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जंतर-मंतर पर बवाल के बाद अभिजीत दिपके का बड़ा आरोप, बोले- BJP करा रही है पथराव

जंतर-मंतर पर फिर पथराव के बाद CJP प्रमुख अभिजीत दीपके ने समर्थकों की संलिप्तता से इनकार करते हुए बाहरी तत्वों पर आंदोलन बिगाड़ने का आरोप लगाया. पुलिस मामले की जांच में जुटी है.

Image Source: IANS
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दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहा आंदोलन अब लगातार नए विवादों को जन्म दे रहा है. बुधवार देर रात एक बार फिर प्रदर्शन के दौरान पथराव और हंगामे की घटनाएं सामने आईं. इस पूरे घटनाक्रम के बाद कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रमुख अभिजीत दीपके ने हिंसा में अपने समर्थकों की भूमिका से साफ इनकार किया है. उन्होंने आरोप लगाया कि आंदोलन को बदनाम करने के लिए बाहरी लोगों को भेजा जा रहा है. वहीं दूसरी ओर पुलिस का कहना है कि पथराव में उसके कई अधिकारी घायल हुए हैं और मामले की जांच जारी है.

आंदोलन को बदनाम करने की साजिश

गुरुवार सुबह मीडिया से बातचीत में अभिजीत दीपके ने कहा कि उनका आंदोलन पिछले एक महीने से शांतिपूर्ण तरीके से चल रहा था और इस दौरान किसी तरह की हिंसा नहीं हुई. उनके मुताबिक जैसे-जैसे आंदोलन को समर्थन मिलने लगा, वैसे-वैसे कुछ बाहरी तत्व माहौल खराब करने के लिए पहुंचने लगे. उन्होंने दावा किया कि इन लोगों का उद्देश्य आंदोलन की छवि को नुकसान पहुंचाना है.

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बीजेपी और पुलिस पर लगाए गंभीर आरोप

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दीपके ने भारतीय जनता पार्टी पर भी गंभीर आरोप लगाए. उनका कहना था कि आंदोलन को कमजोर करने के लिए बीजेपी से जुड़े लोग जानबूझकर प्रदर्शन स्थल के आसपास माहौल बिगाड़ रहे हैं. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पुलिस और कुछ राजनीतिक लोगों की मिलीभगत से पथराव की घटनाओं को अंजाम दिया जा रहा है. हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है और संबंधित पक्षों की ओर से इन दावों को लेकर आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आना बाकी है.

पथराव में दो एसीपी समेत छह पुलिसकर्मी घायल

उधर पुलिस के अनुसार जंतर-मंतर के पास प्रदर्शन के दौरान दो अलग-अलग घटनाओं में पथराव हुआ. पहली घटना शाम करीब साढ़े चार बजे हुई, जिसमें एक पत्थर सहायक पुलिस आयुक्त (ACP) जय प्रकाश के माथे पर लगा और वह घायल हो गए. पुलिस के मुताबिक रात में फिर से हंगामा हुआ, जिसमें एक अन्य एसीपी को गंभीर चोट आई. उन्हें पहले राम मनोहर लोहिया अस्पताल ले जाया गया और बाद में बेहतर इलाज के लिए एम्स रेफर किया गया. इन घटनाओं में कुल दो एसीपी और चार अन्य पुलिसकर्मियों के घायल होने की जानकारी दी गई है.

उपद्रवियों की तलाश में जुटी पुलिस

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हिंसा के बाद दिल्ली पुलिस अब उपद्रवियों की पहचान करने और उन्हें पकड़ने की कोशिश में जुटी है. कई जगहों के सीसीटीवी फुटेज और अन्य तकनीकी साक्ष्यों की मदद से जांच आगे बढ़ाई जा रही है. पुलिस का कहना है कि कानून व्यवस्था बिगाड़ने वाले लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी.

पुलिस कार्रवाई का विरोध 

दूसरी तरफ CJP और आंदोलन का समर्थन कर रहे विपक्षी दल पुलिस कार्रवाई का विरोध कर रहे हैं. इससे पहले भी हिंसा के बाद हिरासत में लिए गए लोगों की रिहाई की मांग उठ चुकी है. आंदोलन का समर्थन कर रहे सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने भी सरकार के सामने यह मांग रखी है कि प्रदर्शन से जुड़े लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई न की जाए.

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बहरहाल, जंतर-मंतर का आंदोलन केवल एक विरोध प्रदर्शन नहीं रह गया है, बल्कि यह राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप और कानून व्यवस्था की बड़ी चुनौती बनता जा रहा है. एक ओर पुलिस हिंसा के लिए जिम्मेदार लोगों तक पहुंचने की कोशिश कर रही है, तो दूसरी ओर आंदोलनकारी खुद को निर्दोष बताते हुए साजिश का आरोप लगा रहे हैं. ऐसे में अब सभी की नजर जांच के नतीजों और प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हुई है.

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