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फ्रांस की धरती पर हिंदुओं की धाक! पहला भव्य हिंदू मंदिर तैयार, कलश यात्रा के साथ होगा उद्घाटन

पेरिस की सड़कों पर सनातनी उद्घोष होगा, कलश यात्रा और भजनों की गूंज के बीच पहले हिंदू मंदिर का उद्घाटन होगा.

Image Source- IANS/Instagram/bapsparis/video grab
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जो काम ब्रिटेन नहीं कर पाया वो फ्रांस ने कर दिखाया. पेरिस में रहने वाले हिंदुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र भव्य BAPS मंदिर बनकर तैयार हो गया. सितंबर में इसके कपाट खुल जाएंगे और भक्त भगवान स्वामीनारायण के दर्शन कर सकेंगे. 

यहां ब्रिटेन का जिक्र इसलिए करना जरूरी हो गया क्योंकि हिंदुओं ने लंबी कानूनी लड़ाई लड़ी बावजूद इसके कुछ कट्टरपंथियों के आगे ब्रिटेन की सरकार झुक गई. जो जगह मंदिर की थी वो चर्च और मस्जिद के लिए दे दी गई. 

पेरिस में कब होगा ऐतिहासिक हिंदू मंदिर का उद्घाटन 

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पेरिस में 'बूसी-सेंट-जॉर्जेस' में भव्य BAPS स्वामीनारायण हिंदू मंदिर अब अपने ऐतिहासिक उद्घाटन के समीप पहुंच गया है. मंदिर के शिखरों और केंद्रीय गुंबद पर कलश और ध्वजा दंड पूजन जैसी पारंपरिक वैदिक रस्में पूरी की जा रही हैं. मंदिर परिसर में साधु-संतों और श्रद्धालुओं ने शांति, सद्भाव और जनकल्याण के लिए वैदिक मंत्रोच्चार और प्रार्थनाएं भी कर रहे हैं. कुछ ऐसे परिवार भी हैं जो अपने बच्चों और नाती-पोतों के साथ भव्य उत्सव के साक्षी बनेंगे. 

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BAPS की आधिकारिक साइट के अनुसार, इस मंदिर का उद्घाटन 2 से 14 सितंबर 2026 तक आयोजित होने वाले 13 दिवसीय ‘फेस्टिवल ऑफ कल्चर’ यानी ‘पेरिस मंदिर महोत्सव’ के दौरान किया जाएगा. यह आयोजन BAPS स्वामीनारायण हिंदू मंदिर के उद्घाटन को समर्पित होगा और इसमें दुनिया के विभिन्न हिस्सों से श्रद्धालु और शुभचिंतक शामिल होंगे. 

पेरिस की सड़कों पर निकलेगी कलश यात्रा

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महोत्सव के दौरान जल यात्रा, पेरिस में नगर यात्रा, बूसी-सेंट-जॉर्जेस में पालखी यात्रा, प्रतिदिन वैदिक महायज्ञ, मूर्ति-प्रतिष्ठा समारोह, समर्पण सभा और कीर्तन आराधना जैसे अनेक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे. 

BAPS के मुताबिक, पेरिस का यह मंदिर फ्रांस का पहला पारंपरिक हिंदू मंदिर है. इसका निर्माण बूसी-सेंट-जॉर्जेस स्थित एस्पलेनैड डेस रिलिजन्स एट डेस कल्चर्स में किया गया है. जहां विभिन्न धर्मों के उपासना स्थल मौजूद हैं. इस स्थान को धार्मिक विविधता और अंतरधार्मिक सद्भाव के प्रतीक के रूप में विकसित किया गया है. मंदिर की वास्तुकला में सदियों पुरानी भारतीय शिल्प परंपरा का इस्तेमाल किया गया है. मंदिर के पत्थरों को भारत में तराशकर तैयार किया गया और फिर उन्हें फ्रांस ले जाकर भारतीय शिल्पकारों और फ्रांसीसी विशेषज्ञों की मदद से मंदिर में स्थापित किया गया. 

इस मंदिर की नींव रखने का ऐतिहासिक समारोह सितंबर 2022 में हुआ था. इसके बाद जून 2024 में मंदिर की आधारभूत संरचना के निर्माण का महत्वपूर्ण चरण शुरू हुआ. 

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BAPS पेरिस की सोशल मीडिया पोस्ट में महंत स्वामी महाराज से लेकर वरिष्ठ संतों और दुनियाभर के श्रद्धालुओं के एक स्वर में ‘पेरिस मंदिर महोत्सव नी जय!’ के उद्घोष का उल्लेख किया गया है. इसका भाव मंदिर के उद्घाटन को लेकर सामूहिक उत्साह और आध्यात्मिक एकता से जुड़ा है. 

