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भारत में कट्टरपंथ भड़काने के लिए ISIS का खौफनाक टेरर प्लान! मोहरा बनीं महिलाएं, क्या है खतरनाक खवातीन मॉडल?
हैदराबाद से गिरफ्तार की गई एक संदिग्ध आतंकी सईदा बेगम से पूछताछ में बड़ा खुलासा हुआ है. महिलाओं का एक ऐसा नेटवर्क तैयार किया जाना था, जिन पर देश में कट्टरपंथ को कायम करना था.
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ISIS Terror Module: देश में जिहाद की शाखाएं फैलाने के लिए आतंकी नेटवर्क अलग-अलग तरीके अपना रहे हैं, इस बार पाकिस्तानी हैंडलर्स अपने ग्रुप में युवा या व्हाइट कॉलर आतंकी नहीं बल्कि खवातीनों को जोड़ने की फिराक में था, यानी वे महिलाओं का ऐसा ग्रुप बनाना चाहते थे जो दहशतर्ग और कट्टरपंथ का इरादा रखते हुए देश को दहलाने की मंशा रखती हैं.
देशभर में अलग-अलग जगहों से 12 संदिग्धों की गिरफ्तारी के बाद सुरक्षा एजेंसियों के हाथ बड़ा इनपुट लगा है. पूछताछ में सामने आया है कि पाकिस्तानी हैंडलर 'खवातीन' नाम का ग्रुप खड़ा कर रहे थे. हैदराबाद से गिरफ्तार की गई एक संदिग्ध आतंकी सईदा बेगम से पूछताछ में बड़ा खुलासा हुआ है.
इन देशों के आतंकियों से जुड़े थे तार
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पाकिस्तानी हैंडलर्स के इस 'खवातीन' ग्रुप के जरिए युवाओं को स्नाइपर राइफल और IED की ट्रेनिंग देने की प्लानिंग कर रहे थे. इसे मोहम्मद रहमतुल्लाह शरीफ और उसके सहयोगी लीड कर रहे थे. इन सभी पर अलग अलग देशों में ISIS के गुर्गे रखने का आरोप है. इनके तार पाकिस्तान, अफगानिस्तान, सीरिया, बांग्लादेश और संयुक्त अरब अमीरात में ISIS से जुड़े थे थे.
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ये नेटवर्क नया ग्रुप खवातीन बनाने वाला था, जिसकी कमान और संचालन का जिम्मा महिलाओं के हाथ में होता. ग्रुप के विस्तार के लिए बड़े पैमाने पर महिलाओं की भर्ती भी की जाने की तैयारी हो चुकी थी.
आंध्र प्रदेश पुलिस ने क्या बताया?
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पुलिस के मुताबिक, यह नेटवर्क सोशल मीडिया के जरिए अपना जाल फैला रहा था. जिसमें जिहादी विचार और कट्टरपंथ को बढ़ावा दिया जा रहा था. इन ग्रुप्स में अल कायदा के आतंकी ओसामा बिन लादेन और अन्य आतंकियों के वीडियो शेयर किए जाते थे. वहीं, मुस्लिम युवाओं की भर्ती करने के लिए 40 से ज्यादा इंस्टाग्राम अकाउंट और ऑनलाइन चैट ग्रुप एक्टिव थे. इन ग्रुप्स में सदस्यों की एक फोटो भी पोस्ट की गई थी. जिसमें कई युवक ISIS के काले झंडे के साथ ‘एक उम्माह’ का नारा लगाते हुए तस्वीरें पोस्ट कीं. जो इस्लामी कट्टरपंथ के समर्थन को दर्शा रहा था. इस पोस्ट के साथ दावा किया गया था कि भारत में उनका मकसद इस्लमी शासन कायम करना था.
जांच में सामने आया कि नेटवर्क का मकसद युवाओं को आतंकवादी प्रशिक्षण के लिए तैयार भी करना था. उन्हें अफगानिस्तान भेजकर आतंकी आकाओं से ट्रेनिंग दी जानी थी. साथ ही वहां जिहादी प्रशिक्षण भी दिया जाना था. साथ ही पाकिस्तान और अफगानिस्तान से हथियार भी उपलब्ध करवाए जाने थे. बताया जा रहा है कि पाकिस्तान के आतंकियों से इनका सीधा क़ॉन्टेक्ट था.
आंध्र प्रदेश पुलिस के मुताबिक, आरोपियों का पाकिस्तान, बांग्लादेश, संयुक्त अरब अमीरात और अफगानिस्तान के जिन ऑपरेटर्स से कनेक्शन था, इनमें अल-हाकिम शकूर, मोहम्मद हुजैफा, निंजा, हेमरोक्सी, अबू मुहरिब, अबू बलूशी और अन्य के रूप में हुई है.
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दरअसल, आंध्र प्रदेश पुलिस की काउंटर-इंटेलिजेंस सेल और विजयवाड़ा पुलिस ने 6 राज्यों से 12 लोगों को अरेस्ट किया था. पहली गिरफ्तारी में मोहम्मद रहमतुल्लाह शरीफ, मोहम्मद दानिश और मिर्जा सोहेल बेग को विजयवाड़ा के विंचीपेटा इलाके से पकड़ा गया था. बाद में इनसे पूछताछ और जांच में हैदराबाद, कर्नाटक, दिल्ली, राजस्थान, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल और बिहार से भी 9 और आरोपियों को अरेस्ट किया गया. फिलहाल सुरक्षा एजेंसियां इस नेटवर्क के विदेशी कनेक्शन, फंडिंग, और सोशल मीडिया ग्रुप्स की गहनता से पड़ताल कर रही है.