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'बैलेट से भी हुए चुनाव में कितनी सीटें जीती कांग्रेस?', चार बड़े राज्यों में MLC चुनाव के नतीजों पर PM मोदी का तंज
पीएम मोदी ने MLC चुनावों में NDA की जीत और कांग्रेस के निराशाजनक प्रदर्शन पर निशाना साधा. उन्होंने पूछा कि बैलेट पेपर से हुए चुनाव में भी कांग्रेस ने कितनी सीटें जीतीं? अंदाजा लगाइए.
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PM मोदी ने विभिन्न राज्यों में हुए MLC चुनावों में नतीजों में कांग्रेस की करारी हार पर तगड़ा तंज कसा है. उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर तंजिया लहजे में कांग्रेस पार्टी पर निशाना साधा और लिखा कि 4 बड़े राज्यों-उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, बिहार और कर्नाटक-में 28 सीटों पर MLC चुनाव हुए. ये चुनाव बैलेट पेपर के ज़रिए कराए गए. अंदाज़ा लगाइए कि कांग्रेस ने कितनी सीटें जीतीं? 🧐
प्रधानमंत्री ने अपने पोस्ट में इसके साथ ही संदेह और शंका वाली इमोजी भी टेक्स्ट के साथ लगाई है. आपको बता दें कि पीएम मोदी का इशारा सीधे-सीधे कांग्रेस के EVM के खिलाफ कैंपेन और अपनी हार का ठीकरा कथित तौर पर EVM पर फोड़ने की ओर था.
बैलेट पेपर से हुए एमएलसी चुनाव में कांग्रेस का निराशाजनक प्रदर्शन
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प्रधानमंत्री मोदी का यह तंज विपक्ष की उस मांग को लेकर है, जिसमें वो ईवीएम में धांधली और बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग करता है. बता दें कि 2026 के एमएलसी चुनावों के नतीजे बिहार, उत्तर प्रदेश, कर्नाटक और महाराष्ट्र, चार राज्यों की 28 सीटों के लिए घोषित किए जा चुके हैं.
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कर्नाटक में कांग्रेस की ही सरकार, फिर भी हो गया सफाया!
कांग्रेस तीन राज्यों में एक भी सीट नहीं जीत पाई है और महाराष्ट्र में भी उसका सफाया हो चुका है. सत्ताधारी महायुति गठबंधन और विपक्षी महा विकास अघाड़ी (एमवीए) के बीच कड़ी टक्कर रही, लेकिन वहां भी कांग्रेस की स्थिति नाजुक नजर आई.
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कर्नाटक की चारों सीटें बीजेपी और जेडीएस गठबंधन ने जीतीं, जबकि यूपी में बीजेपी को चार और सपा को दो सीटें मिलीं. एमएलसी चुनावों में सत्ताधारी कांग्रेस एक भी सीट नहीं जीत पाई, जबकि भाजपा ने तीन और जनता दल (सेक्युलर) ने एक सीट जीती. भाजपा ने उत्तर-पूर्व शिक्षक, दक्षिण-पूर्व स्नातक और पश्चिम स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों में जीत हासिल की. उसकी सहयोगी पार्टी जेडी (एस) ने बेंगलुरु शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र जीता.
यूपी में बीजेपी आगे, लेकिन कांटे की टक्कर!
वहीं यूपी में उत्तर प्रदेश की 11 सीटों पर मुकाबला मुख्य रूप से बीजेपी और समाजवादी पार्टी के बीच रहा.बीजेपी ने चार सीटें और सपा ने दो सीटें जीती हैं. अन्य बची सीटों पर गिनती अभी जारी है.
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इससे पहले बीजेपी के सांसद और प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने भी एमएलसी चुनाव में हार को लेकर कांग्रेस सांसद राहुल गांधी पर जोरदार निशाना साधा. उन्होंने चुनाव में कांग्रेस के प्रदर्शन पर सवाल उठाते हुए कहा कि राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी ने भारतीय चुनाव प्रक्रिया को लेकर झूठे आरोपों का जो माहौल बनाया था, उनकी अराजकता फैलाने की उम्मीदें चुनाव परिणामों के साथ ही चकनाचूर हो गई हैं.
