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ड्रैगन को आर्मी चीफ ने उधेड़ा, पाकिस्तान को भी नहीं छोड़ा !

सेना प्रमुख उपेंद्र द्विवेदी ने बताया कि ड्रैगन कितना चालबाज़ है…ये समझने के लिए…लद्धाख में समझौते के बावजूद अरुणाचल में चल रही उसकी चालबाज़ी को देखना होगा…अब आर्मी चीफ़ ने चीन को दो टूक समझा दिया है…और कहा कि भारत चीन के साथ वास्तविक नियंत्रण रेखा पर तैनात अपने सैनिकों की संख्या में जल्द ही कमी नहीं करेगा

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हमारा पड़ोसी चीन। जिसके साथ चल रहा सीमा विवाद अभी भी पूरी तरह सुलझा नहीं है। लद्धाख के क्षेत्र में लंबी चली बातचीत के बाद समझौता तो हुआ। लेकिन चीन से सीमा विवाद पूरी तरह सुलझ गया है ये समझना ग़लतफ़हमी होगी। इस बात को पहले विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा और अब सेना प्रमुख उपेंद्र द्विवेदी ने।ड्रैगन कितना चालबाज़ है। ये समझने के लिए। लद्धाख में समझौते के बावजूद अरुणाचल में चल रही उसकी चालबाज़ी को देखना होगा। अब आर्मी चीफ़ ने चीन को दो टूक समझा दिया है।और कहा कि भारत चीन के साथ वास्तविक नियंत्रण रेखा पर तैनात अपने सैनिकों की संख्या में जल्द ही कमी नहीं करेगा।सेना प्रमुख कहा कि प्रतिद्वंद्वी सेनाओं के बीच अभी भी 'कुछ हद तक गतिरोध' बना हुआ है। सेना दिवस से पहले सेना प्रमुख ने प्रेस कॉन्फ़्रेंस के दौरान कहा कि ।


"भारत चीन के साथ वास्तविक नियंत्रण रेखा पर तैनात अपने सैनिकों की संख्या में निकट भविष्य में कोई कमी नहीं करेगा। बफर जोन नाम की कोई चीज नहीं है क्योंकि हिंसा की संभावना से बचने के लिए कुछ क्षेत्रों में गश्त पर अस्थायी रोक लगा दी गई है"

यानी आर्मी चीफ़ ने ये साफ़ किया कि चीन के ऊपर भरोसा करना एक गलती होगी। हमें हमारी सीमाओं की सुरक्षा में कोई कोताही नहीं बरतने चाहिए। इसी के साथ आर्मी चीफ़ ने इस दौरान पाकिस्तान को भी उधेड़ दिया। पाकिस्तान का काला चिट्ठा खोलते हुए आर्मी चीफ़ ने कहा कि जम्मू कश्मीर में मारे गए 60 % आतंकी पाकिस्तानी ही थी।आर्मी चीफ़ ने बताया कि 

"जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में हम धीरे-धीरे टेररिज्म से टूरिज्म की ओर बढ़ रहे हैं। लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (चीन सीमा) पर स्थिति संवेदनशील है, लेकिन कंट्रोल में है। इस मुद्दे पर पीएम मोदी भी चीन के प्रमुख से बात कर चुके हैं। वहां अब बफर जोन नहीं है..जम्मू-कश्मीर में फिलहाल एक्टिव आतंकियों में से 80% पाकिस्तान बेस्ड आतंकी हैं। 2024 में ढेर हुए आतंकियों में से भी 60% पाकिस्तानी थे। घाटी में फिलहाल स्थिति कंट्रोल में है। हालांकि बॉर्डर पार से लगातार घुसपैठ की कोशिशें जारी हैं। हाल के ही महीनों में उत्तरी कश्मीर और डोडा-किश्तवाड़ बेल्ट में आतंकियों की गतिविधियां देखी गईं। सिचुएशन आउट ऑफ कंट्रोल नहीं हुई है। हम धीरे-धीरे टेररिज्म से टूरिज्म की ओर बढ़ रहे हैं"

इसी के साथ आर्मी चीफ़ ने नॉर्थ ईस्ट के मुद्दे पर भी बोलते हुए बताया कि वहां भी चीजें अब कंट्रोल में हैं। लेकिन अब विदेश मंत्री के बाद आर्मी चीफ़ ने LAC के मुद्दे पर जो बताया वो एक दम सही है। चीन के साथ बड़ी ही समझदारी से डील करना ज़रूरी और किसी भी तरह का भरोसा उसपर नहीं किया जा सकता।
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