Advertisement

Loading Ad...
Loading Ad...

सावधान! बच्चों में दिखने वाले इन लक्षणों को भूलकर भी न करें नजरअंदाज, हो सकते हैं कैंसर के संकेत

बच्चों में कैंसर होने की सबसे बड़ी चिंताजनक बात ये है कि इसके शुरुआती लक्षण काफी हद तक सामान्य बीमारियों जैसे लगते हैं, जैसे सर्दी-जुकाम, बुखार या कमजोरी। इसी वजह से इसे साधारण इंफेक्शन या मौसम का असर मानकर नजरअंदाज कर दिया जाता है। इसलिए जरूरी है कि माता-पिता, शिक्षक और परिवार के लोग बच्चों में दिखने वाले छोटे-छोटे बदलावों को भी गंभीरता से लें।

Image Credit: Gemini
Loading Ad...

बच्चों में कैंसर का पता चलते ही किसी भी माता-पिता के पैरों तले जमीन खिसक जाती है। मन में डर और चिंता आना स्वाभाविक है, लेकिन समय रहते अगर  कैंसर की पहचान कर ली जाए, तो बड़ों की तुलना में बच्चों में इसके इलाज की संभावना कई गुना बढ़ जाती है।

बच्चों में कैंसर होने की सबसे बड़ी चिंताजनक बात ये है कि इसके शुरुआती लक्षण काफी हद तक सामान्य बीमारियों जैसे लगते हैं, जैसे सर्दी-जुकाम, बुखार या कमजोरी। इसी वजह से इसे साधारण इंफेक्शन या मौसम का असर मानकर नजरअंदाज कर दिया जाता है। इसलिए जरूरी है कि माता-पिता, शिक्षक और परिवार के लोग बच्चों में दिखने वाले छोटे-छोटे बदलावों को भी गंभीरता से लें।

क्या हैं शुरूआती संकेत?

Loading Ad...

लगातार बुखार आना
बिना कारण वजन कम होना
शरीर पर नीले निशान 
गांठ बनना
आंखों में चमक 
सिरदर्द और उल्टी 

Loading Ad...

इन संकेतों को समझना और समय पर डॉक्टर से संपर्क करना ही बच्चे की जिंदगी बचा सकता है।

शुरुआती चेतावनी संकेतों को पहचानना है बेहद जरूरी

Loading Ad...

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार, बच्चों में होने वाले कैंसर का जल्दी पता चलना उनके बचने की संभावना को काफी हद तक बढ़ा देता है, चूंकि बचपन के कैंसर के कई लक्षण सामान्य सर्दी-जुकाम या वायरल संक्रमण जैसे दिखते हैं, इसलिए माता-पिता और डॉक्टरों के लिए इसके शुरुआती चेतावनी संकेतों को पहचानना बेहद जरूरी है। तो चलिए आपको बच्चों में कैंसर के कुछ प्रमुख शुरुआती संकेत के बारे में बताते हैं, जो इस प्रकार होते हैं।

बिना वजह लगातार बुखार: यह बच्चों में सबसे आम कैंसर है। कैंसर सेल्स बोन मैरो में नॉर्मल सेल्स की जगह ले लेते हैं। इससे शरीर की इम्यूनिटी कमजोर हो जाती है और शरीर संक्रमण से लड़ नहीं पाता, इसलिए लगातार बुखार बना रहता है। साथ ही कैंसर सेल्स खुद ऐसे केमिकल्स (पायरोजन) छोड़ते हैं जो दिमाग के टेम्परेचर सेंटर को बढ़ा देते हैं।

असामान्य गांठ या सूजन: लसिका ग्रंथियों में कैंसर सेल्स जमा होने से बिना दर्द वाली गिल्टियां बन जाती हैं। अगर 2 हफ्ते से ज्यादा है, बुखार और वजन कम होने के साथ है, तो तुरंत जांच जरूरी है। गांठ का मतलब है कैंसर सेल्स एक जगह इकट्ठा हो रहे हैं। समय पर इलाज न मिलने पर ये खून के जरिए फेफड़े, लीवर, दिमाग तक फैल सकते हैं।

Loading Ad...

हड्डियों और जोड़ों में दर्द: ये कैंसर 10 से 18 साल के टीनएजर्स में सबसे ज्यादा होता है, जब हड्डियां तेजी से बढ़ रही होती हैं। कैंसर सेल्स हड्डी के अंदर तेजी से बढ़कर हड्डी को अंदर से कमजोर और खोखला कर देते हैं।

बिना कारण वजन कम होना और थकान: कैंसर सेल्स बच्चों के खाने से मिलने वाली सारी कैलोरी और प्रोटीन खुद खा लेते हैं। बच्चा खा तो रहा है, लेकिन वजन बढ़ने की जगह घट रहा है। अगर बच्चे में यह लक्षण देखने को मिले, तो तुरंत जांच करवाएं। बच्चा खा तो रहा है, लेकिन वजन बढ़ने की जगह घट रहा है।

आसानी से चोट लगना, खून बहना: बच्चों में रक्त कैंसर (ल्यूकेमिया) या अन्य गंभीर बीमारियों के शुरुआती लक्षणों में आसानी से चोट लगना और खून बहना बहुत आम हैं। बोन मैरो (अस्थि मज्जा) में कैंसर कोशिकाओं के बढ़ने के कारण स्वस्थ प्लेटलेट्स का निर्माण रुक जाता है। प्लेटलेट्स खून का थक्का जमाने का काम करती हैं। इनकी कमी से शरीर में खून का थक्का नहीं बन पाता।

Loading Ad...

कैंसर शरीर में ऐसे केमिकल्स छोड़ता है जिससे भूख मर जाती है, जी मिचलाता है और मसल्स तेजी से टूटने लगते हैं। यदि इस तरह के लक्षण 2 सप्ताह से अधिक समय तक बने रहते हैं या फिर और ज्यादा बिगड़ने लगते हैं तो तुरंत जांच करवाएं और डॉक्टर से संपर्क करें।

Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारी केवल सामान्य ज्ञान और जागरूकता के उद्देश्य से है. प्रत्येक व्यक्ति की स्वास्थ्य स्थिति और आवश्यकताएं अलग-अलग हो सकती हैं. इसलिए, इन टिप्स को फॉलो करने से पहले अपने डॉक्टर या किसी विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

LIVE
अधिक →

Advertisement

Loading Ad...
Loading Ad...
Loading Ad...
Loading Ad...
अधिक →

Advertisement

Loading Ad...
Loading Ad...