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उत्तर प्रदेश में होली से पहले नई विवादित मांग, दिनेश शर्मा ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को लिखा पत्र, मुस्लिम दुकानदारों पर प्रतिबंध की अपील

महाराज की इस मांग ने एक बार फिर 'आर्थिक बहिष्कार' की बहस को छेड़ दिया है. जहां एक पक्ष इसे सुरक्षा और धार्मिक शुद्धता का मामला बता रहा है, वहीं दूसरा पक्ष इसे सामाजिक भाईचारे और गंगा-जमुनी तहजीब के खिलाफ देख रहा है.

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14 Feb 2026
( Updated: 14 Feb 2026
01:14 PM )
उत्तर प्रदेश में होली से पहले नई विवादित मांग,  दिनेश शर्मा ने  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को लिखा पत्र, मुस्लिम दुकानदारों पर प्रतिबंध की अपील
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उत्तर प्रदेश में होली के त्योहार से पहले धार्मिक और राजनीतिक हलचल तेज हो गई है. श्रीकृष्ण जन्मभूमि और शाही ईदगाह मस्जिद विवाद मामले के मुख्य याचिकाकर्ता दिनेश शर्मा (फलाहारी महाराज) ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को एक पत्र लिखा है. उन्होंने मांग की है कि होली के पावन पर्व पर मुस्लिम दुकानदारों को रंग और गुलाल बेचने से प्रतिबंधित किया जाए.

होली से पहले नई मांग

फलाहारी महाराज ने अपने पत्र में बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं. उनका कहना है कि हिंदू विरोधी तत्व होली की पवित्रता को भंग करने के लिए रंगों में कांच के टुकड़े और थूक जैसी अशुद्ध चीजें मिला सकते हैं. 

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उन्होंने चेतावनी दी है कि मुस्लिम समुदाय के लोगों को हिंदू त्योहारों के व्यापार से दूर रखा जाना चाहिए ताकि किसी भी तरह की अप्रिय घटना या धार्मिक भावनाएं आहत होने से बचा जा सके.

आर्थिक बहिष्कारपर फिर बहस

पत्र के माध्यम से दिनेश शर्मा ने अपील की है कि श्रीकृष्ण जन्मभूमि और अन्य प्रमुख मंदिरों के आसपास मुस्लिम व्यापारियों को स्टॉल लगाने की अनुमति दी जाए. उन्होंने इन गतिविधियों को 'लव जिहाद' की साजिशों से भी जोड़कर देखने की बात कही है. उनका तर्क है कि हिंदुओं के पवित्र त्योहार का सामान केवल सनातनी व्यापारियों द्वारा ही बेचा जाना चाहिए.

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अनशन पर कायम हैं फलाहारी महाराज

बता दें कि दिनेश शर्मा अपने कड़े संकल्पों के लिए जाने जाते हैं. उन्होंने पिछले 4 वर्षों से अन्न का त्याग कर रखा है और केवल फलाहार पर हैं. उनका संकल्प है कि जब तक जन्मभूमि परिसर से मस्जिद पूरी तरह नहीं हट जाती, वे सामान्य भोजन ग्रहण नहीं करेंगे. आज भी उनका यह अनशन जारी है.

महाराज की इस मांग ने एक बार फिर 'आर्थिक बहिष्कार' की बहस को छेड़ दिया है. जहां एक पक्ष इसे सुरक्षा और धार्मिक शुद्धता का मामला बता रहा है, वहीं दूसरा पक्ष इसे सामाजिक भाईचारे और गंगा-जमुनी तहजीब के खिलाफ देख रहा है. फिलहाल, इस पत्र पर मुख्यमंत्री कार्यालय या स्थानीय प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है.

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