सनातनी संस्कृति से जुड़ रही फ्रांस की नई पीढ़ी 

इन पोस्ट्स में एक परिवार ऐसा भी है जिसकी तीन पीढ़ियां मिलकर सपना साकार होते एक साथ देखेंगी. पहली पीढ़ी 80 के दशक में पहुंची. गुजराती मूल के परिवार के मुताबिक वो दौर ऐसा था जब एक-दो ही हिंदू परिवार रहते थे. फिर दूसरी पीढ़ी ने वो सहा जो विदेशी जमीन पर अक्सर अनजाने लोगों के साथ होता है. लोगों को हिंदू धर्म के बारे में बताते थे तो वो हंसते थे या मजाक उड़ाते थे लेकिन अपने बड़ों से जो सीखा उसे छोड़ा नहीं.

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हिंदू संस्कृति, संस्कारों और अध्यात्म की मशाल तीसरी पीढ़ी तक पहुंची. ऐसी पीढ़ी जो फ्रेंच तो बोलती है लेकिन विशुद्ध हिंदू रंग में रंगी है. बच्चे बोलते हैं कि अपने बड़ों के साथ सत्संग में जाते थे, अपने धर्म को समझते थे. अब विश्वास नहीं हो रहा कि यहां भी हमारा मंदिर होगा, वाकई हम खुद को भाग्यवान मानते हैं. बच्चे खुश हैं, कहते हैं, ‘हमारे दोस्त, जब अपनी आंखों के सामने भव्य मंदिर बनते देख रहे हैं तो हमसे हमारे धर्म के बारे में जानने की कोशिश करते हैं और ये हमें बहुत अच्छा लगता है.’

फ्रांस में भरतीयों की धाक 

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मंदिर महोत्सव केवल धार्मिक आयोजन तक सीमित नहीं रहेगा. BAPS ने इसे भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिकता, कला और विभिन्न समुदायों के बीच सद्भाव को सामने लाने वाले वैश्विक सांस्कृतिक उत्सव के रूप में प्रस्तुत किया है. पेरिस जैसे वैश्विक सांस्कृतिक केंद्र में भारतीय पारंपरिक वास्तुकला और हिंदू आध्यात्मिक परंपरा का यह नया केंद्र निश्चित तौर पर भारतीय समुदाय के लिए विशेष महत्व रखता है. सितंबर में होने वाला मंदिर महोत्सव इस लंबे निर्माण सफर के समापन और एक नए अध्याय की शुरुआत का प्रतीक बनेगा. 

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ब्रिटेन में हिंदुओं से कैसे छीनी गई मंदिर की जमीन 

ब्रिटेन के कैम्ब्रिजशायर में बसे नए शहर नॉर्थस्टोव में रहने वाले हिंदू परिवारों को उस वक्त बड़ा झटका लगा था. जब यहां रहने वाले करीब 150 हिंदू परिवार कई सालों से अपने पहले मंदिर का सपना देख रहे थे. इसके लिए उन्होंने स्थानीय प्रशासन से जमीन भी मांगी थी, लेकिन काउंसिल ने वह जमीन हिंदू संगठन को देने के बजाय चर्च नेटवर्क को लीज पर दे दी. इस फैसले के बाद हिंदू समुदाय में काफी निराशा है. उनका कहना है कि उन्हें सिर्फ पूजा की जगह नहीं चाहिए थी, बल्कि ऐसा केंद्र बनाना चाहते थे जहां आने वाली पीढ़ियां अपनी संस्कृति, परंपराओं और त्योहारों से जुड़ी रह सकें. जिस प्रस्ताव को मंजूरी मिली थी, उसमें नॉर्थस्टोव के मुस्लिम समुदाय को भी अहम जगह दी गई थी, लेकिन हिंदुओं को मंदिर के लिए जगह नहीं मिली. बकायदा हिंदू समाज ने इसके लिए लंबी कानूनी लड़ाई लड़ी लेकिन निराशा ही हाथ लगी. हिंदू समुदाय का कहना है कि पूरे इलाके में चर्च और मस्जिदें तो मौजूद हैं, लेकिन एक भी हिंदू मंदिर नहीं है. पूजा या धार्मिक कार्यक्रमों के लिए उन्हें कई बार घंटों का सफर तय करना पड़ता है. 

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