Advertisement

Loading Ad...
Loading Ad...

बरसात के मौसम में सेहत का रखें ध्यान, 'हल्का भोजन' खाएं और पेट को रखें दुरुस्त

हल्का भोजन शरीर को आवश्यक पोषण देने के साथ-साथ सुस्ती और भारीपन से भी बचाता है। मौसम में बदलाव के दौरान या रात के समय हल्का भोजन करने से नींद बेहतर आती है और वजन नियंत्रित रखने में भी मदद मिलती है। आधुनिक विज्ञान के अनुसार भी कमजोर पाचन की स्थिति में हल्का भोजन मेटाबॉलिज्म के लिए भी बेहतर होता है।

Image Credit: Gemini
Loading Ad...

आयुर्वेद में स्वास्थ्य को बनाए रखने के लिए मौसम यानी 'ऋतुचर्या' का विशेष महत्व बताया गया है। मौसम बदलने के साथ साथ हमारे शरीर में भी कई तरह के बदलाव होते हैं। जैसे वात, पित्त और कफ दोष, पाचन अग्नि तथा शारीरिक बल में परिवर्तन होते हैं। इसी वजह से आयुर्वेद में मौसम के साथ आहार में  बदलाव करने की सलाह दी जाती है, ताकि शरीर बीमारियों से मुक्त रह सके।

बरसात के मौसम में खाएं हल्का खाना 

आयुष मंत्रालय के अनुसार, वर्षा ऋतु में पाचन अग्नि स्वाभाविक रूप से कमजोर हो जाती है। इससे भोजन का पाचन धीमा पड़ सकता है और पाचन संबंधी समस्याएं बढ़ सकती हैं। ऐसे में ताजा, हल्का और गर्म भोजन करना सबसे उपयुक्त माना जाता है।

Loading Ad...

बरसात के मौसम में अधिक आर्द्रता, ठंडी हवाओं और बादलों के कारण पाचन शक्ति प्रभावित होती है। गर्मी के मौसम में शरीर में इकट्ठा हुआ पित्त भी इस दौरान असंतुलित हो सकता है। ऐसे में तला-भुना, तैलीय और अधिक मसालेदार भोजन पचाने में कठिनाई होती है, जिससे अपच, गैस, पेट फूलना (ब्लोटिंग), एसिडिटी, पेट दर्द और जलन जैसी समस्याएं हो सकती हैं। इसके विपरीत, हल्का भोजन आसानी से पच जाता है और पेट पर अतिरिक्त बोझ नहीं डालता।

Loading Ad...

हल्का भोजन शरीर को आवश्यक पोषण देने के साथ-साथ सुस्ती और भारीपन से भी बचाता है। मौसम में बदलाव के दौरान या रात के समय हल्का भोजन करने से नींद बेहतर आती है और वजन नियंत्रित रखने में भी मदद मिलती है। आधुनिक विज्ञान के अनुसार भी कमजोर पाचन की स्थिति में हल्का भोजन मेटाबॉलिज्म के लिए भी बेहतर होता है।

इस मौसम में क्या खाना चाहिए?

Loading Ad...

हल्के भोजन के रूप में मूंग की दाल, मूंग-चावल की खिचड़ी, गेहूं या जौ का दलिया तथा पुराने चावल का सेवन लाभकारी माना जाता है। वर्षा ऋतु या उपवास के दौरान जौ (यव), सत्तू और साबूदाने का सेवन भी किया जा सकता है। रोटी और विशेष रूप से पराठों का सीमित मात्रा में सेवन करने की सलाह दी जाती है। इसके अलावा, उबली या हल्की पकी सब्जियां जैसे लौकी, तुरई, परवल, टिंडा, पालक, मेथी और भिंडी लाभदायक होती हैं। मूंग दाल, छिलके वाली मसूर दाल तथा छाछ या सीमित मात्रा में दही का सेवन भी किया जा सकता है।

विशेषज्ञों के अनुसार, भोजन हमेशा ताजा, गर्म और कम मात्रा में करना चाहिए। जरूरत से अधिक भोजन करने से पाचन संबंधी परेशानियां बढ़ सकती हैं। गुनगुना पानी, अदरक की चाय, जीरा पानी, नारियल पानी तथा रात में हल्दी वाला गुनगुना दूध लाभकारी माना जाता है। सौंठ या जीरे के साथ छाछ का सेवन भी पाचन के लिए फायदेमंद हो सकता है।

यह भी पढ़ें

Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारी केवल सामान्य ज्ञान और जागरूकता के उद्देश्य से है. प्रत्येक व्यक्ति की स्वास्थ्य स्थिति और आवश्यकताएं अलग-अलग हो सकती हैं. इसलिए, इन टिप्स को फॉलो करने से पहले अपने डॉक्टर या किसी विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

अधिक →

Advertisement

Loading Ad...
Loading Ad...
Loading Ad...
Loading Ad...
अधिक →

Advertisement

Loading Ad...
Loading Ad...