‘मुस्लिम होने से काम नहीं मिल रहा, तो वापस हिंदू बन जाएं’, AR Rahman के विवादित पर भड़के अनुप जलोटा, दे डाली अजीब सलाह

एआर रहमान के 'कम्युनल' वाले बयान पर अभी भी बवाल मचा हुआ है. अब गायक अनूप जलोटा ने संगीतकार एआर रहमान को एक चौंकाने वाली सलाह दी है.

‘मुस्लिम होने से काम नहीं मिल रहा, तो वापस हिंदू बन जाएं’, AR Rahman के विवादित पर भड़के अनुप जलोटा, दे डाली अजीब सलाह

एआर रहमान के हालिया 'कम्युनल' बयान ने संगीत और फिल्म जगत में हलचल मचा दी है. उनके इस बयान की सोशल मीडिया पर जमकर आलोचना हो रही है. इसके साथ ही आमजन और एक्टर्स की भी प्रतिक्रिया सामने आ रही है. इसी बीच गायक अनूप जलोटा ने रहमान को एक बेहद चौंकाने वाली सलाह दे दी है.

‘वापस हिंदू धर्म अपनाएं’

गायक अनूप जलोटा ने संगीतकार एआर रहमान को एक चौंकाने वाली सलाह दी है. उन्होंने आईएएनएस से बातचीत में कहा कि “अगर रहमान को लगता है कि मुसलमान होने की वजह से उन्हें फिल्मों में संगीत देने का काम नहीं मिल रहा, तो वे वापस हिंदू धर्म अपनाएं और फिर कोशिश करें.”

‘एआर रहमान पहले हिंदू थे’

अनूप जलोटा ने यहीं नहीं रुके उन्होंने कहा,  एआर रहमान पहले हिंदू थे और बाद में उन्होंने इस्लाम धर्म स्वीकार कर लिया. इसके बाद भी उन्होंने संगीत जगत में खूब काम किया, नाम कमाया और लोगों के दिलों में अपनी जगह बनाई. लेकिन अगर रहमान को अब ऐसा विश्वास है कि उनके धर्म की वजह से अवसर कम हो रहे हैं, तो उन्हें अपना पुराना धर्म अपनाने के बारे में सोचना चाहिए. 

‘हिंदू बनकर ट्राई करें’

अनुप जलोटा ने आगे कहा, “अगर उन्हें इस बात का विश्वास है कि हमारे देश में मुसलमान होने की वजह से उनको फिल्में नहीं मिल रही, म्यूजिक देने के लिए, तो वो फिर से हिंदू हो जाएं. तो, उनको यह विश्वास होना चाहिए कि उनको हिंदू होने से फिर से फिल्में मिलनी शुरू हो जाएंगी. यही तो रहमान के मतलब का सार है. इसलिए मेरा सुझाव है कि वे हिंदू बनकर ट्राई करें और देखें कि क्या फिर से उन्हें फिल्म प्रोजेक्ट्स मिलने लगते हैं या नहीं.”

रहमान के इस बयान पर बवाल मचा था

एआर रहमान ने हाल ही में दिए एक इंटरव्यू में कहा कि पिछले 8 सालों में फिल्म इंडस्ट्री में उनके काम में कमी आई है. इसका कारण उन्होंने पावर शिफ्ट बताया, जहां अब क्रिएटिव नहीं बल्कि गैर-क्रिएटिव लोग फैसले ले रहे हैं. उन्होंने संकेत दिया कि यह बदलाव "कम्युनल थिंग" से भी जुड़ा हो सकता है.

एआर रहमान ने हाल ही में बीबीसी नेटवर्क को दिए इंटरव्यू में कहा था ''मुझे बॉलीवुड में अब कम काम मिलने लगे हैं. कभी-कभी रचनात्मक निर्णय लेने की ताकत उन लोगों के हाथ में होती है जिनमें असल में क्रिएटिविटी नहीं होती. यह कभी-कभी साम्प्रदायिक कारणों से भी हो सकता है, लेकिन यह सीधे तौर पर पता नहीं चलता. यह केवल अफवाहों के रूप में पता चलता है कि मुझे किसी प्रोजेक्ट में चुना गया था, लेकिन फिर कंपनी ने अपने पांच अन्य कंपोजर्स को हायर कर लिया.”

‘मेरा उद्देश्य कभी किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचाना नहीं था’

इस मामले पर विवाद बढ़ने के बाद एआर रहमान ने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो पोस्ट कर सफाई थी. इस वीडियो में एआर रहमान ने अपनी भावनाओं और अपने दृष्टिकोण को स्पष्ट रूप से बताया. उन्होंने कहा था, ''मेरे लिए संगीत हमेशा से लोगों और संस्कृति से जुड़ने, उन्हें सेलिब्रेट करने और सम्मान देने का जरिया रहा है. भारत सिर्फ मेरा घर नहीं है, बल्कि मेरी प्रेरणा और गुरु भी है. मेरा उद्देश्य कभी किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचाना नहीं था. मैं उम्मीद करता हूं कि लोग मेरी ईमानदारी और सच्चे इरादों को समझेंगे और महसूस करेंगे.’’

‘मुझे खुद के भारतीय होने पर गर्व है’

वीडियो में रहमान ने कहा, ''मुझे खुद के भारतीय होने पर गर्व है. भारत ने मुझे वह मंच दिया है जहां मैं अपनी रचनात्मकता का पूर्ण स्वतंत्रता से प्रदर्शन कर सकता हूं. यह अवसर मुझे विभिन्न संस्कृतियों की आवाजों को सम्मान देने और संगीत के माध्यम से जोड़ने का मौका देता है. भारत ने मुझे हमेशा प्रेरित किया है और मेरे काम को और सार्थक बनाया है.’’

‘मैंने रामायण के संगीत में हांस जिमर के साथ सहयोग किया’

रहमान ने अपने करियर की कई यादगार परियोजनाओं का जिक्र भी किया. उन्होंने कहा, ''मैंने जला प्रोजेक्ट में काम किया, नागा संगीतकारों के साथ मिलकर स्ट्रिंग ऑर्केस्ट्रा बनाया, सनशाइन ऑर्केस्ट्रा को मेंटर किया और सीक्रेट माउंटेन नामक भारत के पहले मल्टीकल्चरल वर्चुअल बैंड की स्थापना की. साथ ही, मैंने रामायण के संगीत में हांस जिमर के साथ सहयोग किया. इन सब अनुभवों ने मेरे संगीत के मकसद को और मजबूत किया.’’

 ‘संगीत कभी किसी को चोट पहुंचाने का माध्यम नहीं रहा है’

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वीडियो के आखिर में संगीतकार एआर रहमान ने भारत के प्रति अपनी कृतज्ञता व्यक्त की. उन्होंने कहा, ''मेरा संगीत हमेशा अतीत का सम्मान करेगा, वर्तमान का जश्न मनाएगा और भविष्य को प्रेरित करेगा. संगीत कभी किसी को चोट पहुंचाने का माध्यम नहीं रहा है, बल्कि यह हमेशा लोगों को जोड़ने और सांस्कृतिक धरोहर का सम्मान करने का जरिया रहा है.’’

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