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‘ऐतिहासिक जीत…’ 12 साल का लंबा इंतजार खत्म, आंध्र प्रदेश को मिल गई नई राजधानी, सरकार ने जारी किया नोटिफिकेशन

साल 2015 में आंध्र प्रदेश में चंद्रबाबू नायडू की सरकार सत्ता में आई और अमरावती को राजधानी बनाने की नींव रखी. साल 2019 में जगनमोहन रेड्डी मुख्यमंत्री बने और तीन राजधानी बनाने का मॉडल रखा.

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आंध्र प्रदेश को जिसका 12 साल से इंतजार था वो ख्वाहिश आखिरकार आज पूरी हो गई. आंध्र प्रदेश को अपनी आधिकारिक राजधानी मिल गई. अमरावती अब आंध्र प्रदेश की कागजी और स्थाई राजधानी कहलाएगी. केंद्र सरकार ने इससे रिलेटेड नोटिफिकेशन जारी दिया है. 

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की मंजूरी के बाद अमरावती को राजधानी का दर्जा मिलने के बाद मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने खुशी जताई. उन्होंने इसे ऐतिहासिक जीत करार दिया. चंद्रबाबू नायडू ने इसके लिए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का आभार जताया और इसे जनता की लंबे समय से चली आ रही आकांक्षा की पूर्ति बताया. उन्होंने इस विधेयक को साकार करने में निरंतर समर्थन और मार्गदर्शन के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार को भी धन्यवाद दिया. 

अमरावती को राजधानी बनने में क्यों लग गए 12 साल? 

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दरअसल, 2 जून 2014 में आंध्र प्रदेश से अलग तेलंगाना राज्य बना. इसके बाद हैदराबाद तेलंगाना के हिस्से में चला गया, जबकि पहले हैदराबाद ही आंध्र प्रदेश की राजधानी थी, जो बाद में तेलंगाना की राजधानी बन गई. 

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साल 2015 में आंध्र प्रदेश में चंद्रबाबू नायडू की सरकार सत्ता में आई और अमरावती को राजधानी बनाने की नींव रखी. हालांकि साल 2019 YSRCP की जीत के बाद जगनमोहन रेड्डी मुख्यमंत्री बने और अमरावती को राजधानी बनाने वाले सभी प्रोजेक्ट रोक दिए और तीन राजधानी बनाने का मॉडल रखा. साल 2024 में TDP फिर सत्ता में आई और अमरावती को राजधानी बनाने की कवायद तेज कर दी. 

आंध्र प्रदेश की राजधानी कब से मानी जाएगी अमरावती?

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कानून मंत्रालय की ओर से जारी नोटिफिकेशन के मुताबिक, आंध्र प्रदेश पुनर्गठन (संशोधन) अधिनियम, 2026 को 2 जून 2024 से लागू माना जाएगा. इस संशोधन से 2014 के आंध्र प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम में बदलाव किया गया. अधिनियम के अनुसार, 'अमरावती' में आंध्र प्रदेश कैपिटल रीजन डेवलपमेंट अथॉरिटी अधिनियम, 2014 के तहत घोषित राजधानी क्षेत्र भी शामिल है.

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संसद ने 2 अप्रैल को अंतिम मंजूरी दी और अमरावती को आधिकारिक राजधानी घोषित किया. राजयसभा ने बिल को वॉइस वोट से पास किया, जबकि लोकसभा ने इसे एक दिन पहले मंजूरी दी. इसी के साथ तीन राजधानी का मॉडल हमेशा के लिए खत्म हो गया. संसद में बिल पर बहस के दौरान YSRCP ने इस पर समर्थन नहीं दिया. 
12 साल की जद्दोजहद आखिरकार खत्म हुई और अब आधिकारिक रूप से अमरावती आंध्र प्रदेश की राजधानी बन गई.

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