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जिस चिकन नेक के पास सिलीगुड़ी कॉरिडोर बना रही आर्मी, वहां कांग्रेस सांसद इमरान प्रतापगढ़ी ने खरीदी जमीन

संवेदनशील सिलीगुड़ी कॉरिडोर को लेकर चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है. जिस जगह पर जमीन अधिग्रहण की गई है वहां नेताओं ने जमीन खरीदी है. जिसमें कांग्रेस सांसद इमरान प्रतापगढ़ी का नाम भी है.

Image Source- IANS/X/@ShayarImran
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चिकन नेक को लेकर मोदी सरकार एक्टिव हो गई है. गृह मंत्री अमित शाह ने अपने बंगाल दौरे में BSF जवानों से इस प्रोजेक्ट को लेकर लंबी बातचीत की. अब इस संवेदनशील कॉरिडोर को लेकर चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है. जिस जगह पर चिकन नेक के लिए जमीन अधिग्रहण की गई है वहां नेताओं ने जमीन खरीदी है. जिसमें कांग्रेस सांसद इमरान प्रतापगढ़ी का नाम भी है. 

देश के पूर्वोत्तर राज्य, जो नेपाल, बांग्लादेश और भूटान की अंतर्राष्ट्रीय सीमाओं से सटे हैं. उनको देश से सीधे कनेक्ट करने के लिए ‘सिलीगुड़ी कॉरिडोर’ (चिकन नेक) के लिए हलचल तेज हो गई है. इसके लिए बंगाल से सटे बिहार के किशनगंज जिले के ठाकुरगंज प्रखंड के भेलागुड़ी मौजा में सेना का नया स्टेशन बनाया जाएगा. इसके लिए 189.68 एकड़ जमीन अधिग्रहण की गई है. 

कांग्रेस सांसद समेत 7 लोगों ने खरीदी जमीन 

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रक्षा विभाग और जिला प्रशासन के पत्राचार में सामने आया है कि भेलागुड़ी गांव के पास 71 एकड़ जमीन खरीदी है. जिन सात लोगों के नाम पर रजिस्ट्री करवाई गई है. उनमें कांग्रेस के राज्यसभा सांसद इमरान प्रतापगढ़ी, दिल्ली और UP के लोग हैं. 

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देखें खरीददारों के नाम 

  • मोहम्मद सलमान खान- 14.09 एकड़ जमीन 
  • मोहम्मद सुल्तान- 13.93 एकड़
  • सुलेमान खान- 13.12 एकड़
  • मोहम्मद शमीम- 11.72 एकड़
  • मोहम्मद अनस-   9.05 एकड़
  • तश्कील अहमद- 7.35 एकड़
  • इमरान प्रतापगढ़ी - 1.61 एकड़

सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार, इमरान प्रतापगढ़ी के नाम  पर 1.61 एकड़ जमीन की रजिस्ट्री हुई है. ऐसे में सवाल उठने लगे हैं कि सेना के बेहद अहम प्रोजेक्ट के पास कांग्रेस सांसद ने जमीन क्यों खरीदी? क्या इसके पीछे भारी-भरकम सरकारी मुआवजे का लालच है या फ्यूचर इनवेस्टमेंट. 

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चिकन नेक और भेलागुड़ी गांव की अहमियत 

किशनगंज का भेलागुड़ी मौजा गांव चिकन नेक के लिए रणनीतिक रूप से बेहद अहम और संवेदनशील है. तीन पड़ोसी देशों की सीमाएं इससे लगती हैं. ये ही वजह है कि रक्षा संपदा विभाग और किशनगंज जिला प्रशासन ने यहां 189.68 एकड़ निजी भूमि का अधिग्रहण किया है, ताकि यहां नया सैन्य स्टेशन स्थापित किया जा सके. जो सरकार के सिलीगुड़ी कॉरिडोर के लिए बेहद अहम है. इतना ही नहीं इन जमीनों पर चाय बागान भी हैं. ऐसे में राजनीतिक लोगों का यहां जमीन खरीद में दिलचस्पी लेना कोई आम सी बात नहीं हो सकती, क्योंकि आमतौर पर गांव में इतने बड़े पैमाने पर कोई जमीन नहीं खरीदता.  

क्या है चिकन नेक? 

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चिकन नेक या सिलीगुड़ी कॉरिडोर भारत की एक बेहद महत्वपूर्ण और संवेदनशील भौगोलिक पट्टी है. पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी क्षेत्र में स्थित यह एक संकीर्ण भूमि पट्टी (Narrow strip of land) है, जिसे इसके आकार की वजह से ‘चिकन नेक’ (Chicken's Neck) कहा जाता है. यह भारत की मुख्य भूमि को पूर्वोत्तर भारत (सेवन सिस्टर्स) से जोड़ने वाला एकमात्र स्थलीय मार्ग है. 

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सेना के लिए सामान और सैनिकों की आवाजाही इसी रास्ते से होती है. अगर यह कट गया तो पूर्वोत्तर अलग-थलग पड़ जाएगा. इसके साथ ही यह आर्थिक रूप से भी बेहद अहम है. व्यापार, परिवहन और ऊर्जा लाइनों के लिए यह बेहद जरूरी मार्ग है. 

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