हरियाणा में बढ़ते नशे पर घिरी बीजेपी सरकार, AAP ने सीएम नायब सिंह से मांगा जवाब
मुख्यमंत्री नायब सिंह पर कटाक्ष करते हुए AAP नेताओं ने कहा है कि दूसरे राज्यों की राजनीति करने से पहले हरियाणा के युवाओं को बचाना प्राथमिकता होनी चाहिए. उनका कहना है कि अगर किसी ईमानदार अधिकारी या उसके परिवार को नुकसान होता है, तो इसकी जिम्मेदारी सीधे सरकार की होगी.
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हरियाणा की जमीन पर एक खतरनाक सच्चाई आकार ले रही है. गांवों, कस्बों और शहरों में नशा अब छुपकर नहीं, खुलेआम बिकने की बात कही जा रही है. खबरों की सुर्खियाँ बता रही हैं कि युवा इंजेक्शन से लेकर ‘चिट्टा’ तक के जाल में फंस रहे हैं. सवाल यह है कि आखिर जिम्मेदारी किसकी है?
पुलिसकर्मी के आरोपों से मचा हड़कंप
इसी बीच हरियाणा के एक पुलिसकर्मी सुनील संधू की सोशल मीडिया पोस्ट ने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया. उनका कहना है कि वे नशे के खिलाफ कार्रवाई कर रहे थे, लेकिन उन पर ही दबाव बनाया जा रहा है. उन्होंने आरोप लगाया कि बड़े अधिकारी उन्हें तस्करों को छोड़ने के लिए कह रहे हैं और मना करने पर कार्रवाई की धमकी दी जा रही है. अगर एक ईमानदार अधिकारी खुद को असुरक्षित महसूस करे, तो यह सिर्फ एक व्यक्ति का मामला नहीं रह जाता, यह पूरे सिस्टम पर सवाल खड़ा करता है.
AAP का बीजेपी पर हमला
आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी अनुराग ढांडा ने सीधे तौर पर हरियाणा की बीजेपी सरकार और मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी को कठघरे में खड़ा किया है. उनका कहना है कि जैसे-जैसे पंजाब में नशा कारोबार पर शिकंजा कस रहा है, तस्करों ने हरियाणा को नया ठिकाना बना लिया है. जैसे अकाली-भाजपा गठबंधन सरकार ने पंजाब में नशा फैलाया था. वैसे हरियाणा में भी नशा कारोबारी की सरपरस्ती नायब सिंह सरकार कर रही है. जो पुलिसकर्मी नशा रोकने की कोशिश कर रहे हैं उन पर अत्याचार किया जा रहा है यह एक बहुत गंभीर आरोप है नायब सिंह ऐसे सीनियर अधिकारियों को पर कार्रवाई क्यों नहीं करते हैं आखिर नायब सिंह इन्हें क्यों बचा रहे हैं.
पंजाब मॉडल की चर्चा
पंजाब में 2022 के बाद से भगवंत मान सरकार ने ‘नशे के खिलाफ जंग’ की बात की और लगातार कार्रवाई का दावा किया. बड़े-बड़े सप्लायर पकड़े गए, संपत्तियाँ जब्त हुईं और पुलिस-प्रशासन को सख्त संदेश दिया गया कि किसी भी स्तर पर ढिलाई बर्दाश्त नहीं होगी. आम आदमी पार्टी इसे अपनी सरकार की निर्णायक इच्छाशक्ति का प्रमाण बताती है.
हरियाणा सरकार पर बढ़ता दबाव
इसके उलट, हरियाणा में हालात पर सवाल उठ रहे हैं. विपक्ष का आरोप है कि जहाँ बीजेपी की सरकार है, वहाँ नशा नेटवर्क जड़ें जमा रहा है और जो अधिकारी कार्रवाई करना चाहते हैं, उन्हें संरक्षण नहीं मिल रहा. अगर सुनील संधू जैसे अधिकारी को धमकियाँ मिलती हैं, तो यह सिर्फ कानून-व्यवस्था का नहीं, राजनीतिक इच्छाशक्ति का भी मुद्दा है.
मुख्यमंत्री नायब सिंह पर कटाक्ष करते हुए AAP नेताओं ने कहा है कि दूसरे राज्यों की राजनीति करने से पहले हरियाणा के युवाओं को बचाना प्राथमिकता होनी चाहिए. उनका कहना है कि अगर किसी ईमानदार अधिकारी या उसके परिवार को नुकसान होता है, तो इसकी जिम्मेदारी सीधे सरकार की होगी. जनता का दर्द सीधा और साफ है, उन्हें राजनीति नहीं, समाधान चाहिए. हर माता-पिता चाहते हैं कि उनका बेटा-बेटी नशे की गिरफ्त में न जाए. हर गांव चाहता है कि उसके युवाओं के हाथ में रोजगार हो, सुई नहीं.
आज असली मुकाबला आरोप-प्रत्यारोप का नहीं, बल्कि नशे के खिलाफ ठोस कार्रवाई का है. पंजाब मॉडल को आम आदमी पार्टी अपनी ताकत बताती है, जहाँ कार्रवाई दिख रही है. हरियाणा में भी वैसी ही सख्ती और पारदर्शिता की मांग उठ रही है. नशा किसी पार्टी को नहीं पहचानता, लेकिन सरकार की नीयत और नीति जरूर फर्क पैदा करती है. अब नजरें हरियाणा सरकार पर हैं, क्या वह सख्त कदम उठाकर युवाओं का भविष्य सुरक्षित करेगी, या सवालों के घेरे में ही रहेगी?
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