Advertisement
नेपाल में बाढ़ से महाप्रलय! चीन की भूमिका पर उठे सवाल? US एजेंसी ने जलप्रलय की असल वजह बता दी
Nepal Flood Live: नेपाल में जलप्रलय आने के पीछे क्या है वजहों और चीन की संदिग्ध भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं. एक ओर जहां बीजिंग की ओर से इन आरोपों पर बयान सामने आया है तो वहीं अमेरिकी एजेंसी ने इस महाप्रलय की असल वजह बता दी है.
Advertisement
नेपाल-चीन के सीमावर्ती इलाकों में बुधवार सुबह आई अचानक भीषण बाढ़ ने भारी तबाही मचाई. अब तक 1000 से ज्यादा लोग लापता बताए जा रहे हैं. गांव के गांव, कई इलाके देखते ही देखते बह गए. फ्लैश फ्लड की चपेट में ज्यादातर विदेशी नागरिक आए हैं, जो घूमने के लिए गए थे. इसी बीच बाढ़ की वजह का पता लगाने की कोशिश हो रही है.
कहा जा रहा है कि चीन को कथित तौर पर पहले से पता था कि पानी का प्रवाह, जलस्तर बढ़ने वाला है, लेकिन उसने समय रहते नेपाली सरकार और एजेंसियों को अलर्ट नहीं किया. हाइड्रोलॉजी विशेषज्ञों ने संभावना जताई है कि बाढ़ नेपाल में भारी बारिश के कारण नहीं, बल्कि तिब्बत में ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड (जीएलओएफ) के कारण आई है.
नेपाल में बाढ़, चीन की संदिग्ध भूमिका!
Advertisement
आपको बताएं कि तिब्बत क्षेत्र से निकलने वाली भोटेकोशी नदी का जलस्तर अचानक बुधवार सुबह करीब 9 बजे बढ़ना शुरू हुआ. अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि बाढ़ का पानी निचले इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकता है, क्योंकि भोटेकोशी नदी त्रिशूली नदी में मिलती है और नुवाकोट तथा मध्य नेपाल के अन्य जिलों की ओर बढ़ती है.
Advertisement
नेपाली पत्रकारों ने चीन की भूमिका पर उठाए सवाल!
Advertisement
आपको बता दें कि नेपाल में Tibet सीमा के पास आई भीषण बाढ़ के बाद नेपाल के पत्रकारों के एक समूह ने चीन की भूमिका पर सवाल खड़े किए हैं. पत्रकारों ने आरोप लगाया कि चीन ने बाढ़ के खतरे को लेकर नेपाल को समय रहते सूचना नहीं दी. वहीं इन आरोपों के बीच नेपाल में चीन के राजदूत झांग माओमिंग ने प्रतिक्रिया दी है और कहा कि चीन की तरफ भी काफी नुकसान हुआ है. हालांकि उन्होंने चीनी सरकार पर लग रहे आरोपों पर कोई जवाब नहीं दिया बल्कि उनके देश में हुए जान-माल के नुकसान और नेपाली लोगों को दी जाने वाली मदद की जानकारी दी और कहा कि चीन नेपाल को हरसंभव मदद करेगा.
नेपाल बाढ़ पर क्या बोला चीन?
Advertisement
राजदूत ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में मृतकों के परिवारों के प्रति संवेदना जताते हुए कहा कि इस मुश्किल वक्त में चीन नेपाल के साथ मजबूती से खड़ा है. उन्होंने इस दौरान कहा कि चीन भी इस आपदा से काफी प्रभावित हुआ है, फिर भी उसने नेपाल के लिए आपातकालीन राहत सामग्री और आर्थिक सहायता का तुरंत इंतजाम किया.
उन्होंने आगे कहा कि China, नेपाल को आगे भी हर संभव सहायता देने की कोशिश करेगा. उन्होंने भरोसा जताया कि दोनों देश मिलकर इस मुश्किल दौर से निकलेंगे और प्रभावित इलाकों में दोबारा सामान्य स्थिति बहाल करने के लिए काम करेंगे.
नेपाल जलप्रलय की क्या है मुख्य वजह, अमेरिकी एजेंसी ने बता दिया!
Advertisement
इसी यूएसजीएस ने साफ किया कि बुधवार सुबह नेपाल में आई जानलेवा अचानक बाढ़ (फ्लैश फ्लड) की वजह भूकंप नहीं, बल्कि जमीन का खिसकना (लैंडस्लाइड) था. एजेंसी ने आगे कहा कि जिस भूकंपीय गतिविधि को शुरू में भूकंप बताया गया था, वह असल में ग्लेशियर के ढहने और मलबे के बहाव की घटना थी. इसी वजह से बाद में निचले इलाकों में भारी तबाही मची.
USGS ने कहा:
Advertisement
1. 26 अगस्त को सुबह 8:37 बजे (स्थानीय समय) / सुबह 10:52 बजे (चीन स्टैंडर्ड टाइम), नेपाल और चीन की सीमा के पास 5.2 तीव्रता की एक भूकंपीय घटना हुई.
2. USGS ने पता लगाया कि यह घटना ग्लेशियर के ढहने और मलबे के बहाव (डेब्रिस फ्लो) की थी, जिसके कारण बाद में निचले इलाकों में भारी तबाही हुई.
3. शुरुआत में इस घटना को 4.4 तीव्रता का भूकंप बताया गया था, लेकिन आस-पास के भूकंप मापी केंद्रों (सीस्मिक स्टेशनों), लंबी अवधि की भूकंपीय तरंगों और सैटेलाइट तस्वीरों के और विश्लेषण से यह पता चला कि यह घटना असल में ग्लेशियर के ढहने और मलबे के बहाव की थी, न कि कोई भूकंप आया था.
