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KGMU विवाद के बीच CM योगी से मिलीं अपर्णा यादव, धर्मांतरण मामले को लेकर दी पूरी जानकारी

यूपी के सीएम योगी ने केजीएमयू में धर्मांतरण विरोधी हंगामे को गंभीरता से लिया. उन्होंने यूपी महिला आयोग की उपाध्यक्ष अपर्णा यादव और अध्यक्ष बबिता चौहान से मुलाकात कर पूरे घटनाक्रम की जानकारी ली.

Source: X/ @aparnabisht7

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने केजीएमयू (KGMU) में हुई हालिया घटना को गंभीरता से लिया है. शुक्रवार को विश्वविद्यालय परिसर में धर्मांतरण के विरोध में हुए हंगामे और अराजकता के मामले में मुख्यमंत्री ने तुरंत कदम उठाए. उन्होंने इस प्रकरण की जानकारी लेने के लिए पहले यूपी महिला आयोग की उपाध्यक्ष अपर्णा यादव को तलब किया. सूत्रों के अनुसार अपर्णा यादव ने मुख्यमंत्री से मुलाकात कर पूरे घटनाक्रम की विस्तृत जानकारी दी. इसके बाद मुख्यमंत्री ने आयोग की अध्यक्ष बबिता चौहान से भी चर्चा की, ताकि मामले की संपूर्ण स्थिति समझी जा सके.

अपर्णा यादव ने CM योगी से की मुलाकात 

अपर्णा यादव की सीएम योगी से हुई मुलाकात को राजनीतिक और प्रशासनिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है. अपर्णा ने कहा कि विश्वविद्यालय में हुए जोरदार प्रदर्शन और बवाल से वह स्वयं भी नाराज हैं. माना जा रहा है कि उन्होंने मुख्यमंत्री से न केवल प्रदर्शन का कारण बताया बल्कि इसमें शामिल लोगों और प्रशासनिक चुनौतियों के बारे में भी विस्तृत जानकारी साझा की. यूपी महिला आयोग की उपाध्यक्ष अपर्णा यादव ने एक्स पर फोटो साझा करते हुए लिखा कि उन्हें प्रदेश के यशस्वी मुख्यमंत्री, हम सभी के संरक्षणकर्ता आदरणीय योगी आदित्यनाथ से भेंट कर मार्गदर्शन और आशीर्वाद प्राप्त करने का सौभाग्य मिला. उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री का नेतृत्व और स्पष्ट दृष्टि प्रदेश को निरंतर प्रगति के पथ पर आगे बढ़ा रही है और ऐसे मार्गदर्शन से सभी को प्रेरणा मिलती है. वहीं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कार्यालय ने इस मुलाकात को शिष्टाचार भेंट बताया है.

KGMU प्रशासन ने पुलिस को दी तहरीर 

केजीएमयू में हुए इस विवाद के बाद अपर्णा यादव और उनके करीब 200 अज्ञात समर्थक भी चर्चा में आए हैं. विश्वविद्यालय प्रशासन ने आरोप लगाया कि इस प्रदर्शन में VC ऑफिस में तोड़फोड़ की गई, महिला शिक्षकों के साथ अभद्रता हुई और VC का मोबाइल चोरी किया गया. प्रशासन ने इसे गुंडागर्दी करार दिया है और FIR दर्ज करने की तैयारी शुरू कर दी है. इस घटना ने विश्वविद्यालय परिसर में हड़कंप मचा दिया और छात्रों और शिक्षकों में डर और चिंता की स्थिति पैदा कर दी.

अपर्णा का क्या है आरोप?

अपर्णा यादव ने इस पूरे प्रकरण पर भी टिप्पणी की. उनका कहना है कि ज्ञान का मंदिर, जो शिक्षा और स्वास्थ्य का केंद्र होना चाहिए, अब धर्म परिवर्तन और लव जिहाद जैसे संवेदनशील मुद्दों का केंद्र बन गया है. उन्होंने विशाखा जांच कमेटी की निष्पक्षता पर सवाल उठाए और कहा कि मीडिया को दी गई जानकारी कई बार तथ्यात्मक रूप से गलत रही. उनका मानना है कि जांच पूरी तरह निष्पक्ष नहीं हुई और इसे लेकर सुधार की जरूरत है.

अराजकता बर्दाश्त नहीं की जाएगी: KGMU 

केजीएमयू प्रशासन ने साफ कर दिया है कि इस तरह की हिंसा और अराजकता बर्दाश्त नहीं की जाएगी. उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने कानून और विश्वविद्यालय की शांति को भंग किया है, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी. अपर्णा यादव और उनके समर्थकों पर FIR दर्ज की जाएगी और इस मामले की न्यायिक प्रक्रिया पूरी तरह से पालन के तहत होगी. जानकारों का कहना है कि यह मामला केवल विश्वविद्यालय तक सीमित नहीं है, बल्कि राजनीतिक, सामाजिक और प्रशासनिक दृष्टि से भी गंभीर है. ऐसे मामलों में प्रशासन और महिला आयोग जैसी संस्थाओं की भूमिका अहम हो जाती है, ताकि किसी भी संवेदनशील प्रकरण का सही तरीके से निपटारा किया जा सके और परिसर में कानून और शांति बनाए रखी जा सके.

बता दें कि इस पूरे घटनाक्रम से यह साफ संकेत मिलता है कि प्रशासन, महिला आयोग और मुख्यमंत्री कार्यालय मिलकर विश्वविद्यालय और प्रदेश में कानून और शांति बनाए रखने के लिए सक्रिय कदम उठा रहे हैं. वहीं अपर्णा यादव की सीएम से मुलाकात ने इस विवाद को एक नई दिशा दी है और घटनाओं की निष्पक्ष जांच की मांग को और मजबूत किया है.

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