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CJP प्रोटेस्ट के बीच पहली बार बोले राहुल गांधी, मोदी सरकार को घेरा, कहा- बच्चों ने उठाए सवाल, जवाब में मिली लाठी
कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने CJP के प्रोटेस्ट के बीच संभवत: पहली बार छात्रों के प्रदर्शनकारियों के सपोर्ट में बयान दिया है. उन्होंने मोदी सरकार पर हमला बोलेते हुए कहा कि बच्चों ने शिक्षा के जायज सवाल उठाए, तो जवाब में लाठी और हिरासत मिली.
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लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने सोमवार को जंतर-मंतर पर छात्रों के विरोध प्रदर्शन और संसद मार्च के दौरान उग्र प्रदर्शनकारियों व दिल्ली पुलिस सहित अन्य सुरक्षा बलों के बीच हुई झड़प की निंदा की है. उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यवस्था में हो रहे गंभीर मुद्दों को लेकर जायज सवाल उठाने वाले छात्रों को जवाब में केवल लाठियां और हिरासत मिली. राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर जारी एक वीडियो संदेश में तीखा हमला बोला. उन्होंने प्रधानमंत्री को भारत के इतिहास का सबसे युवा-विरोधी प्रधानमंत्री बताया.
राहुल गांधी ने मोदी सरकार पर बोला हमला
राहुल गांधी ने कहा, “इतने युवा-विरोधी कि एक नाकाम शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा भी नहीं ले सकते."
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राहुल गांधी ने पेपर लीक की घटनाओं का आंकड़ा देते हुए कहा कि देश में अब तक 152 पेपर लीक हो चुके हैं, जिनसे करीब 7.5 करोड़ छात्र-छात्राएं प्रभावित हुए हैं. इसके बावजूद किसी दोषी को सजा नहीं मिली. उल्टा मेहनती युवाओं को सजा दी जा रही है. उन्होंने आरोप लगाया कि पेपर लीक करने वाले अपराधी आजाद घूम रहे हैं, जबकि वाजिब मुद्दे उठाने वाले छात्रों को घसीटा जा रहा है, पीटा जा रहा है और हिरासत में लिया जा रहा है. दिल्ली की सड़कों पर उतरे हमारे युवा अपराधी नहीं हैं, वे अपनी जायज मांगों को लेकर सड़कों पर उतरे.
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राहुल गांधी ने कहा कि छात्रों द्वारा शिक्षा की गुणवत्ता, परीक्षा सुधार और रोजगार के मुद्दों पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन किया जा रहा था, लेकिन सरकार ने इसके बजाय दमन का रास्ता अपनाया. बार-बार पेपर लीक की घटनाएं होने के बावजूद मंत्री पद पर बने हुए हैं. केंद्र सरकार को इन युवाओं की मांग माननी चाहिए.
प्रियंका गांधी ने भी साधा सरकार पर निशाना
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दूसरी ओर, कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, "भाजपा सरकार को बच्चों पर लाठी चलाने की जगह अपनी नीतियों और अक्षमताओं की समीक्षा करनी चाहिए. पहले नीट का पेपर लीक हुआ, परीक्षा रद्द हुई और री-नीट में भी गड़बड़ी की खबरें आई हैं. कहा गया था कि प्रधानमंत्री खुद निगरानी करेंगे, इसके बावजूद यह सब क्यों और कैसे हो रहा है? बार-बार इतने पेपर लीक कैसे हो रहे हैं? संसद में इस मुद्दे पर विस्तृत चर्चा होनी चाहिए और प्रधानमंत्री को देश के करोड़ों युवाओं की बात सुननी चाहिए, उन्हें जवाब देना चाहिए."
जंतर मंतर पर पहुंचे विपक्षी पार्टी के नेता
आपको बता दें कि राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर शिक्षा व्यवस्था में सुधार, लगातार हो रहे पेपर लीक और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर चल रहे युवाओं के प्रदर्शन ने सोमवार को राजनीतिक रंग ले लिया. आम आदमी पार्टी (आप) के कई वरिष्ठ नेता प्रदर्शन में शामिल हुए और केंद्र सरकार पर छात्रों की आवाज दबाने तथा आंदोलनकारियों के साथ सख्ती बरतने का आरोप लगाया.