Advertisement
वहीं नेपाली हाइड्रोलॉजी और मौसम विज्ञान विभाग और स्थानीय अधिकारी, चीनी अधिकारियों के साथ मिलकर, पानी के अचानक बढ़ने के सही कारण का पता लगाने के लिए सैटेलाइट से मिली जानकारी का अध्ययन कर रहे हैं.
वहीं प्लैनेट लैब्स की सैटेलाइट तस्वीरों की शुरुआती स्टडी से पता चला कि नेपाल-चीन के रसुवागढ़ी बॉर्डर क्रॉसिंग से लगभग 20 किलोमीटर (12 मील) उत्तर-पूर्व में लेन्डे नदी में बर्फ और चट्टानों के खिसकने से मलबे वाली बाढ़ आई. ये नदी भोटेकोशी की एक सहायक नदी है जो चीन से नेपाल की ओर बहती है.
Advertisement
नेपाल में ग्लेशियल झीलें फटने का खतरा बढ़ा, 47 लेक्स से कभी भी आ सकती है तबाही
इंटरनेशनल सेंटर फॉर इंटीग्रेटेड माउंटेन डेवलपमेंट (आईसीआईएमओडी) और नेपाल सरकार के वैज्ञानिक आकलनों के अनुसार, 47 ग्लेशियल झीलों को 'संभावित रूप से खतरनाक ग्लेशियल झीलें' (पीडीजीएलएस) के रूप में चिन्हित किया गया है. चेतावनी दी गई है कि इन झीलों से कभी भी ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड (ग्लोफ) आ सकता है, जो नेपाल की नदी प्रणालियों में विनाशकारी बाढ़ का कारण बन सकता है.
Advertisement
इन 47 झीलों में से 21 नेपाल में स्थित हैं, जबकि 25 झीलें तिब्बत में हैं और सीमा पार की श्रेणी में आती हैं. ये झीलें उन नदियों के ऊपरी हिस्से में स्थित हैं जो दक्षिण की ओर बहते हुए नेपाल में प्रवेश करती हैं, इसलिए ये नीचे बसे समुदायों और बुनियादी ढांचे के लिए संभावित खतरा पैदा करती हैं.
इस पूरी सूची में से आपदा प्रबंधन अधिकारियों और संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (यूएनडीपी) ने कुछ तेजी से फैल रही, मोरेन (पत्थर और मलबे) से बनी बांधनुमा झीलों को विशेष रूप से चिन्हित किया है. इनके जोखिम को कम करने और जलस्तर घटाने के लिए तत्काल कदम उठाने की जरूरत बताई गई है.
Advertisement
इनमें सबसे प्रमुख झीलें लोअर बरुण (टैलोपोखरी), थुलागी (डोना), लुमडिंग त्सो, होंगु-2/चामलांग साउथ, त्सो रोल्पा और इमजा त्सो हैं.
इन उच्च जोखिम वाली झीलों से पैदा होने वाला खतरा मुख्य रूप से उन पर्वतीय और पहाड़ी जिलों में केंद्रित हैं, जो नीचे की ओर बहने वाली नदी घाटियों के रास्ते में स्थित हैं. यदि कोई बड़ा 'ग्लोफ' होता है, तो इन क्षेत्रों के लोगों और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को गंभीर नुकसान पहुंच सकता है.
Advertisement
पूर्वी और मध्य Nepal, जिनमें कोशी और बागमती नदी बेसिन शामिल हैं, वहां कुल क्षेत्रीय जोखिम का 85 प्रतिशत से अधिक हिस्सा संवेदनशील क्षेत्रों में केंद्रित है.
किन इलाकों में सबसे ज्यादा खतरा?
सबसे अधिक जोखिम वाले जिलों में सोलुखुम्बु शामिल है, जहां दूध कोसी और इमजा बेसिन आते हैं. संखुवासभा जिला बरुण और अरुण नदी घाटियों के किनारे स्थित है. दोलखा जिला तामा कोशी नदी कॉरिडोर में है और त्सो रोल्पा झील से खतरे का सामना कर सकता है. वहीं सिंधुपालचोक जिला भोटे कोसी और सुन कोसी नदी घाटियों के किनारे स्थित है और तिब्बत की सीमा पार स्थित झीलों से आने वाली संभावित बाढ़ के खतरे में है.
Advertisement
इसके अलावा, रामेछाप, काव्रेपलानचोक और रसुवा जिलों की नदी किनारे बसी बस्तियां भी संवेदनशील मानी जाती हैं, खासकर त्रिशूली नदी बेसिन के आसपास के इलाके पश्चिमी और सुदूर-पश्चिमी नेपाल में, जहां गंडकी और कर्णाली नदी बेसिन फैले हुए हैं, कई जिलों के समुदायों और जलविद्युत परियोजनाओं पर भी सीधा खतरा मंडरा रहा है.
Advertisement
ये भी पढ़ें: नेपाल में भोटेकोशी नदी की बाढ़ ने मचाई तबाही... 162 की मौत और 800 से ज्यादा लोग लापता; UP-बिहार में भी बढ़ी चिंता
यह भी पढ़ें
इनमें मनांग और लमजुंग जिले शामिल हैं, जो थुलागी झील के नीचे मार्स्यांगदी नदी बेसिन में स्थित हैं. इसके अलावा, गोरखा जिला बूढ़ी गंडकी बेसिन में, मुस्तांग और म्याग्दी जिले काली गंडकी बेसिन में, तथा हुम्ला के दूरदराज के इलाके, जिनमें लिमी घाटी और हुम्ला कर्णाली कॉरिडोर शामिल हैं, भी संभावित रूप से प्रभावित हो सकते हैं.