UP पुलिस कर्मचारियों के लिए खुशखबरी, नई ट्रांसफर पॉलिसी से तबादले के बदले नियम, जानिए क्या मिलेगा लाभ
UP Police Transfer Policy: इन नए निर्देशों से यूपी पुलिस में ट्रांसफर प्रक्रिया अब ज्यादा स्पष्ट, निष्पक्ष और व्यवस्थित हो जाएगी. खासकर पति-पत्नी, बीमार और विशेष परिस्थिति में फंसे कर्मचारियों को बड़ी राहत मिलेगी, वहीं बेवजह दबाव और सिफारिश की प्रक्रिया पर भी रोक लगेगी.
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UP Police New Transfer Policy: उत्तर प्रदेश पुलिस में काम करने वाले कर्मचारियों के लिए एक अहम और राहत भरा फैसला लिया गया है. अब यूपी पुलिस में कार्यरत पति-पत्नी को अनुकंपा के आधार पर ट्रांसफर का लाभ दिया जाएगा. इसके साथ ही कुछ खास और मजबूरी वाली परिस्थितियों में भी पुलिस कर्मचारियों का ट्रांसफर अनुकंपा (Compassionate Benefit) के आधार पर किया जाएगा. इस संबंध में पुलिस महानिरीक्षक (स्थापना) मोदक राजेश जी राव की ओर से एक विस्तृत पत्र जारी किया गया है, जिसमें ट्रांसफर और पोस्टिंग को लेकर साफ-साफ दिशा-निर्देश दिए गए हैं. इसका मकसद ट्रांसफर प्रक्रिया को ज्यादा पारदर्शी, सरल और समयबद्ध बनाना है.
सेवा विवरण न होने से आती थी परेशानी
जारी किए गए पत्र में बताया गया है कि कई पुलिस कर्मचारी स्पष्ट सेवा विवरण (Service Record) न होने की वजह से काफी समय से परेशान रहते हैं. सेवा विवरण साफ न होने पर ट्रांसफर से जुड़े फैसले लेने में देरी होती थी. इसी समस्या को खत्म करने के लिए पुलिस विभाग ने 14 बिंदुओं को स्पष्ट किया है, जिनके आधार पर अब अनुकंपा के आधार पर ट्रांसफर पर विचार किया जाएगा. इससे कर्मचारियों को बार-बार कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे.
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पति-पत्नी ट्रांसफर को मिलेगी प्राथमिकता
पत्र में साफ कहा गया है कि सामान्य मामलों में वर्ष 2019 से 2022 तक भर्ती हुए सब-इंस्पेक्टर और कांस्टेबल के अनुकंपा ट्रांसफर पर विचार किया जाएगा. इसके अलावा 2019 के बाद भर्ती हुए ऐसे सब-इंस्पेक्टर और कांस्टेबल जो पति-पत्नी हैं, उनके मामलों में भी अनुकंपा के आधार पर ट्रांसफर की अनुमति दी जाएगी. हालांकि यह फैसला जिलों में खाली पदों और कानून-व्यवस्था की स्थिति को ध्यान में रखकर ही लिया जाएगा.
गृह जनपद और सीमावर्ती जिलों को लेकर नियम
राजपत्रित पुलिस बल के ट्रांसफर को लेकर पहले से जारी शासनादेश और विभागीय तबादला नीति के अनुसार व्यवस्था लागू रहेगी. इसके तहत इंस्पेक्टर और सब-इंस्पेक्टर को उनके गृह जनपद या गृह जनपद के सीमावर्ती जिले में तैनाती दी जाएगी. वहीं हेड कांस्टेबल और कांस्टेबल को भी उनके गृह जनपद या उससे सटे जिले में नियुक्त किया जाएगा.
2019 के बाद भर्ती कर्मियों के लिए खास निर्देश
2019 के बाद भर्ती हुए सब-इंस्पेक्टर और कांस्टेबल को सामान्य मामलों में मुख्यालय में उपस्थित होने की अनुमति नहीं दी जाएगी. उनके मामलों को मुख्यालय नहीं भेजा जाएगा. लेकिन पति-पत्नी के मामलों में उन्हें मुख्यालय में उपस्थित होने की अनुमति दी जाएगी और उन्हीं मामलों में अनुकंपा ट्रांसफर पर विचार होगा. इसके लिए दोनों पति-पत्नी के पुलिस परिचय पत्र की छायाप्रति लगाना अनिवार्य होगा.
सेवा विवरण देना होगा जरूरी
मुख्यालय में उपस्थित होने की अनुमति के साथ संबंधित कर्मचारी का पूरा सेवा विवरण देना अनिवार्य होगा. अगर कर्मचारी यातायात व्यवस्था, यूपी डायल 112, वीआईपी सुरक्षा, न्यायालय या हाईकोर्ट सुरक्षा में तैनात है, तो इसका साफ-साफ उल्लेख सेवा विवरण में करना होगा. अगर कर्मचारी प्रशासनिक या जनहित के आधार पर ट्रांसफर होकर आया है, तो उसका आदेश संख्या और तारीख भी दर्ज करनी होगी.
गंभीर बीमारी पर मिलेगा अनुकंपा ट्रांसफर (Compassionate Transfer)
जो पुलिस कर्मचारी गंभीर बीमारी से पीड़ित हैं, उन्हें भी अनुकंपा के आधार पर ट्रांसफर दिया जाएगा. इसके लिए संबंधित जनपद या इकाई प्रभारी के सामने आवेदन करना होगा. मेडिकल सर्टिफिकेट और इलाज से जुड़ी स्पष्ट रिपोर्ट मिलने के बाद ही इस पर फैसला लिया जाएगा.
इन मामलों पर नहीं होगा विचार
किसी अन्य जनपद या कमिश्नरेट से अपने मनपसंद जनपद में ट्रांसफर की मांग पर सामान्य रूप से कोई विचार नहीं किया जाएगा. ऐसे मामलों को मुख्यालय भेजने से भी मना किया गया है. केवल गंभीर बीमारी, सेवा निवृत्ति के नजदीक होने जैसी विशेष परिस्थितियों में ही स्पष्ट संस्तुति के साथ आवेदन भेजा जा सकता है.
मुख्यालय आने के लिए समय और अनुशासन तय
मुख्यालय में ट्रांसफर से जुड़े मामलों के लिए आने वाले पुलिस कर्मचारी सुबह 11 बजे से दोपहर 1 बजे तक ही कार्यालय में उपस्थित हो सकेंगे. कर्मचारी को खुद उपस्थित होना अनिवार्य होगा, उनके रिश्तेदार या परिचित कार्यालय नहीं आ सकेंगे. बिना अधिकारियों की अनुमति छुट्टी लेकर कार्यालय आने पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है.
इन नए निर्देशों से यूपी पुलिस में ट्रांसफर प्रक्रिया अब ज्यादा स्पष्ट, निष्पक्ष और व्यवस्थित हो जाएगी. खासकर पति-पत्नी, बीमार और विशेष परिस्थिति में फंसे कर्मचारियों को बड़ी राहत मिलेगी, वहीं बेवजह दबाव और सिफारिश की प्रक्रिया पर भी रोक लगेगी.
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