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प्रदर्शन में मनीष सिसोदिया, सांसद संजय सिंह, दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज, नेता प्रतिपक्ष आतिशी, गोपाल राय, विधायक संजीव झा और राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी अनुराग ढांडा समेत कई नेता मौजूद रहे. सभी ने शिक्षा व्यवस्था में सुधार, पेपर लीक पर सख्त कार्रवाई और केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग दोहराई.
मनीष सिसोदिया ने कहा कि जंतर-मंतर पर बड़ी संख्या में युवाओं की मौजूदगी यह दिखाती है कि लोग अब डर से बाहर निकल चुके हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार छात्रों की आवाज दबाने की कोशिश कर रही है, लेकिन यह आंदोलन अब पूरे देश के युवाओं का आंदोलन बन चुका है. उनके मुताबिक, लगातार पेपर लीक की घटनाओं से करोड़ों छात्रों का भविष्य प्रभावित हुआ है और इसके लिए जवाबदेही तय होनी चाहिए.
प्रधानमंत्री मोदी भारत के इतिहास के सबसे युवा-विरोधी प्रधानमंत्री हैं - इतने युवा विरोधी कि एक नाकाम शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा भी नहीं ले सकते।
152 पेपर लीक। 7.5 करोड़ छात्र पीड़ित। और सज़ा एक दोषी को भी नहीं। सजा किसे मिली? मेहनती युवाओं को।
और जब इन बच्चों ने… pic.twitter.com/DbX5L4Iq5C— Rahul Gandhi (@RahulGandhi) ?ref_src=twsrc%5Etfw">July 20, 2026Advertisement
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आम आदमी पार्टी ने भी किया आंदोलन का समर्थन!
सांसद संजय सिंह ने आरोप लगाया कि सरकार ने प्रदर्शनकारियों से संवाद करने के बजाय पुलिस बल का इस्तेमाल किया. उन्होंने दावा किया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे युवाओं पर लाठीचार्ज और आंसू गैस का प्रयोग किया गया. साथ ही उन्होंने आंदोलन से जुड़े अभिजीत दीपके की हिरासत का मुद्दा उठाते हुए उनकी तत्काल रिहाई की मांग की.
सौरभ भारद्वाज ने कहा कि जंतर-मंतर और उसके आसपास बड़ी संख्या में युवा जुटे, जिनमें दिल्ली के अलावा उत्तर प्रदेश, हरियाणा, महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ के छात्र भी शामिल थे. उनके अनुसार, यह भागीदारी केंद्र सरकार के प्रति युवाओं के बढ़ते असंतोष का संकेत है.
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आतिशी ने आरोप लगाया कि यदि सरकार परीक्षा आयोजित कराने में उतनी ही गंभीर होती, जितनी प्रदर्शन रोकने में दिखाई दी, तो नीट, एसएससी, टीईटी समेत अन्य परीक्षाओं में पेपर लीक जैसी घटनाएं नहीं होतीं. उन्होंने शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और व्यापक सुधार की आवश्यकता पर जोर दिया.
गोपाल राय ने कहा कि सरकार को तीन कदम तुरंत उठाने चाहिए अभिजीत दिपके की रिहाई, केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को पद से हटाना और प्रदर्शनकारियों पर बल प्रयोग करने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई. उन्होंने कहा कि छात्रों के धैर्य की परीक्षा नहीं ली जानी चाहिए.
विधायक संजीव झा ने कहा कि युवाओं की आवाज दबाने के बजाय उनकी समस्याओं का समाधान किया जाना चाहिए. वहीं, अनुराग ढांडा ने कहा कि बड़ी संख्या में युवाओं की भागीदारी इस बात का संकेत है कि नई पीढ़ी शिक्षा और रोजगार जैसे मुद्दों पर जवाबदेही चाहती है.
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आम आदमी पार्टी ने आंदोलन का समर्थन करते हुए केंद्र सरकार से छात्रों की मांगों पर गंभीरता से विचार करने और संवाद के जरिए समाधान निकालने की अपील की है.