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क्यों कभी ख़राब नहीं होता असली शहद? इसे सालों तक सुरक्षित रखने वाले गुण क्या हैं

क्या आपको पता है की शहद जिसे खाते ही आपके अंदर मिठास घुल जाती है वो खुद दरअसल प्राकृतिक रूप से एसिडिक है? जी हाँ, शहद का औसत pH स्तर लगभग 3.9 होता है और इसमें मुख्य रूप से 'ग्लूकोनिक एसिड' पाया जाता है। यही एसिडिक माहौल साल्मोनेला और ई.कोलाई जैसे बेहद खतरनाक बैक्टीरिया के लिए एक 'डेथ जोन' की तरह काम करता है। इसी खूबी के कारण सदियों से शहद को जले हुए घावों पर भी लगाया जाता है या अल्सर को ठीक करने में भी इसका इस्तेमाल होता है।

Image Credit: ChatGPT
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दुनिया की ऐसी कौन सी चीज़ है जो हज़ारों साल बाद भी एक्सपायर नहीं होती और आप उसे बिना किसी झिझक के खा सकते हैं? शायद आपके दिमाग में तुरंत शहद का नाम आएगा और आप बिल्कुल सही सोच रहे हैं। इतिहास कहता है की इंसान करीब 5,500 ईसा पूर्व से ही इस प्राकृतिक मिठास का लुत्फ उठाता आ रहा है। इसी भरोसे पर हम ये मान बैठे हैं की शहद एक ऐसी जादुई चीज है जो कभी खराब नहीं होती। और इसीलिए हम अक्सर अपने किचन में  महीनों या सालों पुराना रखा शहद बिना सोचे समझे खा लेते हैं।

लेकिन ये बात जानना ज़रूरी है की कुछ खास परिस्थितियां ऐसी भी हैं जिनमें ये शहद खराब भी हो सकता है जिसे खाने पर आपको नुकसान हो सकता है। तो आइए जानते हैं की आखिर सच क्या है। 

सालों तक क्यों ख़राब नहीं होता शहद?

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शहद का सालों साल खराब न होना कोई जादू नहीं है। इसके पीछे एक शानदार वैज्ञानिक प्रक्रिया है। आखिर शहद में ऐसी क्या अद्भुत खूबियां होती हैं, जो इसे अनंत काल तक खराब होने से बचाती हैं। 

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चीनी की भारी मात्रा और पानी का कम होना : 80% हिस्सा चीनी और 18% से भी कम पानी होने की वजह से शहद लंबे समय तक बिना खराब हुए चलता है। इतनी ज्यादा चीनी होने की वजह से शहद में ऑस्मोटिक प्रेशर बहुत अधिक होता है। यानी कोई बैक्टीरिया या फंगस शहद में अगर पनपने की कोशिश करे तो शहद उसके अंदर मौजूद पानी की आखिरी बूंद को भी खुद में सोख लेता है। जिससे वो माइक्रोऑर्गेनिस्म वहीं खत्म हो जाता है। गाढ़ा होने की वजह से शहद में ऑक्सीजन भी आसानी से नहीं घुल पाती।

प्राकृतिक रूप से इसका एसिडिक होना : क्या आपको पता है की शहद जिसे खाते ही आपके अंदर मिठास घुल जाती है वो खुद दरअसल प्राकृतिक रूप से एसिडिक है? जी हाँ, शहद का औसत pH स्तर लगभग 3.9 होता है और इसमें मुख्य रूप से 'ग्लूकोनिक एसिड' पाया जाता है। यही एसिडिक माहौल साल्मोनेला और ई.कोलाई जैसे बेहद खतरनाक बैक्टीरिया के लिए एक 'डेथ जोन' की तरह काम करता है। इसी खूबी के कारण सदियों से शहद को जले हुए घावों पर भी लगाया जाता है या अल्सर को ठीक करने में भी इसका इस्तेमाल होता है।

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इसमें मधुमक्खियों का खास एंजाइम होना : शहद के ना खराब होने के पीछे जो तीसरा इम्पोर्टेन्ट फैक्टर है वो है इसमें मौजूद मधुमक्खियों का खास एंजाइम। जब मधुमक्खियां फूलों का रस इकट्ठा करती हैं तो इसमें एक बेहद खास एंजाइम मिला देती हैं जिसे 'ग्लूकोज ऑक्सीडेज' कहा जाता है। जब पकने की प्रक्रिया चलती हैं तब 'हाइड्रोजन पेरोक्साइड' बनता है जो एक एंटीबैक्टीरियल एजेंट है और कीटाणुओं का खात्मा करता है। 

किन परिस्थितियों में शहद का ख़राब होना संभव है?

आइए अब जानते हैं की ऐसी कौन सी परिस्थितियां हैं जिनमें कभी ना ख़राब होने वाला शहद भी ख़राब हो सकता है या आपकी सेहत को नुकसान पहुंचा सकता है। 

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शहद में कई बार सी. बोटुलिनम नाम के बैक्टीरिया के स्पोर्स पाए जाते हैं जो खतरनाक न्यूरोटॉक्सिन पैदा करता है। ये बड़ों के लिए नुकसानदायक नहीं है लेकिन 1 साल से कम उम्र के बच्चे जब शहद का सेवन करते हैं, तो इससे उन्हें लकवा, सांस की दिक्कत और नर्वस सिस्टम को डैमेज करने वाली गंभीर बीमारी हो सकती है। इसीलिए एक साल से कम उम्र के बच्चों को भूलकर भी शहद की एक बूंद भी नहीं देनी चाहिए। 

इसके अलावा बाजार में आजकल हर चीज़ में मिलावट पाई जाती है। शुद्ध शहद जहाँ हजारों साल तक खराब नहीं होता, वहीं बाजार में मिलने वाला शहद कुछ ही महीनों में अपना स्वाद और गुण खो देता है। ज़्यादा से ज़्यादा मुनाफा कमाने के चक्कर में कई कंपनियां इसमें सस्ता सिरप या गन्ने का सिरप मिला देती हैं। ये मिलावटी शहद बहुत जल्दी खराब हो जाता है। कई बार मधुमक्खियों के छत्ते से शहद को पूरी तरह पकने से पहले ही निकाल लिया जाता है। ऐसे शहद में पानी की मात्रा बढ़कर 25% तक हो सकती है। पानी ज़्यादा होने की वजह से भी ये ख़राब हो सकता है। 

शहद को लंबे समय तक सही रखने के लिए उसे किसी एयरटाइट कंटेनर में सही तापमान में स्टोर करें। इसे किसी सूखी जगह पर रखना सबसे अच्छा होता है ताकि इसके अंदर हवा या नमी ना जाए, नहीं तो ये जल्दी ख़राब हो जाएगा। 

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Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारी केवल सामान्य ज्ञान और जागरूकता के उद्देश्य से है. प्रत्येक व्यक्ति की स्वास्थ्य स्थिति और आवश्यकताएं अलग-अलग हो सकती हैं. इसलिए, इन टिप्स को फॉलो करने से पहले अपने डॉक्टर या किसी विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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