एमएलसी चुनावों के नतीजों के बाद कांग्रेस पर हमलावर बीजेपी
त्रिवेदी ने कहा कि भारत की चुनावी प्रक्रिया को लेकर झूठे दावों का बतंगड़ बनाने के बजाय कांग्रेस को जनता के बीच जाकर मेहनत करनी चाहिए. उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी ने चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठाकर देश में भ्रम और अस्थिरता पैदा करने की कोशिश की है, लेकिन एमएलसी चुनावों के नतीजों ने कांग्रेस की राजनीतिक स्थिति स्पष्ट कर दी है.
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राहुल गांधी की अराजकता फैलाने की उम्मीदों को चकनाचूर : सुधांशु त्रिवेदी
भाजपा सांसद ने कहा कि संदेश साफ है कि कांग्रेस पार्टी इन एमएलसी चुनावों में अपनी मौजूदगी दर्ज कराने में नाकाम रही है. सबसे अहम बात यह है कि ये चुनाव बैलेट बॉक्स और बैलेट पेपर के जरिए कराए गए थे, फिर भी कांग्रेस अपना प्रभाव नहीं दिखा पाई. अगर कांग्रेस नेताओं की भाषा में कहें तो पार्टी अपना अस्तित्व तक महसूस कराने में विफल रही है. इससे साफ होता है कि कांग्रेस के पास किसी भी चुनाव में जनता और मतदाताओं का समर्थन हासिल करने की क्षमता नहीं है, चाहे चुनाव ईवीएम से हों या बैलेट पेपर से.
'दो सप्ताह तक मौज-मस्ती और सैर-सपाटा करने के बाद वापस लौटे हैं'
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उन्होंने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि वह करीब दो सप्ताह तक मौज-मस्ती और सैर-सपाटा करने के बाद वापस लौटे हैं और अब ऐसे आंदोलन की बात कर रहे हैं, जिससे भारतीय अर्थव्यवस्था के सामने मुश्किलें खड़ी हो सकती हैं. उन्हें समझना चाहिए कि न तो जनता और न ही विधायक उनके साथ हैं. जनता का समर्थन कड़ी मेहनत से मिलता है, न कि सैर-सपाटे और मौज-मस्ती से.
'कांग्रेस को कामचोरी की आदत छोड़ देनी चाहिए'
सुधांशु त्रिवेदी ने भाजपा नेताओं का जिक्र करते हुए कहा कि हमारी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन उत्तर प्रदेश के दौरे पर हैं, जबकि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पंजाब में सक्रिय हैं. दूसरी ओर, राहुल गांधी कथित तौर पर चंपा में घूम रहे थे. उन्होंने बताया कि चंपा वियतनाम का प्राचीन नाम है. इसके बावजूद राहुल गांधी जनता के समर्थन की उम्मीद कर रहे हैं. उन्होंने कांग्रेस पर तंज कसते हुए कहा कि पार्टी को कामचोरी की आदत छोड़ देनी चाहिए. ऐसा करने पर 'वोट चोरी' का नारा अपने आप खत्म हो जाएगा.
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भाजपा सांसद ने कहा कि कांग्रेस संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल उठाने और उन्हें निशाना बनाने के लिए झूठ का सहारा लेती है. अब केरल कांग्रेस को सुप्रीम कोर्ट के सामने अपने सोशल मीडिया पोस्ट के लिए माफी मांगनी पड़ी है. उन्होंने सवाल किया कि आखिर राहुल गांधी हंगामा खड़ा करने के बजाय मेहनत करना कब शुरू करेंगे. कांग्रेस को यह समझना चाहिए कि चुनाव में जनता का विश्वास हासिल करने के लिए जमीन पर काम करना जरूरी है.
