ढाई साल का फॉर्मूला!

रामलिंगा रेड्डी ने दावा किया कि वर्तमान सरकार के गठन के दौरान उन्हें ढाई वर्ष बाद बेंगलुरु शहरी क्षेत्र से जुड़ा विभाग सौंपने का वादा किया गया था और इसी आश्वासन पर उन्हें व्यवस्था स्वीकार करने के लिए राजी किया गया. उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार और उनके भाई डीके सुरेश ने व्यक्तिगत रूप से उनके आवास पर जाकर उन्हें यह भरोसा दिलाया था कि वादा पूरा किया जाएगा.

उन्होंने कहा कि बार-बार आश्वासन मिलने के बावजूद अंततः उन्हें बेंगलुरु शहरी क्षेत्र से जुड़ा विभाग देने के बजाय जल संसाधन विभाग सौंप दिया गया. इसी कारण उन्होंने मंत्री पद से इस्तीफा देने का फैसला किया, हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि वह विधायक बने रहेंगे और कांग्रेस पार्टी में भी बने रहेंगे. रामलिंगा रेड्डी कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हैं. उनकी राजनीतिक यात्रा साल 1973 में NSUI से एक छात्र नेता के रूप में शुरू हुई थी. तब से वह पांच दशक से ज्यादा समय से पार्टी की सेवा कर रहे हैं.

रेड्डी का कहना है कि उन्होंने कहा कि वह नौ बार विधानसभा चुनाव लड़ चुके हैं. जयनगर और बीटीएम लेआउट समेत बेंगलुरु के विभिन्न निर्वाचन क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं. अपने राजनीतिक और प्रशासनिक अनुभव का जिक्र करते हुए रेड्डी ने कहा कि उन्होंने वीरप्पा मोइली, एस.एम. कृष्णा, धर्म सिंह और सिद्दारमैया के मंत्रिमंडलों में मंत्री के रूप में कार्य किया है. कभी किसी मुख्यमंत्री से कोई विशेष विभाग नहीं मांगा. उन्होंने अपने कार्यालय में पार्टी कार्यकर्ताओं की मौजूदगी में इस्तीफे के पत्र पर हस्ताक्षर किए.

कार्यकर्ताओं में नाराजगी

Advertisement

यह भी पढ़ें

रामलिंगा रेड्डी के इस कदम से पार्टी कार्यकर्ताओं में नाराजगी है. उन्होंने रेड्डी से इस्तीफे पर फिर से विचार करने की अपील की है. केपीसीसी अध्यक्ष बी.के. हरिप्रसाद इस मुद्दे पर उनसे बात कर रहे हैं. इस पर रेड्डी ने कथित तौर पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए उन्हें हस्तक्षेप नहीं करने को कहा और इस्तीफे की प्रक्रिया आगे बढ़ाई.

Tags

Advertisement
टिप्पणियाँ 0
G
Guest (अतिथि)
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
अधिक
Advertisement
Advertisement
शॉर्ट्स
वेब स्टोरीज़
होम वीडियो खोजें