'यहां तरीके से पेश हों, वरना...', SC में एक मामले की सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत वकील पर भड़के, जानें पूरा मामला
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान भारत के प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत वकील की टिप्पणी पर नाराज हो गए. दरअसल, एडवोकेट मैथ्यूज नेदुम्पारा ने आरोप लगाया कि अडानी और अंबानी से जुड़े मामलों के लिए बेंच बन रही हैं, लेकिन राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग से जुड़ी मामलें के लिए ऐसा नहीं हो रहा.
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सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को उस समय माहौल अचानक गर्म हो गया, जब भारत के प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत ने सुनवाई के दौरान एक वकील की टिप्पणी पर कड़ी नाराजगी जाहिर की. अदालत कक्ष में चल रही कार्यवाही के बीच यह घटनाक्रम चर्चा का विषय बन गया और कानूनी गलियारों में इसकी गूंज सुनाई दी.
वकील की टिप्पणी पर जताई कड़ी आपत्ति
जानकारी के अनुसार, एडवोकेट मैथ्यूज नेदुम्पारा ने सुनवाई के दौरान यह आरोप लगाया कि उद्योगपतियों अडानी और अंबानी से जुड़े मामलों के लिए विशेष बेंच गठित की जा रही हैं, लेकिन राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग से जुड़ी चुनौती पर सुनवाई नहीं हो रही है. यह टिप्पणी जैसे ही अदालत में रखी गई, प्रधान न्यायाधीश ने कड़ी आपत्ति दर्ज की.
सीजेआई की सख्त चेतावनी
सीजेआई ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अदालत में पेश की जाने वाली दलीलों और भाषा को लेकर सावधानी बरती जानी चाहिए. उन्होंने वकील को चेतावनी देते हुए कहा कि इस प्रकार की टिप्पणी को अदालत बर्दाश्त नहीं करेगी. अदालत की गरिमा और अनुशासन बनाए रखना हर अधिवक्ता की जिम्मेदारी है. यह संदेश साफ था कि न्यायालय में आरोप लगाने से पहले तथ्यों और शब्दों दोनों पर संयम जरूरी है.
जनहित याचिका पर भी जताई थी नाराजगी
इससे पहले भी प्रधान न्यायाधीश एक जनहित याचिका पर नाराजगी जता चुके हैं. बीते सप्ताह उन्होंने एक याचिका को देखकर टिप्पणी की थी कि यदि शीर्ष अदालत के समक्ष इस स्तर की याचिकाएं आ रही हैं, तो याचिका कानून को भगवान ही बचाए. उन्होंने उस मामले में सुनवाई से इनकार कर दिया था. यही नहीं, हाल के दिनों में कुछ वकीलों द्वारा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से याचिकाएं तैयार करने के मुद्दे पर भी उन्होंने सख्त रुख अपनाया था.
आज इन अहम मामलों पर होगी सुनवाई
सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में कई अहम मामलों पर सुनवाई प्रस्तावित है. दिल्ली-एनसीआर में बढ़ते वायु प्रदूषण पर अदालत गंभीरता से विचार करेगी. साथ ही सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की हिरासत को चुनौती देने वाली याचिका भी सूचीबद्ध है. इसके अलावा Meta और WhatsApp द्वारा दायर याचिकाओं पर भी सुनवाई होनी है, जिनमें भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग द्वारा लगाए गए 213.14 करोड़ रुपये के जुर्माने को चुनौती दी गई है.
बताते चलें कि सुप्रीम कोर्ट की यह सख्ती एक बार फिर याद दिलाती है कि न्यायालय की कार्यवाही केवल कानूनी दलीलों का मंच नहीं, बल्कि अनुशासन और मर्यादा का प्रतीक भी है. अदालत का हर शब्द और हर टिप्पणी लोकतंत्र की नींव से जुड़ी होती है। ऐसे में न्यायपालिका की गरिमा बनाए रखना सभी पक्षों की साझा जिम्मेदारी है.
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