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बांग्लादेश से आईं महंत चिन्मय दास की रूला देने वालीं तस्वीरें, UN तक उठा हिंदुओं की सुरक्षा का मुद्दा, Video
महंत चिन्मय दास को मां के अंतिम संस्कार के लिए भी पूरे दिन परोल नहीं मिली. इसके बाद कई संस्थाओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं और लोगों ने इसका कड़ा विरोध किया.
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दबीं चीखें, भींचे होंठ और आंसुओं से भरी आंखें… बांग्लादेश में बेबुनियाद आरोपों में जेल में बंद इस्कॉन के संत चिन्मय दास की तस्वीरों और वीडियोज ने हर किसी को झकझोर दिया. अपनी मां की मौत के बाद वह महज पांच घंटे के लिए जेल से बाहर आए. बेरहम सरकार ने उन्हें मां की चिता को अग्नि तक नहीं देने दी. मां के अंतिम समय में बांग्लादेश की क्रूर अदालत ने उन्हें मिलने से रोक दिया.
महंत चिन्मय दास की मां संध्या रानी बेटे की लंबी जेल की सजा के कारण मानसिक रूप से टूट गई थीं. बेटे की बीमारी की खबर ने भी उन्हें तोड़ दिया था, वहीं बार-बार जमानत नामंजूर होने और जेल से रिहाई न मिल पाने से भी वो बेहद परेशान थीं.
दबीं चीखें, भींचे होंठ और आंसुओं से भरी आंखें… बांग्लादेश में बेबुनियाद आरोपों में जेल में बंद इस्कॉन के संत चिन्मय दास की तस्वीरों और वीडियोज ने हर किसी को झकझोर दिया. अपनी मां की मौत के बाद वह महज पांच घंटे के लिए जेल से बाहर आए. बेरहम सरकार ने उन्हें मां की चिता को ठीक से… pic.twitter.com/ulUbN7IV9C
— NMF NEWS (@NMFNewsNational) ?ref_src=twsrc%5Etfw">September 11, 2026Advertisement
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चिन्मय कृष्ण दास पिछले दो साल से ढाका की जेल में बंद हैं. उन पर आरोप है कि शेख हसीना के तख्तापलट के दौरान प्रताड़ित हिंदुओं और अवामी लीग के कार्यकर्ताओं को उन्होंने इस्कॉन मंदिर में शरण दी और उन्हें भोजन उपलब्ध कराया. तत्कालीन मोहम्मद यूनुस की सरकार ने उन्हें जेल में बंद कर दिया. अब मां के निधन पर उन्हें अदालत ने महज पांच घंटे की बेल दी. उन्हें मां को चिता देने का समय भी नहीं दिया गया.
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महंत चिन्मय दास की वायरल तस्वीरों और वीडियो में देख सकते हैं. वे रोते हुए वापस जेल की वैन में बैठ रहे हैं. इससे पहले वह इस्कॉन मंदिर पहुंचे और राधा-कृष्ण के चरणों में रोते हुए गिर पड़े.
हिंदुओं के अधिकारों की उठी मांग
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महंत चिन्मय दास को मां के अंतिम संस्कार के लिए भी पूरे दिन परोल नहीं मिली. इसके बाद कई संस्थाओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं और लोगों ने इसका कड़ा विरोध किया. तारिक सरकार के इस कदम को इंसानियत को ताक पर रखने वाला और बेहद क्रूर बताया गया.
लोग सवाल उठा रहे हैं क्या बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यक होना मानवाधिकारों से वंचित होना है. लोगों ने UN से भी मांग की है कि वह इसमें हस्तक्षेप कर बांग्लादेश में हिंदुओं के अधिकारों की रक्षा और मानवाधिकारों की लड़ाई में साथ दे.
चिन्मय दास को क्यों किया गया था अरेस्ट?
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चिन्मय दास को नवंबर 2024 में उन्हें गिरफ्तार किया गया था. उन पर राष्ट्रीय ध्वज का अपमान करने का आरोप लगाया गया था. उस समय बांग्लादेश में लगातार हिंदुओं पर बर्बर हमले किए गए थे.
बेटे को देखने की अंतिम इच्छा रह गई अधूरी
चिन्मय कृष्ण दास की मां की अंतिम इच्छा जेल में बंद बेटे से मिलने की थी लेकिन जेल प्रशासन ने पैरोल पर रिहा करने से इंकार कर दिया था. गुरुवार सुबह चटगांव जिले के हथजारी उपजिले में स्थित श्री श्री पुंडरीक धाम आश्रम में 71 वर्षीय संध्या रानी धर का निधन हो गया। उन्होंने मंगलवार को खुद उस आश्रम में जाने की इच्छा जताई थी, जहां उनका बेटा लंबे समय से रह रहा था.
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इससे पहले बीमार पड़ने पर उन्हें चटगांव के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां डॉक्टरों ने कैंसर की पुष्टि की थी. हालांकि, बांग्लादेश के बंगाली अखबार 'कालबेला' की रिपोर्ट के अनुसार, वह अस्पताल में नहीं रहना चाहती थीं और अपनी जिंदगी के आखिरी दिन अपने बेटे के आश्रम में बिताना चाहती थीं.