LPG Cylinder की जमाखोरी रोकने के लिए सरकार का बड़ा कदम, देशभर में लागू किया ESMA ,जानिए गैस की किल्लत होने पर सबसे पहले किसे मिलेगा सिलेंडर?

LPG Crisis: केंद्र सरकार ने वस्तु अधिनियम (ESMA) लागू किया है ताकि एलपीजी की जमाखोरी रोकी जा सके और आम लोगों के लिए गैस की आपूर्ति प्रभावित न हो. सरकार ने रिफाइनरियों और पेट्रोकेमिकल इकाइयों को निर्देश दिया है कि वे एलपीजी उत्पादन बढ़ाएं और मुख्य हाइड्रोकार्बन स्रोतों को एलपीजी पूल में जोड़ें.

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LPG Cylinder Crisis: ईरान और इजरायल के बीच हाल ही में जारी संघर्ष का असर भारत में तेल और गैस की आपूर्ति पर भी पड़ रहा है. घरेलू उपयोग के लिए गैस आम जनता तक तो पहुँच रही है, लेकिन कमर्शियल गैस सिलेंडरों (होटल, रेस्टोरेंट और इंडस्ट्री) की कमी हो गई है. इसी वजह से केंद्र सरकार ने वस्तु अधिनियम (ESMA) लागू किया है ताकि एलपीजी की जमाखोरी रोकी जा सके और आम लोगों के लिए गैस की आपूर्ति प्रभावित न हो. सरकार ने रिफाइनरियों और पेट्रोकेमिकल इकाइयों को निर्देश दिया है कि वे एलपीजी उत्पादन बढ़ाएं और मुख्य हाइड्रोकार्बन स्रोतों को एलपीजी पूल में जोड़ें.

ESMA क्या है?

ESMA (Essential Services Maintenance Act) यानी आवश्यक सेवा रखरखाव अधिनियम एक कानून है. यह कानून उन सेवाओं को सुनिश्चित करता है जो आम जनता की रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़ी होती हैं. जैसे:

सार्वजनिक परिवहन (बस सेवाएं)
स्वास्थ्य सेवाएं (डॉक्टर, अस्पताल)
तेल और गैस की आपूर्ति
इस कानून के तहत सरकार को आपातकालीन परिस्थितियों में निर्देश देने और उत्पादन बढ़ाने की शक्ति मिलती है.

तेल रिफाइनरियों को आदेश

सरकार ने तेल रिफाइनरियों को एलपीजी उत्पादन बढ़ाने का निर्देश ESMA के तहत दिया है. इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि घरेलू रसोई गैस की आपूर्ति किसी भी हाल में रुक न पाए. भारत में वित्त वर्ष 2024-25 में एलपीजी की खपत 3.13 करोड़ टन थी, जिसमें केवल 1.28 करोड़ टन घरेलू स्तर पर उत्पादित हुआ और बाकी आयात किया गया.

होर्मुज जलडमरूमध्य का महत्व

भारत का 85-90% एलपीजी और तेल सऊदी अरब और अन्य मिडिल ईस्ट देशों से आयात होता है. इन देशों तक पहुँचने के लिए होर्मुज जलडमरूमध्य जरूरी है. लेकिन ईरान और अमेरिका-इजरायल संघर्ष के कारण यह मार्ग कुछ समय के लिए बंद हो गया। इससे गैस की आपूर्ति प्रभावित हो रही है.

किन सेक्टरों में गैस की कटौती नहीं होगी

सरकार ने साफ किया है कि घरेलू और जरूरी सेक्टरों को कोई कमी नहीं होगी. इन्हें 100% आपूर्ति मिलेगी. इनमें शामिल हैं:

घरों में पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG): सीधे घरों में आने वाली रसोई गैस
CNG: वाहनों और पब्लिक ट्रांसपोर्ट के लिए गैस
एलपीजी प्रोडक्शन: घरेलू सिलेंडर बनाने के लिए गैस
पाइपलाइनों के लिए ईंधन: गैस को ट्रांसपोर्ट करने के लिए जरूरी गैस
इन सेक्टरों को प्राथमिकता इसलिए दी गई है ताकि आम जनता को खाना बनाने या गाड़ी चलाने में कोई दिक्कत न हो.

किन सेक्टरों में गैस कटौती होगी

सरकार ने इंडस्ट्री और कमर्शियल सेक्टरों में गैस की कटौती करने का फैसला किया है. ये कटौती पिछले औसत उपयोग के आधार पर की जाएगी:
चाय उद्योग और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर: पिछले 6 महीने की खपत का 80%
फर्टिलाइजर कंपनियां: 70% अलोकेशन
तेल रिफाइनरीज: 65% अलोकेशन
होटल एसोसिएशन पहले ही चेतावनी दे चुकी है कि कमर्शियल गैस न मिलने से कई होटल बंद हो सकते हैं. लेकिन सरकार का फोकस आम लोगों और घरेलू सेक्टर पर है.

एलपीजी बुकिंग अवधि में बदलाव

घरेलू सिलेंडर की जमाखोरी रोकने के लिए सरकार ने एलपीजी सिलेंडर बुकिंग की अवधि 21 दिन से बढ़ाकर 25 दिन कर दी है. इससे घरेलू स्टॉक बचाने में मदद मिलेगी.

घरेलू स्टॉक और आपूर्ति

पेट्रोलियम मंत्रालय के मुताबिक, भारत में एलपीजी का स्टॉक लगभग 40 दिनों के लिए पर्याप्त है. इसके अलावा, अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों से अल्टरनेटिव इंपोर्ट बढ़ाया जा रहा है.
सरकार लगातार स्थिति पर नजर रख रही है और जरूरत पड़ने पर और कदम उठाए जाएंगे. अगर संकट लंबा चला तो इंडस्ट्री पर असर पड़ेगा, जैसे चाय बागानों में उत्पादन कम होना या खाद कंपनियों का काम प्रभावित होना.

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