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Artemis II Launch: अंतरिक्ष में नई उड़ान, 50 साल बाद फिर चंद्रमा की ओर बढ़े इंसानी कदम, नासा का ऐतिहासिक फैसला

Artemis II Launch: यह मिशन खास इसलिए है क्योंकि यह 50 सालों में पहली बार मानवयुक्त उड़ान है जो सीधे चंद्रमा के चारों ओर जाएगी. इस मिशन में चार अंतरिक्ष यात्री शामिल हैं: नासा के रीड वाइसमैन, विक्टर ग्लोवर और क्रिस्टीना कोच, और साथ ही कनाडाई अंतरिक्ष एजेंसी के जेरेमी हैनसेन भी इस दल का हिस्सा हैं.

Image Source: Social Media
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Artemis II Launch: नासा ने अपने सबसे बड़े और रोमांचक मिशनों में से एक, आर्टेमिस II को फ्लोरिडा के केनेडी स्पेस सेंटर से अंतरिक्ष में भेजा गया. यह मिशन खास इसलिए है क्योंकि यह 50 सालों में पहली बार मानवयुक्त उड़ान है जो सीधे चंद्रमा के चारों ओर जाएगी. इस मिशन में चार अंतरिक्ष यात्री शामिल हैं: नासा के रीड वाइसमैन, विक्टर ग्लोवर और क्रिस्टीना कोच, और साथ ही कनाडाई अंतरिक्ष एजेंसी के जेरेमी हैनसेन भी इस दल का हिस्सा हैं.
स्पेस लॉन्च सिस्टम रॉकेट ने ओरियन अंतरिक्ष यान को अपने शीर्ष पर रखा और यह मिशन बुधवार शाम 6:35 बजे (ईस्टर्न टाइम) शुरू हुआ. प्रक्षेपण के दौरान थोड़ी तकनीकी रुकावट आई, जब लॉन्च काउंटडाउन को टी-10 मिनट पर रोकना पड़ा. लेकिन कुछ ही मिनटों में इसे फिर से शुरू कर दिया गया और मिशन सफलता की ओर बढ़ा.

मिशन का उद्देश्य और महत्व

आर्टेमिस II सिर्फ एक यात्रा नहीं है, बल्कि यह नासा की भविष्य की योजनाओं का पहला कदम है. इस मिशन का मुख्य उद्देश्य ओरियन अंतरिक्ष यान की जीवन-समर्थन प्रणालियों का परीक्षण करना और अंतरिक्ष यात्रियों को गहरे अंतरिक्ष में संचालन का अभ्यास करना है. दल चंद्रमा के दूरस्थ हिस्से तक लगभग 7,400 किलोमीटर आगे जाएगा और फिर सुरक्षित रूप से पृथ्वी पर लौटेगा. यह मिशन पिछले 50 सालों की तुलना में अंतरिक्ष यात्रियों को पृथ्वी से कहीं अधिक दूर और चंद्रमा के करीब ले जाएगा. पुनः प्रवेश (री-एंट्री) मिशन का सबसे चुनौतीपूर्ण हिस्सा है. ओरियन को पृथ्वी के वायुमंडल में लगभग 25,000 मील प्रति घंटे की गति से प्रवेश करना होगा, और इसे लगभग 5,000 डिग्री तापमान का सामना करना पड़ेगा. अंत में, अंतरिक्ष यान प्रशांत महासागर में सुरक्षित रूप से उतरेगा.

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अंतरिक्ष यात्रियों की भूमिका

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मिशन के दौरान, चारों अंतरिक्ष यात्री कई महत्वपूर्ण गतिविधियाँ करेंगे. वे अंतरिक्ष यान के प्रदर्शन का मूल्यांकन करेंगे, आपातकालीन प्रक्रियाओं का अभ्यास करेंगे और चंद्रमा के दूरस्थ हिस्से की तस्वीरें लेंगे. इस दल के लिए यह एक ऐतिहासिक मिशन भी है. इसमें पहली बार चंद्रमा की ओर जाने वाली महिला, पहला अफ्रीकी-अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री और पहला कनाडाई शामिल हैं.

आर्टेमिस कार्यक्रम और भविष्य की योजना

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आर्टेमिस II नासा की बड़ी योजना का हिस्सा है, जिसका लक्ष्य चंद्रमा पर दीर्घकालिक मानव उपस्थिति स्थापित करना और भविष्य में मंगल ग्रह तक मानव भेजना है. आर्टेमिस कार्यक्रम अपोलो मिशनों के बाद शुरू हुआ, जिनमें 1968 से 1972 तक कुल 24 अंतरिक्ष यात्रियों ने चंद्रमा की यात्रा की, और उनमें से 12 ने उसकी सतह पर कदम रखा.

इस मिशन के माध्यम से नासा चंद्रमा पर स्थायी आधार (लूनर बेस) बनाने की दिशा में काम कर रहा है. इस दशक के अंत तक नासा दक्षिणी ध्रुव पर मिशनों की योजना बना रहा है, और इसके बाद धीरे-धीरे मंगल की ओर बढ़ेगा. यह सिर्फ विज्ञान की उपलब्धि नहीं है, बल्कि मानवता की जिज्ञासा, साहस और अन्वेषण की भावना का प्रतीक भी है.

मिशन पर जाने वाले चार सदस्य हैं:- 

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यह भी पढ़ें

रीड वाइजमैन (कमांडर, नासा)
विक्टर ग्लोवर (पायलट, नासा)
क्रिस्टीना कोच (मिशन स्पेशलिस्ट, नासा)
जेरेमी हैनसेन (मिशन स्पेशलिस्ट, सीएसए - कनाडा)

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