MLC elections in 28 seats across 4 big states - Uttar Pradesh, Maharashtra, Bihar and Karnataka. Elections held using ballot papers. Guess how many seats Congress won? 🧐
— Narendra Modi (@narendramodi) ?ref_src=twsrc%5Etfw">October 28, 2026
बैलेट पेपर हो या ईवीएम, नतीजा एक जैसा: प्रह्लाद जोशी
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वहीं केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी ने बुधवार को विधान परिषद चुनावों में कांग्रेस के प्रदर्शन को लेकर पार्टी पर निशाना साधते हुए कहा कि बैलेट पेपर हो या ईवीएम, कांग्रेस के लिए नतीजा एक जैसा ही है. उन्होंने कहा कि देश के चार राज्यों में विधान परिषद की 28 सीटों पर हुए चुनाव में कांग्रेस एक भी सीट नहीं जीत सकी.
प्रह्लाद जोशी ने कहा कि कांग्रेस लगातार ‘वोट चोरी’ का आरोप लगाती है और लोकतांत्रिक संस्थाओं पर सवाल उठाती है. लेकिन जब चुनाव परिणाम उसके पक्ष में नहीं आते, तो वह व्यवस्था को दोष देने लगती है. उन्होंने खास तौर पर कर्नाटक का जिक्र किया, जहां कांग्रेस सत्ता में है. इसके बावजूद पार्टी को हार का सामना करना पड़ा और उसका एक मौजूदा विधान परिषद सदस्य भी अपनी सीट नहीं बचा सका.
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28 एमएलसी सीटों पर कांग्रेस का खाता नहीं खुलाः प्रह्लाद जोशी
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि कांग्रेस अक्सर चुनाव में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों को लेकर सवाल उठाती है. लेकिन इस बार बैलेट पेपर से मतदान होने के बावजूद पार्टी को जीत नहीं मिली. उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि बैलेट पेपर हो या ईवीएम, परिणाम वही रहा. गौरतलब है कि कर्नाटक में विधान परिषद की चार सीटों पर हुए चुनाव में भारतीय जनता पार्टी और जनता दल (सेक्युलर) गठबंधन ने सभी सीटों पर जीत दर्ज की.
इनमें बेंगलुरु शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र की वह सीट भी शामिल है, जिस पर पहले कांग्रेस के पुट्टन्ना का कब्जा था. जनता दल (सेक्युलर) के उम्मीदवार ए.पी. रंगनाथ ने पुट्टन्ना को 908 मतों से हराया है. प्रह्लाद जोशी ने कहा कि चुनाव में हार मिलने पर कांग्रेस व्यवस्था पर सवाल उठाती है, लेकिन बहाने बनाने से जनता के फैसले को छिपाया नहीं जा सकता.
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उन्होंने कहा कि चुनाव परिणामों ने कांग्रेस के आरोपों पर सवाल खड़े किए हैं. गौरतलब है कि इन चुनावों में स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों के मतदाता शामिल होते हैं. इन नतीजों को चारों राज्यों के समूचे मतदाताओं की राय नहीं माना जा सकता. फिर भी, 28 सीटों पर कांग्रेस का खाता नहीं खुलना पार्टी के लिए एक बड़ा राजनीतिक झटका है.
किन 4 बड़े राज्यों में चुनाव की बात कर रहे पीएम मोदी?
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इन चुनावों में उत्तर प्रदेश की 11, बिहार की 8, महाराष्ट्र की 5 और कर्नाटक की 4 विधान परिषद सीटें शामिल थीं. मतदान 23 अक्टूबर को हुआ था और वोटों की गिनती 27 अक्टूबर से शुरू हुई. ये चुनाव मुख्य रूप से शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों के लिए थे. यहां आम जनता वोट नहीं करती. इन सीटों पर संबंधित निर्वाचन क्षेत्रों के रजिस्टर्ड मतदाता ही मतदान करते हैं.